संजीवनी टुडे

मंत्रियों-सांसदों के वेतन संबंधी विधेयक विपक्ष की सहमति के बाद राज्यसभा में पारित

संजीवनी टुडे 18-09-2020 16:30:00

संसद के मॉनसून सत्र के पांचवे दिन राज्यसभा में मुख्य तौर पर मंत्रियों के वेतन एवं भत्ता संबंधी विधेयक को लेकर जोरदार चर्चा हुई।


नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के पांचवे दिन राज्यसभा में मुख्य तौर पर मंत्रियों के वेतन एवं भत्ता संबंधी विधेयक को लेकर जोरदार चर्चा हुई। इस दौरान तमाम उठापटक के बीच आखिरकार मंत्रियों के वेतन और भत्ते का (संशोधन) विधेयक-2020 तथा संसद सदस्यों का वेतन, भत्ते और पेंशन (संशोधन) विधेयक-2020 पर राज्यसभा में चर्चा के बाद पास हो गया। हालांकि विपक्षी सांसदों ने सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना कार्यक्रम यानी एमपीलैड को लेकर सरकार की योजना का विरोध जारी रहा। सभी विपक्षी दलों का एकमत जवाब साफ था कि सांसदों के वेतन कटौती से कोई समस्या नहीं है लेकिन एमपीलैड को बंद नहीं किया जाना चाहिए।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सभी को बधाई देता हूं कि सभी ने सहमति से संसद सदस्यों के वेतन संबंधी विधेयक का समर्थन किया। कांग्रेस सभी का समर्थन करती है लेकिन एमपीलैड हमारा पैसा नहीं है, यह गरीबों का पैसा होता है। इस पैसे से छोटे-छोटे काम होते हैं। इस राशि को दो साल के लिए कटौती नहीं करना चाहिए। कम से कम इसे एक साल किया जाए और राशि पांच करोड़ की बजाय ढाई करोड़ की जाए।

कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने कहा कि एमपीलैड को बंद करने के बजाय सरकार को फिजुलखर्ची रोकनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के लिए अभी नए ऑफिस की क्या जरूरत है? वर्तमान की व्यवस्था में अभी मंत्रिगण कार्य कर सकते हैं। जहां तक बात मंत्रियों के सुख-सविधा और वेतन में कटौती की है, तो हम सभी तैयार हैं।

जम्मू कश्मीर के पीडीपी सांसद नाजिर अहमद ने भी कहा कि एमपीलैड को फिर से बहाल किया जाना चाहिए। एमपीलैड की राशि नहीं मिल पाने के कारण क्षेत्र में काम नहीं हो पा रहा है, कई कार्यों के लिए पैसे रुके हुए हैं। इस दौरान उन्होंने दोनों पारित विधेयकों पर भी 50-50 समर्थन जताया।

महाराष्ट्र की एनसीपी सांसद फौजिया खान ने कहा कि वो सरकार के वेतन संबंधी विधेयक के फैसले का स्वागत करती है। लेकिन एमपीलैड फंड को लेकर सरकार को पुन: विचार करना चाहिए। इसके नहीं होने पर क्षेत्र में कोरोना बचाव के लिए सुविधाएं विकसित नहीं हो पा रही और हमें पीएम केयर्स फंड का इंतजार करना पड़ता है।

आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि फिलहाल केंद्र की सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही राज्य और केंद्र सरकारों को अपना विज्ञापन बंद कर देना चाहिए। सारे भवन निर्माण रोक दिए जाएं। इस तरह तमाम खर्चों में कटौती कर सरकार एमपीलैड फंड को दोबारा जारी कर सकती है, जो करना भी चाहिए।

वाईएसआरसी सांसद वी. विजयसाई रेड्डी ने वेतन संबंधी बिल का समर्थन करते हुए कहा कि जनता के बीच इससे एक अच्छा संदेश जायेगा कि उनके नेता और मंत्री भी उनके साथ हैं। लेकिन एमपीलैड की राशि सासंदों को मिलनी ही चाहिए क्योंकि यह जनता के कार्यों को पूरा करने का प्रमुख साधन है।

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