संजीवनी टुडे

मोदी सरकार और योगी सरकार में मतभेद! जानिए क्यों

संजीवनी टुडे 12-07-2019 12:25:08

यूपी सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि ‘यह मामला अभी विचाराधीन है। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिया गया फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश के अनुसार ही है। यदि उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को पढ़ेंगे तो यह खासतौर पर कहता है कि सभी जातियों को जाति प्रमाण पत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ही दिए जाएंगे। अब कोर्ट आगामी 12 जुलाई को इस मुद्दे पर सुनवाई करेगा।’


नई दिल्ली। मोदी सरकार और योगी सरकार के बीच एक मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। दरहसल, योगी आदित्यनाथ ने एक निर्णय लिया था। प्रदेश सरकार ने एक आदेश जारी किया और उत्तर प्रदेश की 17 पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल कर दिया। लेकिन 1 जुलाई को राज्यसभा में बोलते हुए केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि वह यूपी सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है, क्योंकि ये कानूनी रूप से उचित नहीं है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक है क्योंकि यह संसद का विशेषाधिकार है और यह किसी भी विधि न्यायालय में मान्य नहीं है। हम योगी सरकार से इस फैसले को वापस लेने का अनुरोध करेंगे। हालांकि योगी सरकार अभी भी अपने स्टैंड से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

इकॉनोमिक टाइम्स की एक खबर के अनुसार, यूपी सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि ‘यह मामला अभी विचाराधीन है। समाज कल्याण विभाग द्वारा दिया गया फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश के अनुसार ही है। यदि उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को पढ़ेंगे तो यह खासतौर पर कहता है कि सभी जातियों को जाति प्रमाण पत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ही दिए जाएंगे। अब कोर्ट आगामी 12 जुलाई को इस मुद्दे पर सुनवाई करेगा।’

उत्तर प्रदेश सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी किसी को भी जाति प्रमाण पत्र नहीं दिए गए हैं। वहीं सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि ‘यह बेहद ही संवेदनशील मुद्दा है और हम अदालत के आदेश की स्टडी कर रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि राज्य सरकार ने ऐसे आदेश क्यों जारी किए?’

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गौरतलब है कि बीती 24 जून को उत्तर प्रदेश के सामाजिक कल्याण विभाग ने जिलाधिकारियों और डिविजनल कमिश्नर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 29 मार्च, 2017 के फैसले के तहत जाति प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए थे। निर्देशों के अनुसार, जिन जातियों को जाति प्रमाण पत्र दिए जाने थे, उनमें कश्यप, राजभर, धीवर, बिंद, कुम्हार, केहर, केवट, निषाद, भार, मल्ला, प्रजापति, धीमर, बाथम, तुरहा, गोदिया मांझी और मछुआ जैसी जातियां शामिल हैं।

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