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राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा: विपक्ष के तंज पर भाजपा सांसद का पलटवार, कहा- चरखा भी एक प्रतीक ही था

संजीवनी टुडे 17-09-2020 16:30:00

कोविड-19 महामारी से जूझ रही दुनिया के बीच गुरुवार को राज्यसभा में कोरोना को लेकर चर्चा हुई।


नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी से जूझ रही दुनिया के बीच गुरुवार को राज्यसभा में कोरोना को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान आम आदमी पार्टी (आप) और शिवसेना के सांसदों ने सरकार की योजनाओं और नीतियों पर सवाल खड़ा किया और पूछा कि कोरोना को मात देने में ताली-थाली बजाना और पापड़ खाना कैसे प्रभावी है। इस पर सरकार की ओर से सुधांशु त्रिवेदी ने स्वाधीनता संग्राम का उदाहरण देते हुए कहा कि चरखा भी एक प्रतीक ही था।

राज्‍यसभा में गुरुवार को कोरोना संकट पर हुई चर्चा में विपक्षी सांसदों ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि महामारी से निपटने की ठीक व्‍यवस्‍था नहीं की गई। विपक्षी सांसदों ने भाजपा नेताओं की ओर से कोरोना से बचने के बताए गए विभिन्न 'उपायों' पर भी तंज कसा। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में काफी लोग कोरोना से प्रभावित हुए और अब ठीक होने वाले की संख्या भी बहुत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के प्रयासों की सराहना भी की है। उन्होंने कहा कि वह इन तथ्यों को इस लिए रख रहे हैं ताकि सभी को स्पष्ट हो कि महाराष्ट्र सरकार ने क्या किया। क्यों कि कुछ लोग महाराष्ट्र की महाअघाड़ी सरकार के कार्यों की आलोचना करने में लगे थे। इस दौरान संजय राउत ने ‘भाभी जी पापड़’ पर तंज कसते हुए कहा कि क्या सबको लगता है कि महाराष्ट्र में इतने सारे लोग पापड़ खाकर कोरोना से ठीक हुए। ऐसा सिर्फ भाजपा नेता ही दावा कर सकते हैं।

वहीं, आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि सदन में कल से कोरोना पर चर्चा हो रही है लेकिन सत्ता पक्ष के लोग सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। सत्ता पक्ष के लोग कह रहे हैं कि विपक्ष ने ताली-थाली बजाने में सरकार का सहयोग नहीं किया। अगर सरकार बता दें कि किसी शोध के आधार पर वह ताली-थाली को बेहतर उपाय बता रहे हैं तो मैं भी प्रधानमंत्री जी के साथ ताली-थाली बजाने को तैयार हूं।

संजय सिंह की बातों के जवाब देते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जो लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या ताली-थाली बजाने से कोरोना खत्म हो जाएगा। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या चरखा चलाने से आजादी मिली थी? क्या सामाजिक मनोविज्ञान और राजनीतिक मनोविज्ञान हम नहीं समझते? मैं पूरे सम्मान के साथ कह रहा हूं कि क्या लोग इतिहास भूल गए? क्या चरखा चलाने से अंग्रेज भाग जाने वाले थे? चरखा एक प्रतीक था जिसे गांधी जी ने चुना। जैसे गांधी जी ने अंग्रेजों को भगाने के लिए चरखे को एक प्रतीक बनाया था। वैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने दीये को सामाजिक चेतना का एक प्रतीक बनाया। इसी प्रकार ताली-थाली बजाना भी प्रतीक था, जिसके जरिए कोरोना से जंग में जुटे लोगों का मनोबल बढ़ाया गया।

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