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Chandrayaan 2: 'लैंडर विक्रम' के साथ संपर्क स्थापित करने की उम्मीद टूटी, फिर भी आई ऐसी खुशखबरी

संजीवनी टुडे 21-09-2019 18:05:11

गौरतलब है कि 7 सितंबर को आधी रात को 1:50 बजे के करीब विक्रम लैंडर का चांद के साउथ पोल पर पहुंचने से पहले संपर्क टूट गया था।


नई दिल्ली। भारत के चंद्रयान-2 मिशन को लेकर इसरो ने अपना अपडेट जारी किया है। इसरो ने कहा है कि वैज्ञानिक लैंडर विक्रम के साथ संचार स्थापित करने में सक्षम नहीं हो सके हैं। 

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हालांकि, एक अच्छी खबर भी आई है। इसरो प्रमुख के सिवन ने कहा है कि चंद्रयान-2 का आर्बिटर बहुत अच्छा काम कर रहा है। ऑर्बिटर में 8 इंस्ट्रूमेंट्स लगे होते हैं और हर इंस्ट्रूमेंट वही काम करता है जो उसे करना होता है। हमने सभी की जांच की है और सभी बेहतरीन तरीके से काम कर रहे हैं। हमारी अगली प्राथमिकता गगनयान मिशन है। 

गौरतलब है कि चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अंधेरा बढ़ने के साथ ही चंद्रयान-2 से संपर्क साधने की कोशिशों पर विराम लग गया है। वैज्ञानिक बताते हैं कि चांद पर छाने वाला अंधेरा इतना घना होता है कि वहां पर कोई भी चीज देखना नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में इसरो ही नहीं दुनिया की कोई भी स्पेस एजेंसी विक्रम लैंडर की तस्वीर नहीं ले सकेगी। चांद पर ये अंधेरा अगले 14 दिन तक बना रहेगा। ऐसे में अगले 14 दिन तक लैंडर विक्रम को बिना किसी सहारे के अकेले चांद पर रहना होगा। ऐसे में उसके सलामत रहने की उम्मीद न के बराबर हो जाएगी। 

बता दे कि , चांद के दक्षिणी ध्रुव में जिस जगह पर लैंडर विक्रम पड़ा है वहां अगले 14 दिन तक सूरज की रोशनी नहीं पहुंचेगी। ऐसे में चांद का तापमान घटकर माइनस 180 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाएगा। इस तापमान में लैंडर विक्रम को अपने आप को संभालना बेहद मुश्किल होगा। इतने कम तापमान में लैंडर विक्रम के कई इलेक्ट्रॉनिक हिस्से खराब हो जाएंगे। 

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सात सितंबर को विक्रम लैंडर से संपर्क टूट गया था
गौरतलब है कि 7 सितंबर को आधी रात को 1:50 बजे के करीब विक्रम लैंडर का चांद के साउथ पोल पर पहुंचने से पहले संपर्क टूट गया था। जब ये घटना हुई तब चांद पर सूरज की रोशनी पड़नी शुरू हुई थी। यहां आपको बता दें कि चांद पर एक दिन यानी सूरज की रोशनी वाला पूरा वक्त पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। ऐसे में 7 तारीख के बाद से 14 दिन बाद यानी 20-21 सितंबर को चांद पर काली रात हो जाएगी। 

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