संजीवनी टुडे

नोएडा में धूल फांक रही हैं भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के जीवन से जुड़ी निशानियां

संजीवनी टुडे 15-07-2019 15:42:28

नोएडा सेक्टर-145 में नोएडा वाहनों के शोर से दूर शांत खेतों के बीच बसा एक गांव है नलगढ़ा। कहा जाता है


नोएडा। नोएडा सेक्टर-145 में नोएडा वाहनों के शोर से दूर शांत खेतों के बीच बसा एक गांव है नलगढ़ा। कहा जाता है कि इस गांव में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस एवं उनके कर्नल करनैल सिंह ने जिंदगी का काफी वक्त यहां छुप कर बिताए थे। गांव में रहे वाले लोगों की मानें तो आठ अप्रैल, 1929 को ब्रिटिश हुकूमत को अपनी आवाज़ सुनाने के लिए भगत सिंह ने अपने साथी बटुकेश्वर दत्त के साथ जो बम विस्फोट किया था, वो इसी गांव में बनाया गया था। भगत सिंह ने यहीं पर बम बनाने का प्रशिक्षण भी लिया था। 

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आज़ाद हिंद फौज के कर्नल करनैल सिंह की बहू मनजीत कौर ने बताया कि नलगढ़ा गांव पहले जंगलों से घिरा हुआ और अंग्रेजों की पहुँच से दूर था, जिस कारण यह गांव आज़ादी के दीवानों के लिए सुरक्षित पनाहगार था। उन्होंने कहा कि मेरे ससुर एवं अन्य रिश्तेदार शहीद भगत सिंह एवं नेताजी की कहानियां सुनाया करते थे। वो बताते थे कि भगत सिंह असेम्बली में बम फेंकने से पहले और उसके बाद यहीं आ कर छुपे थे। नलगढ़ा गांव के गुरुद्वारा में एक बड़ा पत्थर रखा हुआ है, जिसमें दो छेद है। मनजीत बताती है कि भगत सिंह उस पत्थर पर ही बम बनाते थे। उस पत्थर में मौजूद छेद में विस्फोटक को मिलाते थे, जिस से बम तैयार होता था। मनजीत कौर कहती है कि प्रत्येक छह माह पर कोई न कोई अखबार और टीवी वाला आ जाता है। 

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हमसे बहुत कुछ पूछ कर जाता है, लेकिन आज़तक हमारे गांव के लिए किसी ने कुछ नहीं किया। हमने बस इतनी मांग की थी कि इस गांव में एक पार्क है, उसका नाम भगत सिंह और उनके साथियों के नाम पर कर दे और गांव के समीप जो मेट्रो स्टेशन है, उसका नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर कर दे लेकिन कोई सुनता ही नहीं। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह एवं करनैल सिंह की बहुत सारी फ़ोटो दिखाते हुए कहा कि मेरे पास उन सबकी बहुत सी फ़ोटो एवं निशानियां मौजूद थीं लेकिन कुछ तो लोग चुरा कर ले गए, इसलिए अब मैं सबको ये नहीं दिखाती।

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