संजीवनी टुडे

निशंक के एचआरडी का कार्यभार संभालते ही सौंपा गया नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट

संजीवनी टुडे 31-05-2019 22:12:09


नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' के कार्यभार संभालते ही शुक्रवार को डॉ कस्तूरीरंगन की अगुवाई वाली समिति ने बहुप्रतिक्षित नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति(एनईपी) का ड्राफ्ट सरकार को सौंप दिया। विशेषज्ञों के पैनल ने पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान प्रणालियों को शामिल करने, मातृभाषा के साथ-साथ तीन भारतीय भाषाओं का ज्ञान देने, एक राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन करने और निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वृद्धि पर अंकुश लगाना सहित कई महत्वपूर्ण सिफारिशों को शामिल किया है।

उत्तराखंड के हरिद्वार से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने आज शास्त्री भवन में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कार्यभार संभाला। पद संभालने के कुछ देर बाद ही नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार कर समिति ने इसका ड्राफ्ट मंत्री को सौंपा। मौजूदा शिक्षा नीति को 1986 में तैयार किया गया था और 1992 में इसमें संशोधन किया गया था। नई शिक्षा नीति 2014 के आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के घोषणा पत्र का हिस्सा थी। पिछली मोदी सरकार का कार्यकाल समाप्त होने तक इस नीति का इंतजार किया जाता रहा था।

समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय रखने की भी सिफारिश की है। नई शिक्षा नीति में गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन, मनोविज्ञान, योग, वास्तुकला, चिकित्सा के साथ-साथ शासन, राजनीति, समाज और संरक्षण पाठ्यक्रम में भारतीय योगदान शामिल होगा।

नई शिक्षा नीति में कम से कम पांचवीं कक्षा अथवा आठवीं कक्षा तक मातृभाषा में पढ़ाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को मातृभाषा और भारतीय भाषाओं को पढ़ने और लिखने में पारंगत करना है। इसके अतिरिक्त यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहे तो वह चौथी भाषा के तौर पर इसे पढ़ सकता है।

प्राइवेट स्कूलों में हर साल होने वाली मनमानी फीस वृद्धि पर भी नई शिक्षा नीति में चिंता जताई गई है। इसके लिए नीति में कहा गया है कि स्कूलों को फीस तय करने का अधिकार तो होना चाहिए लेकिन उसकी सीमा तय होनी चाहिए। इसके लिए महंगाई दर और दूसरे अन्य मापदंड हो सकते हैं। उसके अनुपात में ही फीस बढ़नी चाहिए।

शिक्षा नीति में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक राष्ट्रीय शिक्षा आयोग बनाने का सुझाव दिया गया है। उच्च शिक्षा में छात्रों को अपनी पसंद के विषय चुनने की अधिक छूट देने,  लिबरल आर्ट में चार साल की बैचलर डिग्री शुरू करने का भी प्रस्ताव है।

शिक्षा का अधिकार कानून के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने का भी सुझाव दिया गया है। शिक्षाविदों का मानना है कि इसे केवल आठवीं कक्षा तक ही नहीं बल्कि 12वीं तक की कक्षाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।

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परीक्षा के दौरान छात्रों को होने वाले तनाव को दूर करने के लिए 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में बहुवैकलिपक परीक्षा का विकल्प दिया जा सकता है।

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