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कांग्रेस ने केंद्र के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बताया एक और जुमला

संजीवनी टुडे 05-06-2020 16:03:21

केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पार्टी ने इस बार उसके आत्मनिर्भर भारत अभियान पर हमला बोला है। पार्टी ने कहा है कि देश का धन उद्योग, उत्पादन, निर्यात या फिर टैक्स से नहीं जुड़ा है बल्कि यह बौद्धिक संपदा से जुड़ा है।


नई दिल्ली। केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस पार्टी ने इस बार उसके आत्मनिर्भर भारत अभियान पर हमला बोला है। पार्टी ने कहा है कि देश का धन उद्योग, उत्पादन, निर्यात या फिर टैक्स से नहीं जुड़ा है बल्कि यह बौद्धिक संपदा से जुड़ा है। यह बौद्धिक संपदा फैक्टरियों में नहीं, विश्वविद्यालय में पैदा होती है। इसलिए जरूरी है कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विश्वविद्यालयों में शोध पर पैसा लगाया जाए। विश्वविद्यालयों में शोध (रिसर्च एवं डेवलपमेंट) की सुविधा को बढ़ाना आवश्यक है, इसके बिना 'आत्मनिर्भर' शब्द इस सरकार का एक और जुमला भर है।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा सिर्फ आत्मनिर्भर बनने का ऐलान कर देने से पूंजी का निर्माण नहीं होगा। सरकार देश को बताए कि बिना आर्थिक, औद्योगिक और विनिर्माण नीति के कैसे आत्मनिर्भर होंगे? सिर्फ नारों से आत्मनिर्भरता पैदा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि दुनियाभर के विश्वविद्यालयों में इनोवेशन का काम हो रहा है। अगर देश को आत्मनिर्भर बनाना है, तो विश्वविद्यालयों में शोध में पैसा लगाना पड़ेगा। देश में शोध पर जीडीपी का मात्र 0.7 फीसदी हिस्सा खर्च हो रहा है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार कई देश हमसे बहुत आगे हैं, ऐसे में सरकार का आत्मनिर्भरता की घोषणा एक और जुमला है।

सिब्बल ने कहा कि जहां भारत में शोध के नाम जीडीपी का 0.7 फीसदी खर्च होता है, वहीं इजरायल में 4.6 फीसदी, कोरिया में 4.5 फीसदी, जर्मनी में 3 फीसदी और फ्रांस में 2.2 फीसदी खर्च रिसर्च और डेवलपमेंट पर किया जाता है। हमें इसे और बढ़ाने की जरूरत है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने विश्व आर्थिंक मंच की एक रिपोर्ट के अनुसार हिंदुस्तान का स्थान 68वां है। ऐसे में आत्मनिर्भरता कहां आएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भी ये बात जानते हैं लेकिन कभी-कभी भूल जाते हैं। भारत की विनिर्माण क्षमता जीडीपी के 16-18 प्रतिशत है और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) लगभग 59 फीसदी है। उन्होंने कहा कि सरकार लोकल के लिए वोकल की बात करती है लेकिन किस लोकल के लिए। विश्व की बड़ी कंपनियों में सीईओ भारतीय मूल के हैं। हम उनके बारे में मुखर हो सकते हैं, लेकिन हमारे स्थानीय के बारे में क्या? सरकार ये मजदूरों के लिए कब वोकल होने की बात करेगी?

कांग्रेस नेता ने प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर कहा कि सरकार को लोगों का दर्द नहीं दिखता है। मेक इन इंडिया के तहत मोबाइल फोन का निर्माण यहां नहीं किया जाता है लेकिन असेंबल किया जाता है। सिर्फ 30 फीसदी काम किया जाता है। ऐसे में स्पष्ट है कि आत्मनिर्भर भारत के नाम पर सरकार के पास कोई नीति नहीं है, सिर्फ एक नारा है। एक नारे के दम पर यह सरकार लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में सक्षम नहीं है।

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