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कांग्रेस ने नागरिकता बिल पर शिवसेना को घेरा, कहा- अप्रत्यक्ष रूप से BJP का समर्थन किया हैं

संजीवनी टुडे 10-12-2019 22:20:51

अमित साह द्वारा पेश किये गए नागरिकता बिल का विरोध जारी हैं। कई पार्टियों सहित पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भी इस पर ऐतराज जताया हैं। शिव सेना भी इससे सहमत नहीं है। असम में भी कई जगह इसका


नई दिल्ली। अमित साह द्वारा पेश किये गए नागरिकता बिल का विरोध जारी हैं। कई पार्टियों सहित पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भी इस पर ऐतराज जताया हैं। शिव सेना भी इससे सहमत नहीं है। असम में भी कई जगह इसका विरोध हुआ हैं। वही अब कांग्रेस ने शिवसेना पर हमला बोला हैं। कांग्रेस नेता मोहम्मद आरिफ नसीम खान ने यहां जारी एक बयान में कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस ने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को सरकार बनाने के लिए समर्थन दिया है, शिवसेना ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से नाता तोड़ लिया है और न्यूनतम साझा कार्यकम के आधार पर महाराष्ट्र के विकास के लिए भाजपा को सत्ता से दूर रखा गया है। 

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उन्होंने कहा कि जिस तरह से शिवसेना ने महाराष्ट्र में अपने गठबंधन के साथियों को विश्वास में लिए बिना नागरिक (संशोधन) विधेयक का समर्थन किया, वह अनुचित है। उन्होंने कहा कि शिवसेना को इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और इससे पता चलता है कि शिवसेना ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम का अनुसरण नहीं किया है और अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा का समर्थन किया है। गौरतलब हैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया। जोरदार हंगामे के बीच सोमवार को जब बिल पेश हुआ तो विपक्ष की ओर से इस पर मतदान की मांग की गई है। 

विपक्ष के एक सवाल पर अमित शाह ने कहा- हमें तीनों देशों (अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश) के संविधान को समझना होगा। तीनों देश के संविधान के अंदर राज्य के धर्म का जिक्र है। तीनों राष्ट्रों के अंदर अल्पसंख्यकों के साथ धार्मिक प्रताड़ना हुई है। अमित शाह ने कहा कि यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं करता है और मैं इस सदन और देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह यह समानता के अधिकार का विरोधी नहीं है और इससे समानता का अधिकार आहत नहीं होगा। लेकिन तर्कसंगत वर्गीकरण के आधार पर कोई हमें कानून बनाने से नहीं रोक सकता है।

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उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1971 में बंगलादेश से आए लोगों को भारत में शरण दी थी और युगांडा से आए लोगों को भी कांग्रेस के शासनकाल में शरण दी गई थी। श्री राजीव गांधी ने असम समझौते में 1971 तक के लोगों काे ही स्वीकार किया था। शाह ने सदन को आश्वस्त किया कि इन देशों के मुसलमान भी कानून के आधार पर नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं और उनके आवेदनों पर भी प्रक्रिया के तहत विचार किया जायेगा। इस पर कोई रोक नहीं लगेगी। गृहमंत्री ने कहा कि वह विपक्षी सदस्यों के विधेयक की विषयवस्तु से जुड़े सभी सवालों का जवाब विधेयक पर चर्चा के दौरान विस्तारपूर्वक देंगे।

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