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श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थान से ईदगाह हटाने को लेकर मथुरा की अदालत में केस दायर, सोमवार होगी सुनवाई

संजीवनी टुडे 26-09-2020 19:50:16

अयोध्या के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण विराजमान ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है।


मथुरा। अयोध्या के बाद अब मथुरा में श्रीकृष्ण विराजमान ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मथुरा की अदालत में एक सिविल मुकदमा दायर कर श्रीकृष्ण विराजमान ने अपनी जन्मभूमि मुक्त कराने की गुहार लगाई है। इस याचिका के जरिए 13.37 एकड़ की कृष्ण जन्मभूमि का स्वामित्व मांगा है, जिस पर मुगलकाल में कब्जा कर शाही ईदगाह बना दी गई थी। शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की है। लखनऊ की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री सहित पांच अधिवक्ताओं ने मथुरा जिला एवं सत्र न्यायालय में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को मस्जिद मुक्त बनाने के लिए शुक्रवार को याचिका दाखिल की। इस याचिका में श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित मंदिर को ईदगाह मुक्त बनाने की बात कही गई है, सोमवार को इस मामले में सुनवाई होगी। 

गौरतलब है कि 13.37 एकड़ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का स्वामित्व बना हुआ है। फिलहाल मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर सामाजिक संगठनों द्वारा सरगर्मियां तेज होने लगी हैं, अब एक बार फिर लखनऊ के पांच अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री, हरि शंकर जैन, विष्णु शंकर जैन और दो अन्य सहित पांच अधिवक्ताओं द्वारा शुक्रवार को मथुरा न्यायालय में 60 पन्नों की याचिका दाखिल की गई। याचिका में मंदिर को मस्जिद मुक्त बनाने की बात कही गई है। इस याचिका की सुनवाई सोमवार को की जाएगी। 

इस केस में भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री विष्णु शंकर जैन हरिशंकर जैन एवं तीन अन्य लोगों ने शुक्रवार को वाद दायर किया है। अदालत में दाखिल मामले में कहा गया है कि मुसलमानों की मदद से शाही ईदगाह ट्रस्ट ने श्रीकृष्ण से सम्बन्धित जन्मभूमि पर कब्जा कर लिया और ईश्वर के स्थान पर एक ढांचे का निर्माण कर दिया। भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है। याचिका में यह दावा भी किया गया कि मंदिर परिसर का प्रशासन संभालने वाले श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान ने सम्पत्ति के लिए शाही ईदगाह ट्रस्ट से एक अवैध समझौता किया। 

आरोप लगाया गया है कि ‘श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान श्रद्धालुओं के हितों के विपरीत काम कर है, इसलिए धोखे से मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट की प्रबंध समिति ने 1968 में सम्बन्धित सम्पत्ति के एक बड़े हिस्से को हथियाने का समझौता कर लिया। इसके पहले मथुरा के सिविल जज की अदालत में एक और मामला दाखिल हुआ था, जिसे श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान और ट्रस्ट के बीच समझौते के आधार पर बंद कर दिया गया। 20 जुलाई, 1973 को इस सम्बन्ध में अदालत ने एक निर्णय दिया था। अभी के विवाद में अदालत के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है। इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि विवादित स्थल को बाल श्रीकृष्ण का जन्मस्थान घोषित किया जाए। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर कोर्ट में सिविल सूट दायर किया गया है। केस सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन के साथ भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की सखा रंजना अग्निहोत्री ने दायर किया है। इनकी याचिका में जमीन को लेकर 1968 के समझौते को गलत बताया गया है। विष्णु शंकर जैन के साथ ही रंजना अग्निहोत्री अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि वाले केस से भी जुड़े हैं। इस याचिका के माध्यम से 13.37 एकड़ की कृष्ण जन्मभूमि का स्वामित्व मांगा है, जिस पर मुगल काल में कब्जा कर शाही ईदगाह बना दी गई थी। शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की गई है। 

वाद भगवान श्रीकृष्ण विराजमान, कटरा केशव देव खेवट, मौजा मथुरा बाजार शहर की ओर से अंतरंग सखी के रूप में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री और छह अन्य भक्तों ने दाखिल किया है। इसमें साफ किया गया कि वादी कटरा केशव देव केवट, मौजा मथुरा बाजार के श्रीकृष्ण विराजमान हैं। वकील हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के मुताबिक यह मुकदमा मस्जिद ईदगाह प्रबंधन समिति ने अतिक्रमण को हटाने के लिए दायर किया गया है। फिलहाल मुकदमे में एक बड़ी रुकावट प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 है। इस एक्ट के मुताबिक आजादी के वक्त 15 अगस्त, 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस संप्रदाय का था, उसी का रहेगा। इस एक्ट के तहत श्रीरामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को छूट दी गई थी। अभी कुछ दिन पहले प्रयागराज में अखाड़ा परिषद की बैठक में साधु-संत मथुरा कृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर चर्चा की थी। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने मथुरा की ईदगाह मस्जिद तथा काशी की ज्ञानवापी मस्जिद को हटाने को अपने एजेंडा में शामिल किया है। संतों ने काशी-मथुरा के लिए लामबंदी शुरू भी कर दी है।

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