संजीवनी टुडे

मंदिर आन्दोलन के बाद चार बार भाजपा तो तीन बार कांग्रेस ने जीत का फहराया परचम

संजीवनी टुडे 11-03-2019 17:34:36


कानपुर। आचार संहिता लागू होने के बाद से लोकसभा चुनाव-2019 की रणभेरी बज चुकी है। इस चुनावी जंग में कानपुर नगर सीट पर सभी राजनीतिक दलों ने अपने जिताऊ प्रत्याशियों पर मंथन शुरू कर दिया है। इस सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होने वाला है। हालांकि सपा-बसपा और रालोद गठबंधन के तहत सपा भी पहली बार जीत का दंभ भर रही है। इस सीट के आंकड़ों में जाएं तो भाजपा को पहली जीत राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1991 में मिली थी। इसके बाद से अब तक सात लोकसभा चुनाव हुये जिसमें भाजपा को चार बार और कांग्रेस को तीन बार सफलता मिली है। कानपुर नगर सीट पर भाजपा, कांग्रेस और गठबंधन से कौन प्रत्याशी होगा, यह तो अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा के मुताबिक भाजपा से निवर्तमान सांसद व भाजपा के वरिष्ठ नेता डा. मुरली मनोहर जोशी पार्टी प्रत्याशी होंगे। 

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पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल पर कांग्रेस दांव लगाएगी। इसके साथ ही सपा के खाते में आई इस सीट पर कौन प्रत्याशी होगा, इस पर अभी तस्वीर बिल्कुल भी साफ नहीं है। सपा चाहती है कि कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों का ऐलान होने के बाद जातीय समीकरण को देखते हुए प्रत्याशी उतारा जाये। हालांकि इस सीट पर क्षेत्रीय दलों को कभी भी जीत मुनासिब नहीं हो सकी। कांग्रेस युग के बाद राम मंदिर आंदोलन से यहां की जनता भाजपा की ओर चल दी, तबसे यहां पर भाजपा को चार बार जीत मिल चुकी है। भाजपा की ओर से पहली जीत जगतवीर सिंह द्रोण को 1991 में मिली। इसके बाद से वह लगातार तीन बार सांसद रहे। तबसे लेकर आज तक कानपुर भाजपा का गढ़ माना जाने लगा और विधानसभा के चुनावों में क्षेत्रीय दलों के सत्ता में आने के बावजूद यहां पर भाजपा के विधायक बनते रहे। यह अलग बात रही कि इस बीच कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल ने तीन बार मामूली वोटों से जीत दर्ज की। अगर पिछले लोकसभा चुनाव की बात करें तो भाजपा के कद्दावर नेता डा. मुरली मनोहर जोशी ने कांग्रेस के श्री प्रकाश जायसवाल को 2,22,946 वोटों के भारी अंतर से हराया था। 

डा. जोशी को 4,74,712 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल को 2,51,766 वोट मिले थे। 2019 लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन भले ही जातीय समीकरण को देखते हुए जीत का दंभ भरे पर जनता का मूड भाजपा और कांग्रेस पर ही टिका हुआ है। ऐसे में एक बार फिर संभावना है कि मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही देखने को मिलेगा। 

संगठन के लिहाज से मजबूत है भाजपा
राम मंदिर आंदोलन के बाद से कानपुर में भाजपा का संगठन दिनों दिन मजबूत होता चला गया। इसके चलते प्रदेश में क्षेत्रीय दलों की लहर के बाद भी यहां से भाजपा कमजोर नहीं हो सकी। 2007 विधानसभा चुनाव में कानपुर जनपद की 10 विधानसभाओं में सपा ने एक सीट पर बसपा तीन, कांग्रेस दो और भाजपा चार सीटें जीतने में सफल रही। इसी तरह 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा का तो खाता ही नहीं खुला। सपा पांच, कांग्रेस एक और भाजपा ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी। इन दोनों विधानसभा चुनावों में क्षेत्रीय दलों ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया था। शहरी क्षेत्र में भाजपा का ही दबदबा रहा।कानपुर नगर लोकसभा सीट में पांच विधानसभाएं शहर की आती हैं जिन पर भाजपा का बराबर दबदबा बना हुआ है। 

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हैट्रिक की तलाश में डा. जोशी
भाजपा के वरिष्ठ नेता व शहर सांसद डा. जोशी कभी भी तीन बार लगातार सांसद नहीं रहे। उन्होंने राजनीतिक शुरुआत इलाहाबाद से की और दो बार सांसद रहे। तीसरी बार सपा के कुंवर रेवती रमण सिंह से चुनाव हार गये। इसके बाद डा. जोशी ने चौथी बार सीट बदल दी और वाराणसी से मैदान में उतरे। यहां पर डा. जोशी कांग्रेस के तत्कालीन सांसद डा. राजेश मिश्रा को हराकर संसद पहुंचने में कामयाब रहे। हालांकि यहां पर उनका मुख्य मुकाबला जेल में बंद बसपा के मुख्तार अंसारी से था। 
अब तक कानपुर के सांसद 
2014 : डा. मुरली मनोहर जोशी (भाजपा)
2009, 04, 1999 : श्रीप्रकाश जायसवाल (कांग्रेस)
1998, 96, 91 : जगतवीर सिंह द्रोण (भाजपा)
1989 : सुभाषिनी अली (माकपा)
1985 : नरेशचंद्र चतुर्वेदी (कांग्रेस)
1980 : आरिफ मोहम्मद खान (कांग्रेस)
1977 : मनोहर लाल (भारतीय लोकदल)
1971, 67, 62, 57 : एसएम बनर्जी (निर्दलीय)
1952 : हरिहरनाथ शास्त्री (कांग्रेस)

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