संजीवनी टुडे

फेसबुक की याचिका पर केंद्र, गुगल, ट्विटर से जवाब तलब

इनपुट यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 20-08-2019 17:06:30

उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया प्रोफाइल को आधार से जोड़ने संबंधी याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित किये जाने संबंधी फेसबुक की याचिका पर केंद्र सरकार, गुगल, ट्विटर, यूट्यूब और अन्य से मंगलवार को जवाब तलब किया।


नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोशल मीडिया प्रोफाइल को आधार से जोड़ने संबंधी याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित किये जाने संबंधी फेसबुक की याचिका पर केंद्र सरकार, गुगल, ट्विटर, यूट्यूब और अन्य से मंगलवार को जवाब तलब किया। 

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सोशल साइट्स पर यूजर प्रोफाइल को आधार से जोड़ने के मामले में चार याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें दो मद्रास उच्च न्यायालय तथा एक-एक मध्य प्रदेश और बॉम्बे उच्च न्यायालयों में दायर की गयी हैं। फेसबुक ने इन सभी याचिकाओं को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित किये जाने का अनुरोध किया है। 

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने फेसबुक की याचिका की सुनवाई पर सहमति जताते हुए केंद्र सरकार, गुगल, ट्विटर, यूट्यूब और अन्य को नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने नोटिस जारी किये। 

मामले की अगली सुनवाई 13 सितम्बर को होगी। उधर व्हाट्सऐप की तरफ से कहा गया कि नीतिगत मामले उच्च न्यायालय कैसे तय कर सकता है। यह संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। फेसबुक की ओर से दलील दी गयी कि सभी मामलों को शीर्ष अदालत में स्थानांतरित किया जाये। 

पीठ ने यूजर प्रोफाइल को आधार से जोड़ने की सुनवाई मद्रास उच्च न्यायालय में जारी रखने की अनुमति तो दे दी, लेकिन अंतिम फैसले पर रोक लगा दी। 
फेसबुक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ये निजता का मामला है। श्री सिब्बल ने कहा कि इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय सुने और आदेश जारी करें, क्योंकि यह वैश्विक मामला है और ऐसा न हो कि एक उच्च न्यायालय कुछ आदेश पारित करे और दूसरा उच्च न्यायालय कुछ और।

श्री सिब्बल ने कहा कि केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके सोशल मीडिया के बारे में उसका पक्ष पूछा जाना चाहिए। इसपर एटर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले को लेकर मद्रास उच्च न्यायालय में 18 दिनों तक सुनवाई हुई है, वहां फेसबुक की तरफ से कहा गया था कि वह उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को मानता है। 

श्री वेणुगोपाल की दलील थी कि हर उस तरह के संदेश को अपराध की श्रेणी में डाला जाना चाहिए जिससे उकसावे का आभास हो।

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