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कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस शासित राज्यों ने कसी कमर, संशोधन विधेयक लाने की प्रक्रिया तेज

संजीवनी टुडे 22-10-2020 13:49:52

पंजाब के बाद राजस्थान-छत्तीसगढ़ में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की कोशिश


नई दिल्ली। केंद्र सरकार के लिए कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताते हुए कांग्रेस पार्टी इसके खिलाफ विधेयक लाने की योजना शुरू कर दी है। इस क्रम में पंजाब सरकार द्वारा विधानसभा में संशोधन विधेयक पारित किए जाने के बाद अब अन्य कांग्रेस शासित राज्य भी इस दिशा में तेजी दिखा रहे हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की कोशिश चल रही है।

दरअसल, पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की सलाह पर काम करते हुए कांग्रेस शासित राज्य कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर विधेयक पेश करने की राह पर हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के नेतृत्व ने राज्य सरकारों को 'मॉडल बिल' का मसौदा भेजा गया था, जिसके बाद इसे विधानसभा में विशेष सत्र बुलाकर पारित कराने की प्रक्रिया चल रही है। अब जब पंजाब में यह संशोधन विधेयक पारित हो चुका है, इसलिए अन्य राज्यों के लिए कांग्रेस ने कमर कसनी शुरू कर दी है।

कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने कहा है कि कांग्रेस शासित राज्य कृषि कानूनों के खिलाफ विधेयक लाने को तैयार हैं। राजस्थान सरकार ने इसका ऐलान भी कर दिया है। राज्य सरकारों को यह अहसास हो गया है कि यह केंद्रीय कानून खेती को खत्म कर देगा और इसका असर पीडीएस प्रणाली पर भी पड़ेगा। ऐसे में संघीय व्यवस्था को ध्वस्त करने वाले इस कानून के खिलाफ संशोधन विधेयक एक प्रभावी और आवश्यक कदम है।

हालांकि राज्यों की तरफ से कृषि कानून के खिलाफ विधेयक लाने भर से समस्या का समाधान नहीं होगा, क्योंकि असली दिक्कत इसकी मंजूरी को लेकर आएगी। राज्य के विधेयकों को कानून बनने से पहले राज्यपाल और राष्ट्रपति की मंजूरी की आवश्यकता होती है। राज्यपाल मंजूरी को रोक भी सकते हैं और ऐसे ही अधिकार राष्ट्रपति के पास भी होते हैं। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पहले ही कहा है कि अगर मंज़ूरी नहीं मिलती है तो वो अदालत जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों को खेती बर्बाद करने वाला तथा किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला बताते हुए कांग्रेस ने सड़क से संसद तक प्रदर्शन किया। अब वह राज्य सरकारों की मदद से इस कानून के खिलाफ विधेयक निकलवा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उनके इस मसौदा विधेयक के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि किसी भी किसान को उसकी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम न मिले। इस विधेयक का नाम "किसान अधिकार और विशेष सुरक्षा प्रावधान विधेयक 2020" दिया गया है।

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