संजीवनी टुडे

हर देशवासी कम से कम एक व्यक्ति को कुपोषण से बाहर निकाले : मोदी

संजीवनी टुडे 25-08-2019 13:07:57

प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने देशवासियों का आज आह्वान किया कि वे अगले माह पोषण अभियान में भाग लें और हर देशवासी कम से कम एक कुपोषित व्यक्ति को कुपोषण से बाहर निकालने में योगदान करें।


नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी ने देशवासियों का आज आह्वान किया कि वे अगले माह पोषण अभियान में भाग लें और हर देशवासी कम से कम एक कुपोषित व्यक्ति को कुपोषण से बाहर निकालने में योगदान करें। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में यह आह्वान किया। श्री मोदी ने संस्कृत के सुभाषितों में से एक को उद्धृत किया, “ पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि, जलमन्नं सुभाषितम्। 

यह भी पढ़े: अंतिम दर्शनों के लिए BJP मुख्यालय रखा गया अरुण जेटली का पार्थिव शरीर

मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा प्रदीयते।”

यानी पृथ्वी में जल, अन्न और सुभाषित, ये तीन रत्न हैं। पर मूर्ख लोग पत्थरों को रत्न कहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में अन्न की बहुत अधिक महिमा रही है। यहाँ तक कि हमने अन्न के ज्ञान को भी विज्ञान में बदल दिया है। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि संतुलित और पोषक भोजन हम सभी के लिए जरुरी है। विशेष रूप से महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए, क्योंकि, ये ही समाज के भविष्य की नींव है। ‘पोषण अभियान’ के अंतर्गत पूरे देशभर में आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से पोषण को जन-आन्दोलन बनाया जा रहा है। लोग नए और दिलचस्प तरीकों से कुपोषण से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के नासिक में चल रहे ‘मुट्ठी भर धान्य’ आन्दोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें फसल कटाई के दिनों में आंगनवाड़ी सेविकाएँ लोगों से एक मुट्ठी अनाज इकठ्ठा करती हैं। इस अनाज का उपयोग, बच्चों और महिलाओं के लिए गर्म भोजन बनाने में किया जाता है। इसमें दान करने वाला व्यक्ति एक प्रकार से जागरुक नागरिक समाज सेवक बन जाता है और उस आन्दोलन का वो एक सिपाही बन जाता है।

यह भी पढ़े: पीएम नरेंद्र मोदी आज G7 सम्मेलन में होंगे शामिल, ट्रंप से हो सकती है कश्मीर पर चर्चा

उन्होंने कहा कि हम सभी ने परिवारों में हिंदुस्तान के हर कोने में अन्न प्राशन संस्कार के बारे में सुना है। ये संस्कार तब किया जाता है जब बच्चे को पहली बार तरल भोजन की बजाय ठोस आहार खिलाना शुरू करते हैं। उन्होंने 2010 में गुजरात में आरंभ ‘अन्न प्राशन संस्कार’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों को पूरक आहार दिये जाने की यह एक बहुत ही शानदार पहल है जिसे, हर कहीं, अपनाया जा सकता है। कई राज्यों में लोग तिथि भोजन अभियान चलाते हैं। अगर परिवार में जन्मदिन हो, कोई शुभदिन हो, कोई स्मृति दिवस हो, तो परिवार के लोग, पौष्टिक खाना, स्वादिष्ट खाना बनाकर के आंगनवाड़ी में जाते हैं, स्कूलों में जाते हैं और परिवार के लोग खुद बच्चों को परोसते हैं, खिलाते हैं। अपने आनंद को भी बाँटते हैं और आनंद में इज़ाफा करते हैं। सेवाभाव और आनंदभाव का अद्भुत मिलन नज़र आता है। 

श्री मोदी ने कहा, “साथियों, ऐसी कई सारी छोटी-छोटी चीजें हैं जिससे हमारा देश कुपोषण के खिलाफ़ एक प्रभावी लड़ाई लड़ सकते हैं। आज, जागरूकता के आभाव में, कुपोषण से ग़रीब भी, और संपन्न भी, दोनों ही तरह के परिवार प्रभावित हैं। पूरे देश में सितम्बर महीना ‘पोषण अभियान’ के रूप में मनाया जाएगा। आप जरुर इससे जुड़िये, जानकारी लीजिये, कुछ नया जोड़िये। आप भी योगदान दीजिये। अगर आप एकाध व्यक्ति को भी कुपोषण से बाहर लाते हैं मतलब हम देश को कुपोषण से बाहर लाते हैं।”

पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार ही इस्तेमाल किये जाने वाले प्लास्टिक को समाप्त करने पर जोर दिया है । 
श्री मोदी ने आकाशवाणी पर ‘ मन की बात ’ कार्यक्रम में आज कहा कि पिछले कुछ सालों से दो अक्टूबर से पहले लगभग दो सप्ताह तक देशभर में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाया जाता है। इस बार यह 11 सितम्बर से शुरू होगा। इस दौरान लोग अपने-अपने घरों से बाहर निकल कर श्रमदान के ज़रिये राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को कार्यांजलि देंगे। घर हो या गलियाँ, चौक-चौराहे हो या नालियाँ, स्कूल, कॉलेज से लेकर सभी सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता का महा अभियान चलाना है। इस बार प्लास्टिक पर विशेष जोर देना है । 
उन्होंने कहा, “15 अगस्त को लाल किले से मैंने ये कहा कि जिस उत्साह व ऊर्जा के साथ सवा-सौ करोड़ देशवासियों ने स्वच्छता के लिए अभियान चलाया। खुले में शौच से मुक्ति के लिए कार्य किया। उसी प्रकार हमें साथ मिलकर सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तमाल को खत्म करना है। इस मुहीम को लेकर समाज के सभी वर्गों में उत्साह है। मेरे कई व्यापारी भाइयों-बहनों ने दुकान में एक तख्ती लगा दी है, एक प्लेकार्ड लगा दिया है। जिस पर यह लिखा है कि ग्राहक अपना थैला साथ ले करके ही आये। इससे पैसा भी बचेगा और पर्यावरण की रक्षा में वे अपना योगदान भी दे पायेंगे।” 

प्लीज सब्सक्राइब यूट्यूब बटन

 

प्रधानमंत्री ने कहा , “इस बार दो अक्टूबर को जब बापू की 150वीं जयंती मनायेंगे तो इस अवसर पर हम उन्हें न केवल खुले में शौच से मुक्त भारत समर्पित करेंगे बल्कि उस दिन पूरे देश में प्लास्टिक के खिलाफ एक नए जन-आंदोलन की नींव रखेंगे। मैं समाज के सभी वर्गों से, हर गाँव, कस्बे में और शहर के निवासियों से अपील करता हूँ, करबद्ध प्रार्थना करता हूँ कि इस वर्ष गाँधी जयंती, एक प्रकार से हमारी इस भारत माता को प्लास्टिक कचरे से मुक्ति के रूप में हम मनाये। दो अक्टूबर विशेष दिवस के रूप में मनायें। महात्मा गाँधी जयंती का दिन एक विशेष श्रमदान का उत्सव बन जाए। देश की सभी नगरपालिका, नगरनिगम, जिला-प्रशासन, ग्राम-पंचायत, सरकारी-गैरसरकारी सभी व्यवस्थाएँ, सभी संगठन, एक-एक नागरिक हर किसी से मेरा अनुरोध है कि प्लास्टिक कचरे के कलेक्शन और स्टोरेज के लिए उचित व्यवस्था हो। मैं कारपोरेट सेक्टर से भी अपील करता हूँ कि जब ये सारा प्लास्टिक कचरा इकठ्ठा हो जाए तो इसके उचित निस्तारण की व्यवस्था हो। इसे रिसाइकिल किया जा सकता है। इसे ईंधन बनाया जा सकता है। इस प्रकार इस दिवाली तक हम इस प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित निपटारे का भी कार्य पूरा कर सकते है। बस संकल्प चाहिए। प्रेरणा के लिए इधर-उधर देखने की जरुरत नहीं है गाँधी से बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है। ” 

गोवर्मेन्ट एप्रूव्ड प्लाट व फार्महाउस मात्र रु. 2600/- वर्गगज, टोंक रोड (NH-12) जयपुर में 9314166166

More From national

Trending Now
Recommended