संजीवनी टुडे

यौन उत्पीड़न मामलों में जल्द न्याय दिलाने की मांग

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 09-08-2019 16:29:58

यौन हिंसा से पीड़ित देश की 12 हजार महिलाओं और उनके परिजनों ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगाेई को पत्र लिखकर बच्चों के यौन शोषण एवं बलात्कार तथा देह व्यापार के मामले में बढ़ोतरी पर चिंता जतायी है


नई दिल्ली। यौन हिंसा से पीड़ित देश की 12 हजार महिलाओं और उनके परिजनों ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगाेई को पत्र लिखकर बच्चों के यौन शोषण एवं बलात्कार तथा देह व्यापार के मामले में बढ़ोतरी पर चिंता जतायी है और अदालत से इन मामलों की सुनवाई में हो रहे विलंब को रोकने तथा शीघ्र न्याय दिलाने की मांग की है।

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राष्ट्रीय गरिमा अभियान के नेतृत्व में इन पीड़ित महिलाओं ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई को आज पत्र लिखकर यह मांग की है। अभियान के सह संयोजक आसिफ शेख ने शुक्रवार को यहां पत्रकारों को बताया कि इस वर्ष जनवरी से जून माह के बीच देश में यौन हिंसा के 24212 मामले दर्ज किए गए लेकिन सिर्फ 911 मामलों में ही सुनवाई पूरी हो पायी है। 

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शेख ने कहा कि 200 मामले ऐसे पाये गये हैं जिनमें दोषियों को सजा दिलाने के बाद भी पीड़िताओं को राहत राशि प्राप्त नहीं हुई हैं जबकि ये पीड़िताएं सात लाख रुपये की हकदार हैं। 

उन्होंने साथ ही कहा कि पीड़ित महिलाओं ने टू फिंगर टेस्ट को भी पूरी तरह से रोकने की मांग की है और यह भी कहा है कि बच्चों के देह व्यापार को ‘सीरियल रेप’ माना जाए और अपराधियों को उसके आधार पर सजा दी जाए।

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पीड़ित महिलाओं का नेतृत्व कर रही भंवरी देवी और गीता देवी के अनुसार यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं और बच्चों को अपने परिवार तथा समुदाय में भयावह स्थिति का सामना करना पड़ता है। उनके लिए काउंसिलिंग की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन महीने के भीतर अनुभवी काउंसलर नियुक्त किया जाए। 

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