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गौ-तस्करी मामले में CBI का 4 प्रदेशों के 15 ठिकानों पर छापे, BSF कमांडेंट और तीन अन्य को किया नामजद

संजीवनी टुडे 23-09-2020 21:18:11

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गौ तस्करी मामले में बुधवार को देश के चार राज्यों के 15 ठिकानों पर छापे मारे।


नयी दिल्ली। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गौ तस्करी मामले में बुधवार को देश के चार राज्यों के 15 ठिकानों पर छापे मारे। पश्चिम बंगाल के कोलकाता और मुर्शिदाबाद, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, पंजाब के अमृतसर और छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में सीबीआई ने तलाशी ली। साथ ही भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए गौ-तस्करी से जुड़े मामले में बीएसएफ की 36वीं बटालियन के एक पूर्व कमांडेंट तथा तीन अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ ने बुधवार को बताया कि गौ-तस्करी मामले में सीबीआई की अलग-अलग टीमें पश्चिम बंगाल के कोलकाता, सिलीगुड़ी और मुर्शिदाबाद, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, पंजाब के अमृतसर और छत्तीसगढ़ के रायपुर में कुल 15 ठिकानों पर तलाशी ले रही हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश से लगती सीमा की रक्षा का दायित्व सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पास है। सीबीआई ने गौ-तस्करी मामले में बीएसएफ की 36वीं बटालियन के तत्कालीन कमांडेंट सतीश कुमार और तीन अन्य व्यक्तियों- इनामुल हक, अनारुल शेख और मोहम्मद गुलाम मुस्तफा के खिलाफ मामला दर्ज किया है। कमांडेंट सतीश कुमार इस समय रायपुर में पदस्थ है। उनके कई ठिकानों पर छापेमारी की गई है।

उल्लेखनीय है कि इनामुल हक तृणमूल कांग्रेस का तथाकथित नेता है। सीबीआई ने उसे मार्च, 2018 में भी बीएसएफ कमांडेंट जीबू टी. मैथ्यू को 47 लाख की रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। अप्रैल, 2018 में सीबीआई ने इसी मामले की जांच में पाया कि इनामुल हक का भारत-बांग्लादेश सीमा के पार मवेशियों की तस्करी का बड़ा कारोबार फैला हुआ है। उसकी इस गौ-तस्करी में बीएसएफ और सीमा शुल्क के कई भ्रष्ट अधिकारी लिप्त हैं और सीमा पर इनके माध्यम से मवेशियों की तस्करी लगातार जारी है।

सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक बीएसएफ को बांग्लादेश के साथ सीमा की रक्षा करने का काम सौंपा जाता है। सतीश कुमार ने इसका फायदा उठाया। उनको दिसम्बर, 2015 और अप्रैल, 2017 के बीच मालदा जिले में 36 बीएसएफ बटालियन के कमांडेंट के रूप में तैनात किया गया था। उनके साथ चार कंपनियां मुर्शिदाबाद और दो सीमा पर मालदा में तैनात थीं। सतीश कुमार ने इस दौरान तस्करी की जाने वाली 20 हजार से अधिक गायों को जब्त किया लेकिन कभी किसी तस्कर या उनके वाहन को नहीं पकड़ा। यही नहीं, तस्करों और सीमा शुल्क व बीएसएफ के कुछ अधिकारियों के बीच तस्कर माफिया के संबंधों के चलते बरामद मवेशियों को वजन और आकार में छोटे रूप में दर्ज कर उन्हें आर्थिक लाभ दिया जाता रहा। गलत रिकार्ड दर्ज करने के पीछे का मकसद यह था कि जब्ती के तुरंत बाद नीलामी के दौरान इनकी नस्लों को उनकी कीमत कम करने के रिकॉर्ड में हेरफेर किया जा सके।

सीबीआई ने गौ-तस्करों के इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए इनके अवैध कारोबार करने के तरीके का भी खुलासा किया है। आरोपी इनामुल हक, अनारूल और मुस्तफा सीमा शुल्क विभाग द्वारा की गई नीलामी के दौरान इन मवेशियों को सस्ते दर पर खरीद लेते थे। बदले में एनामुल हक बीएसएफ अधिकारियों को प्रति मवेशी 2,000 रुपये और संबंधित सीमा शुल्क अधिकारियों को 500 रुपये का भुगतान करते थे। इसके अलावा इनामुल हक, मुस्तफा और अनारुल शेख अपने हक में नीलामी देने के बदले में भारतीय सीमा शुल्क के अधिकारियों को 10 प्रतिशत रिश्वत देते थे।

सीबीआई ने बीएसएफ की 36वीं बटालियन के तत्कालीन कमांडेंट सतीश कुमार तथा तीन अन्य इनामुल हक, अनारुल शेख और मोहम्मद गुलाम मुस्तफा के खिलाफ जो एफआईआर दर्ज की है, उसके मुताबिक कुमार के बेटे को इनामुल हक ने एक कंपनी में नौकरी दिलाई थी। उसे हक ने प्रमोट किया था। उस कंपनी के माध्यम से कुमार के बेटे को मई, 2017 और दिसम्बर, 2017 के बीच प्रति माह 30,000 रुपये से 40,000 रुपये का भुगतान किया गया है। इसका सुबूत भी गुनाह के इस दलदल में फंसे सतीश कुमार पर लगाए गए आरोपों को साबित करते हैं। आगे की सीबीआई जांच जारी है।

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