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रक्षा सचिव ने ​रोहतांग टनल का दौरा ​करके देखीं तैयारियां, तीन अक्टूबर को सुरंग का उद्घाटन करेंगे PM मोदी

संजीवनी टुडे 25-09-2020 22:51:42

रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार ने शुक्रवार को अटल सुरंग का दौरा करके तैयारियां देखीं। उनके साथ सीमा सड़क के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह भी थे।


​नई दिल्ली​​।​ ​रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार ने शुक्रवार को अटल सुरंग का दौरा करके तैयारियां देखीं। उनके साथ सीमा सड़क के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह भी थे। सुरंग के लगभग सभी कार्य पूरे हो चुके हैं, यह उद्घाटन के लिए तैयार है। तीन अक्टूबर को सुरंग का उद्घाटन करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मनाली यात्रा संभावित है। हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के करीब लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर यह 9 किलोमीटर लंबी रणनीतिक अटल सुरंग बनाई गई है।  

अटल सुरंग परियोजना के मुख्य अभियंता केपी पुरुषोत्तमन ने सुरंग के सभी पहलुओं और उद्घाटन के लिए की जा रही व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। रक्षा सचिव ने कार्यों का निरीक्षण करने के दौरान चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरिंग चमत्कार को पूरा करने के लिए सीमा सड़क संगठन को बधाई दी। उन्होंने इस परियोजना के भविष्य में सुधार के लिए अपने सुझाव भी दिए। उन्होंने उद्घाटन की तैयारी का जायजा लेने के लिए कुल्लू, मनाली और लाहौल के स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से भी बातचीत की।

हिमाचल प्रदेश के पीर पंजाल पर्वतमाला में अटल सुरंग का निर्माण किया गया है क्योंकि मनाली-सरचू-लेह मार्ग नवम्बर और मई के बीच बर्फबारी की वजह से हर साल छह महीनों के लिए बंद रहता है। यह सुरंग मनाली-सरचू-लेह सड़क की दूरी 46 किमी. कम करने के अलावा पूरे साल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा यह सुरंग सुरक्षा बलों को एक प्रमुख रणनीतिक लाभ प्रदान करेगी।इस सुरंग को अत्याधुनिक ढंग से बनाया गया है और लाइटिंग, वेंटिलेशन और इंटेलिजेंट ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम जैसी सुविधाएं दी गई हैं। 

इस सुरंग का निर्माण 28 जून, 2010 में शुरू हुआ था, जिसे 2019 तक पूरा करना था लेकिन कोविड-19 महामारी की वजह से श्रमिक और सामग्री उपलब्ध न हो पाने के कारण परियोजना को पूरी करने में थोड़ी देरी हुई है लेकिन अब यह उद्घाटन के लिए तैयार है। इसे बनाने में लगभग 3,000 संविदा कर्मचारियों और 650 नियमित कर्मचारियों ने 24 घंटे कई पारियों में काम किया। इस टनल को बनाने के दौरान 8 लाख क्यूबिक मीटर पत्थर और मिट्टी निकाली गई। गर्मियों में यहां पर पांच मीटर प्रति दिन खुदाई होती थी लेकिन सर्दियों में यह घटकर आधा मीटर हो जाती थी क्योंकि सर्दियों में यहां का तापमान माइनस 30 डिग्री तक चले जाने पर काम करना बेहद मुश्किल हो जाता था।

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