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भीमा कोरेगांव हिंसा: सरकारी रिपोर्ट का खुलासा, हिंदू संगठनों का था दंगो में हाथ

संजीवनी टुडे 20-01-2018 20:51:23

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसक झड़प और आगजनी में एक युवक की मौत के बाद  मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी विश्वास नांगरे पाटील द्वारा इस मामले के तथ्यों की जांच के लिए को-ऑर्डिनेशन कमिटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भीमा कोरेगांव मामला दंगा नहीं बल्कि हमला था। यह हमले हिंदू संगठनों ने कराए थे। वारदात के वक्त मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की सिफारिश भी इस कमेटी ने की है। इस मामले के आरोपी मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिडे के खिलाफ कुछ सबूत भी पुलिस को सौंपे जाएंगे। रिपोर्ट पुणे ग्रामीण एसपी को सौंप दी गई है। 

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गौरतलब है कि भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम के बाद महाराष्‍ट्र में हिंसा भड़क गई थी। भीम राव अंबेडकर के पोते और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश अंबेडकर और भारिप बहुजन महासंघ नेता ने महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया है। इस बंद को 250 से ज्यादा संगठनों ने समर्थन दिया है। 

Bhima Koregaon Violence Dalit Organizations Called Maharashtra Bandh

इस कार्यक्रम में दलित नेता एवं गुजरात से नवनिर्वाचित विधायक जिग्नेश मेवाणी, जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद, रोहित वेमुला की मां राधिका, भीम आर्मी अध्यक्ष विनय रतन सिंह और पूर्व सांसद एवं डा. भीमराव अंबेडकर के पौत्र प्रकाश अंबेडकर भी उपस्थित थे। 

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क्या है भीम-कोरेगांव की लड़ाई का इतिहास?
कोरेगांव की लड़ाई 1 जनवरी 1818 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के पेशवा गुट के बीच, कोरेगांव भीमा में लड़ी गई थी। ये वो जगह है जहां पर उस वक्त अछूत कहलाए जाने वाले दलितों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय के सैनिकों को लोहे के चने चबवा दिए थे। दरअसल ये महार अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से लड़ रहे थे और इसी युद्ध के बाद पेशवाओं के राज का अंत हुआ था।

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