संजीवनी टुडे

समर्पित नक्सली और जवान नक्सलियों के झांसे में नहीं आएं - शलभ सिंहा

संजीवनी टुडे 03-07-2019 21:48:49

समर्पित नक्सली और जवान नक्सलियों के झांसे में नहीं आएं


जगदलपुर। जिला सुकमा में नक्सलियों के लगातार घटते जनाधार, संगठन सदस्यों के समर्पण व पुलिस की बड़ी कार्यवाही से बदली हुयी रणनीति के तहत नक्सली पुलिस जवानों, आत्मसमर्पित नक्सलियों को वापस गांव आकर स्वतंत्र जीवनयापन करने का झूठा वादा करने का नया तरीका अपनाकर ढोंग रचा रहे हैं। 

सुकमा एसपी शलभ सिंहा ने बुधवार जारी एक बयान में कहा कि  दिनांक 25 जून को नक्सलियों की कोंटा एरिया कमेटी के सचिव मंगड़ू द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ग्राम बेलपोच्चा थाना कोंटा के माड़वी सोमड़ा, जिसने नक्सलियों की खोखली विचारधारा से तंग आकर शासन की पुर्नवास नीति से प्रभावित होकर पिछले वर्ष 17 दिसंबर को  पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था, के बारे में अपनी प्रेस विज्ञप्ति में आत्मसमर्पण पश्चात सोमड़ा द्वारा ''गुलामी की जिदंगी छोड़कर अपने परिवार के साथ जीने की इच्छा से अपने घर वापस आया। 

जिसे जनअदालत में नक्सलियों द्वारा जिंदगी जीने मौका दिया जाना बताते हुए अन्य आत्मसमर्पित नक्सली व पुलिस जवानों को नौकरी छोड़कर वापस गांव आने पर मौका दिये जाने संबंधी अपनी संगठन का गुनगान किया गया है, जो कि सवर्था गलत है। नक्सलियों की खोखले दावे की पोल उस समय खुली, जब आत्मसमर्पित नक्सली सोमड़ा आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्वयं उपस्थित हुआ। सोमड़ा द्वारा नक्सलियों के घृणित कृत्य के बारे में बताया गया कि आत्मसमर्पण पश्चात वह अपनी इच्छा से नक्सली उन्मूलन की दिशा में योगदान देने के उद्देश्य  से पुलिस बल के साथ कोंटा में रहकर सहयोग कर रहा था। उसके पश्चात शारीरिक कमजोरी के कारण पुन: इच्छा जताकर आ0प्र0 में अपने परिचितों के पास रहकर जीवनयापन कर रहा था। 

नक्सलियों द्वारा गांव में रह रहे व खेती-बाड़ी कर सामान्य जीवन जी रहे सोमड़ा के पूरे परिवार को लगातार परेशान कर जान से मारने की घमकी देकर तथा वापस बुलाने पर कुछ नहीं करने का झूठा झांसा देकर सोमड़ा को बुलाने दवाब बनाया जा रहा था। इसी दवाब के कारण परिवार वाले आ0प्र0 जाकर सोमड़ा से मिलकर नक्सलियों द्वारा वापस आने पर कुछ नहीं करने का झूठे आश्वासन के बारे में बताकर सोमड़ा को वापस गांव लेकर आये थे। किंतु  18 जून को दिन के समय कोंटा एरिया कमेटी के सचिव मंगडू, वेट्टी कन्नी, मिलिशिया कमांडर कवासी हूंगा, दिरदो देवा, हूंगी सहित अन्य नक्सली अचानक सोमड़ा के घर आये और सोमड़ा के पूरे परिवार को घर से जबरन निकालने लगे।परिवार वालों द्वारा नक्सलियों से गिड़गिड़ाकर बोला गया कि सोमड़ा को तुम लोग कुछ नहीं करेंगे, कहकर बुलाये थे ,फिर क्यों ले जा रहे हो। 

किंतु नक्सली परिवार की नहीं सुने और घसीटते हुये गांव के बाहर ले गये। जहां नक्सली पहले से गांव वालों को एकत्रित कर रखे थे। तत्पश्चात पूरे गांव के सामने सोमड़ा की पत्नि, पुत्री व सोमड़ा को लाठी-डण्डे से बेरहमी से पिटाई की गयी व गांव से बाहर न जाने अन्यथा जान से मारने की घमकी देकर गांव में नजरबंद कर संत्री तैनात कर रखे थे। तब से पूरा परिवार दहशत में जीवन जी रहे थे। इधर दिनांक 25.जून को नक्सली कोंटा एरिया कमेटी सचिव द्वारा सोमड़ा द्वारा माफी  मांगने व नक्सली संगठन द्वारा माफ  करने का जवानों, जनता व आत्मसमर्पित नक्सलियों को भ्रमित करने झूठा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिया गया। 

इसी प्रकार का कुत्सित दुष्प्रचार नक्सलियों द्वारा ग्राम चिंतागुफ के कवासी सिंगा के बारे में अपने प्रेस में लिखा गया है।जबकि विश्वस्त सूत्रों से पता चला हैं कवासी सिंगा अपनी बहन से मिलने गांव के एक लड़के के साथ कसालपाड़ गया था। जहां से नक्सली जबरन सिंगा को पकड़कर अपने साथ लगभग 02 सप्ताह रखकर बुरी तरह से डण्डा व चाकू की नोक सिर में लगाकर प्रताडि़त किये हैं। आत्मसमर्पित सोमड़ा दिनांक 30जून को रात्रि किसी तरफ नक्सली द्वारा किये जा रहे नजरबंदी से बचते हुये कोंटा पहुंचा और  03जुलाई को पुलिस कार्यालय आकर पुलिस अधीक्षक सुकमा को पूरी आपबीती सुनायी, कि किस तरह नक्सली झांसा देते है। पुलिस अधीक्षक सुकमा द्वारा बताया गया कि कवासी सोमड़ा व उसके परिवार पर नक्सली अत्याचार सभी के लिए एक सबक हैं। उन्होंने पुलिस जवान, आम जनता, व आत्मसमर्पित सदस्यों से अपील की है कि नक्सलियों के झांसे में न आयें व शासन-प्रशासन का सहयोग करें।

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