संजीवनी टुडे

कश्मीर में संवाद, अभिव्यक्ति की आजादी बहाल हो’

इनपुट-यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 16-08-2019 15:23:09

कानून एवं व्यवस्था की स्थिति सुधारने के साथ साथ संवाद तथा अभिव्यक्ति की आजादी बहाल करने की मांग की है।


नई दिल्ली। देश के जाने-माने बुद्धिजीवियों ने जम्मू-कश्मीर पर बंदूक और फौज के सहारे शासन किये जाने का केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए वहां कानून एवं व्यवस्था की स्थिति सुधारने के साथ साथ संवाद तथा अभिव्यक्ति की आजादी बहाल करने की मांग की है। गांधी शांति प्रतिष्ठान की ओर से आज यहाँ जारी विज्ञप्ति में करीब 25 से अधिक गांधीवादी बुद्धिजीवियों ने एक संयुक्त बयान में यह मांग की है। इसमें प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत, गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष रामचन्द्र राही, सर्वेंट सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के सत्यपाल ग्रोवर, प्रख्यात समाजशास्त्री आशीष नंदी, डॉ आनंद कुमार अशोक वाजपेयी, पुरुषोत्तम अग्रवाल, अलका सरावगी, शबनम आज़मी और पुण्य प्रसून वाजपेयी समेत कई लेखक, पत्रकार और सामजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।

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भारत संघ के 28 राज्य थे अब 27 ही बचे हैं, आपातकाल के दौरान भी लोकतंत्र का ऐसा अपमान नहीं हुआ था और न ही तब के विपक्ष ने ऐसा होने दिया था लेकिन आज बहुमत के नाम पर यह सब किया गया। इन बुद्धिजीवियों का कहना है कि दुनिया में शायद ही ऐसा उदाहरण मिलेगा कि एक राज्य समझौता पत्र पर दस्तखत करके सशर्त शामिल हुआ हो। कश्मीर ऐसे ही हमारे पास आया था और हमने उसे स्वीकार किया अनुच्छेद 370 इसी संधि की व्यावहारिकता का नाम था।

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हम चाहते तो कश्मीर के लिए दरवाजे बंद कर सकते थे लेकिन हमने वह नहीं किया बयान में कहा गया है कि अब यह कहा जा रहा है कि तीन परिवार की लूट को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया लेकिन कल तक इन्ही परिवारों के साथ कांग्रेस और भाजपा की सरकारें चलती रही तो क्या यह मन जाये कि इस लूट में आपका भी हिस्सा था। क्या पूरे देश में बिना राजनीतिक लूट के कोई परियोजना चल रही है? इन बुद्धिजीवियों का कहना है कि हम कश्मीर को इस तरह लम्बे समय तक बंद नहीं रहने देंगे।

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