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चीन से वार्ता में फंसे पेंच पर मंथन शुरू

संजीवनी टुडे 15-07-2020 22:17:19

चीन से वार्ता में फंसे पेंच पर मंथन शुरू


नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख की सीमा पर चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए भारत और चीन के कोर कमांडरों के बीच 14 घंटे तक हुई वार्ता के बाद ताजा स्थिति से अवगत होने के बाद बुधवार को शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व ने गहन मंथन शुरू कर दिया है। पैंगोंग और डेपसॉन्ग एरिया के फंसे पेंच को सुलझाने के लिए एक बार और कोर कमांडर स्तर की मीटिंग हो सकती है। साथ ही जिन मुद्दों पर सहमति बनी है, उन पर धीरे-धीरे आगे बढ़ने की प्रक्रिया तय की जा सकती है। अब उच्च स्तर पर फैसले लिए जाने के बाद ही आगे की कार्यवाही तय होगी, तब भारत के कमांडरों को अगले आदेशों का इंतजार करने को कहा गया है। 

भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच भारतीय क्षेत्र के चुशूल में मंगलवार सुबह 11.30 बजे शुरू हुई बैठक रात 2 बजे तक चली। लगभग 14 घंटे की इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद बुधवार को सुबह नॉर्दन आर्मी कमांडर और कोर कमांडर ने सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को मीटिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी बैठक की प्रगति के बारे में बताया गया। फिर शाम को चाइना स्टडी ग्रुप के साथ उन मुद्दोंं पर चर्चा की गई जिन पर दोनों देशों के कोर कमांडरों की बैठक में सहमति नहीं बन पाई है। 

दरअसल पहले चरण में दोनों देशों के सैनिकों को आमने-सामने से हटाकर बीच में एक बफर जोन बनाना था ताकि गलवान घाटी जैसी घटना से बचा जा सके। अभी पैंगोंग झील के इलाके में पहला चरण ही पूरा नहीं हो पाया है। भारत की तरफ से साफ कहा गया कि चीन को पैंगोंग एरिया में फिंगर-8 से पीछे जाना होगा लेकिन चीन इस पर बिल्कुल सहमत नहीं है। सैन्य कमांडरों की बैठक में दोनों देशों की शर्तों को लेकर किसका क्या रुख रहा और किस बात पर सहमति बनती दिखी। इन मुद्दों पर उच्च स्तरीय चर्चा के बाद ही दूसरे चरण की जमीनी स्तर की कार्यवाही के बारे में फैसला लिया जाएगा क्योंकि फेज 2 की प्रक्रिया काफी पेचीदा है जिसमें कई महीने लग सकते हैं। 

इस मैराथन बैठक में एलएसी पर तनाव कम करने और पैंगोंग झील और डेपसॉन्ग के इलाकों में सैन्य मौजूदगी कम करने के लिए रोडमैप तैयार करने पर मंथन हुआ। बैठक मेंं एलएसी के दोनों तरफ मौजूद करीब 30 हजार सैनिकों को चरणबद्ध तरीके से पीछे हटाने की रणनीति भी बनी। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख के इलाकों में दोनों देशों की तैनात आर्टिलरी फोर्सेज, टैंक और अन्य भारी हथियारों को वापस ले जाने को लेकर बातचीत की गई। बैठक में दूसरे चरण पर बात करके इसकी टाइमलाइन तय करने की कोशिश की गई। अभी पूर्वी लद्दाख में एलएसी के दोनों तरफ दोनों देशों ने हजारों की संख्या में सैनिक और बड़े हथियार तैनात कर रखे हैं जिन्हें पीछे करना असल चुनौती है। 

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