संजीवनी टुडे

कोरोना आपदा: मुश्लिम बाहुल्य क्षेत्र में गरीबों व असहाय की मदद में जुटी 'सुंदरकांड कमेटी'

संजीवनी टुडे 11-05-2020 09:32:42

कोरोना की विपदा में इसी भाव से सीतापुर नगर के मुश्लिम बाहुल्य आबादी के बीच सेवा कार्य करने में जुटी है सुन्दर काण्ड कमेटी।


सीतापुर। कहते हैं कि आपदा जाति-धर्म या पंथ देखकर नहीं आती और संकट के समय गरीबों के मददगारों का भी यही भाव देखा जा सकता है। आपत्ति में जब समाजसेवा का जज्बा लेकर लोग मदद के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाते हैं, तो मदद लेने वाले लोग भी ये नहीं देखते कि हाथ किसी हिन्दू या मुसलमान का है। 

कोरोना की विपदा में इसी भाव से सीतापुर नगर के मुश्लिम बाहुल्य आबादी के बीच सेवा कार्य करने में जुटी है 'सुन्दर काण्ड कमेटी'। हो सकता है कि आपको पढ़कर कुछ अचरज लगे, लेकिन इस कमेटी से जुड़े लोगों के सेवा कार्य, उनकी लगन, मेहनत को देखकर आपको महसूस होगा कि आपदा के समय कुछ लोगों के साथ मिलकर आप बड़ी से बड़ी खाईं मिटा सकते हैं। और दृढ़ इच्छाशक्ति लेकर किसी भी भूखे को निवाला उपलब्ध करा अपने मन को सन्तोष देकर गरीबों के लिए देवदूत भी बन सकतें हैं। 

'जथा नामे तथा गुणे' को साकार कर नगर क्षेत्र में चौबे टोला और चौधरी टोला नाम के एक छोटे से मोहल्ले में मुश्लिम आबादी के बीच 'सुन्दर काण्ड कमेटी' के सदस्य 'हनुमान' बनकर लाकडाउन से प्रभावित गरीबों असहायों की मदद में जुटे हुए हैं। प्रतिदिन 50 परिवार को इस कमेटी के सभी सदस्य राहत की एक-एक किट प्रदान कर रहें हैं। लोगों के घरों में निशुल्क सुंदरकांड का पाठ आयोजन से आए हुए चढ़ावे के पैसे से यह कमेटी आपत्ति काल में लोगों की मदद कर खूब वाहवाही लूट रही है।

जानिए क्या है सुन्दर कांड कमेटी 
सीतापुर में धार्मिक,अनुष्ठान आदि में रुचि रखने वालों की जुबान पर इस कमेटी की चर्चा खूब हुआ करती है। 15 सदस्यीय यह सुन्दरकांड कमेटी लोगों के आग्रह पर उनके घरों,मंदिरों या फिर बताए हुए स्थलों पर मंगलवार और शनिवार को सुन्दरकांड का संगीतमय पाठ करने का निःशुल्क आयोजन करती रहती है। कमेटी को आमंत्रण मिलने पर अपना सारा काम-धंधा छोड़कर सभी सदस्य घरों पर सुंदरकांड का पाठ करने जाते हैं। 

 इनकी विशेषता यह है कि इस पाठ को करवाने के लिए कोई भी शुल्क या दक्षिणा नहीं लेते। चढ़ावे में जो धन एकत्र होता है। उसका यह लोग पहले एक मंदिर में सेवा कार्य में लगाते थे। लेकिन वर्तमान में कोरोना आपदा को ध्यान में रखते हुए सुंदरकांड के पाठ से आए हुए धन का उपयोग गरीबों को आटा-दाल-चावल, शक्कर तेल, पूड़ी सब्जी, बांटने में करने लगे हुए हैं। इसके सभी सदस्य ढोल, मजीरा हारमोनियम,स्वयं लेकर जाते हैं। अब यह कमेटी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है कि लोगों को अपने यहां सुंदरकांड पाठ का आयोजन कराने के लिए लगभग 1 या 2 माह पूर्व ही बताना पड़ता है। 

आरती में एकत्र धन से बंट रही है राहत सामग्री
 यह कमेटी घरों में आने-जाने या पाठ का आयोजन कराने के लिए कोई भी रुपया नहीं लेती, परंतु पाठ के समापन के बाद होने वाली आरती में लोग कुछ ना कुछ राशि चढ़ा देते हैं। उसी एकत्र राशि से यह कमेटी मोहल्ला कजियारा, मन्नी चौराहा, चौधरी टोला, जोगी टोला, चौबे टोला,आदि मुस्लिम बहुल इलाके में गरीबों को खिचड़ी, पूड़ी सब्जी व राहत किट बांट रही है। 

लाकडाउन की घोषणा होने के बाद मंगलवार के दिन से इस कमेटी ने 121 राहत किटें बांटने की शुरुआत की थी, फिर शनिवार को 111 और अब वर्तमान में 51 राशन किट प्रतिदिन बांटने का कार्य इस कमेटी के सदस्यों के सहयोग से हो रहा है। कमेटी के सदस्य जितेंद्र मेहरोत्रा 'जित्तू', प्रदीप कटियार, सोमेश पटवा, अजय सक्सेना ने 'हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी' से बताया कि कमेटी शहर के नागरिकों के आमंत्रण पर घरों में सुंदरकांड पाठ करने जाती थी,परंतु लाक डाउन के कारण अभी यह कार्य बंद है। 

  इन सदस्यों ने बताया कि हम कोई शुल्क नहीं लेते हैं परंतु फिर भी कुछ लोग आरती पूजन के समय चढ़ावा चढ़ा देते थे। बस उस चढ़ावे का उपयोग हम सभी अपने लाकडाउन से प्रभावित क्षेत्र में गरीबों की मदद करने में कर रहे हैं। बताया कि हमारे क्षेत्र में मुस्लिम आबादी अधिक है। हम लोग कोई भेदभाव ना करके जरूरत मंद को सूचीबद्ध करते हुए हिंदू हो या मुसलमान सभी को राहत के पैकेट या पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने में लगे हुए हैं। कमेटी के ही एक सदस्य के घर में इन सभी ने एक भंडार गृह खोल रखा है, जहां पर लोग राहत किट के पैकेट बनाने का कार्य करते रहते हैं। कमेटी के अन्य सदस्य विनोद पटवा, राकेश सेठ, अश्वनी वैश्य, कैलाश, गणेश, उमेश, पंकज, चंदन, अजय सक्सेना, पवन कश्यप, लगातार अपनी सेवा देने में जुटे हुए हैं।

इस तरह पड़ी सुंदरकांड कमेटी की नींव 
बताते हैं कि आज से लगभग 5 वर्ष पूर्व चौबे टोला मोहल्ले में एक छोटे से मंदिर में 4/5 लोगों द्वारा शनिवार को शाम के समय सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया जाता था। बाद में धीरे-धीरे लोग इस मंदिर से जुड़ते गए। संख्या बढ़ी तो सप्ताह में 2 दिन (मंगलवार) पाठ किया जाने लगा। फिर सभी ने मंदिर पर साउंड, व माइक लगवाकर ढोलक, झनकार, मंजीरा, हारमोनियम की व्यवस्था कर ली। और तभी से सुंदरकांड कमेटी कहा जाने लगा।

 इस कमेटी ने आज विस्तृत रूप लेकर नगर में सुंदरकांड का संगीतमय पाठ करने में अपनी अच्छी पहचान बना ली है। धार्मिक आयोजनों से अपनी पहले ही पहचान बना चुकी यह कमेटी आज कोरोना आपदा के समय लाकडाउन से प्रभावित लोगों की मदद करने में पूरी तन्मयता के साथ जुटकर लोगों की वाहवाही लूट रही है।

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