संजीवनी टुडे

राष्ट्रीय परिवहन नीति से राज्यों के अधिकार में कटौती नहीं : सरकार

संजीवनी टुडे 22-07-2019 22:43:45

केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर कोई असर नहीं होगा।


नई दिल्ली। तमाम कोशिशों के बावजूद पिछले कार्यकाल में देश में सड़क दुर्घटनाअों में कमी लाने में विफलता की बात स्वीकार करते हुए सरकार ने लोकसभा में सोमवार को कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सड़क परिवहन व्यवस्था आम आदमी को मुहैया कराने के लिए वह राष्ट्रीय परिवहन नीति ला रही है, लेकिन इससे केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर कोई असर नहीं होगा। 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मोटन यान संशोधन विधेयक, 2019 पर चर्चा से पहले सदन को अवगत कराया कि देश में हर साल पाँच लाख सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं जिनमें डेढ़ लाख लोगों की मौत हो जाती है। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद पिछली सरकार के पाँच साल के कार्यकाल में उनका मंत्रालय देश में सड़क दुर्घटनाओं में मात्र साढ़े तीन से चार प्रतिशत तक की कमी ला सका, जो उनकी विफलता है। सरकार का लक्ष्य इन दुर्घटनाओं में 50 फीसदी तक कटौती लाने का था। 

उन्होंने कहा कि देश में लोग स्वयं नियमों का पालन नहीं करना चाहते। उन्हें 50 या 100 रुपये के जुर्माने से डर नहीं लगता और इसलिए जुर्माना बढ़ाने की जरूरत है। एक ही व्यक्ति के नाम पर कई लाइसेंस होते हैं। देश में 30 लाख बोगस लाइसेंस हैं।

श्री गडकरी ने स्प्ष्ट किया कि यह कानून राज्यों पर थोपा नहीं जायेगा। जो राज्य स्वेच्छा से इसे अपनाना चाहेंगे वह इसे अपना सकेंगे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को पिछली लोकसभा में पारित किया गया था, लेकिन राज्यसभा से पारित नहीं हो सकने के कारण नयी लोकसभा में विधेयक दोबारा लाना पड़ा। उन्होंने बताया कि पिछली बार जब यह विधेयक लाया गया था तो राजस्थान के तत्कालीन सड़क परिवहन मंत्री युनूस खान की अध्यक्षता में 18 राज्यों के परिवहन मंत्रियों की समिति ने इसकी समीक्षा की थी। संसद की स्थायी समिति एवं प्रवर समिति के पास भी इसे भेजा गया था। समिति की लगभग सभी सिफारिशों को विधेयक में समाहित किया गया है। 

उन्होंने कहा कि डीलर वाहन का पंजीकरण जरूर करेंगे, लेकिन क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को वे उसका शुल्क भी देंगे।

विधेयक में लर्निंग लाइसेंस ऑनलाइन देने, सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति एवं उनके परिजनों को तत्काल राहत के लिए बीमा नियमों में बदलाव, ट्रांसपोर्टर लाइसेंस के नवीनीकरण की अवधि तीन साल से बढ़ाकर पाँच साल करने तथा दिव्यांगों को लाइसेंस जारी करने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय को अधिकार दने का प्रावधान भी है।

चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के एंटो एंटनी ने प्रस्तावित कानून को राज्यों के अधिकारों पर कुठराघात करार दिया है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवहन नीति को परिवहन क्षेत्र के निजीकरण का जरिया बताते हुए कहा कि विधेयक में किये गये प्रावधानों से परिवहन क्षेत्र में राज्यों के अधिकारों का हनन होगा। उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस के लिए योग्यता की अनिवार्यता समाप्त करने की भी आलोचना की। 

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भाजपा के गोपाल शेट्टी ने विधेयक को जनहित का विधेयक करार देते हुए कहा कि इसके कानून में तब्दील होने से देश में न केवल परिवहन संबंधी कानून सख्त होंगे, बल्कि इससे परिवहन व्यवस्था में व्यापक सुधार भी होगा। चर्चा अधूरी रही। 

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