संजीवनी टुडे

तेजस्वी यादव का राजद में बेसब्री से इंतज़ार.........!

संजीवनी टुडे 24-06-2019 21:14:59

हाल ही में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में राजद के सफाए पर मंथन के बाद से राजनीतिक और पारिवारिक परिदृश्य से गायब, विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का राजद बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है।


पटना। हाल ही में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव में राजद के सफाए पर मंथन के बाद से राजनीतिक और पारिवारिक परिदृश्य से गायब, विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव का राजद बेसब्री से इंतज़ार कर रहा है । बिहार विधानमंडल के 28 जून से शुरू होने वाले सत्र में तेजस्वी यादव के दिखने की पूरी सम्भावना है । पार्टी सूत्रों के अनुसार तेजस्वी फिलहाल दिल्ली में हैं । तेजस्वी यादव का लगातार नदारद रहना पार्टी के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है  । हालांकि राजद ने राजद के प्रदेश अध्यक्ष राम चंद्र पूर्वे और पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने साफ़ किया है कि तेजस्वी यादव  सदन में दिखेंगे  । तेजस्वी के गायब रहने की खीज , राजद में साफ़ दिखी फिर भी पार्टी के वरिष्ठ नेता तेजस्वी का बचाव करते दिखे । 

राजद सुप्रीमो लालू यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की  इफ्तार पार्टी से लेकर राजद के सभी राजनीतिक कार्यक्रमों से तेजस्वी का गायब रहना पार्टी के नेताओं को खल रहा था, किन्तु मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से सैंकड़ों मासूमों की मौत पर भी किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया ना देना और ना ही सोशल मीडिया में इस पर ट्वीट करना राजद के नेताओं को अखर -सा गया । यूँ तो राजद नेता कुछ भी बोलने से परहेज करते रहे किन्तु मासूम बच्चों की बड़ी तादाद में मौत के बावजूद  तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति के सन्दर्भ में तरह -तरह की अटकलों के बीच तेजस्वी यादव का मुजफ्फरपुर का दौरा नहीं करना, तेजस्वी पर सवाल पैदा करता रहा । इस बीच चुनाव परिणाम के बाद लगभग एक महीने तक राजद नेताओं को कोई जानकारी नहीं थी कि तेजस्वी यादव कब लौटेंगे और कब पार्टी की राजनीतिक कमान सम्भालेंगे ? लोकसभा  चुनाव के दौरान धुआंधार बयानबाज़ी के बाद तेजस्वी यादव का राजनीतिक फलक से गायब रहना सुर्खियाँ बनता रहा और यही वजह है कि अटकलों का बाज़ार भी गर्म रहा । इन दिनों तेजस्वी को लेकर तरह - तरह की राजनीतिक चर्चाएं होती रहीं । 

कभी उनके दिल्ली में होने की खबर आई तो कभी सिंगापुर में और कभी क्रिकेट मैच का लुत्फ़ उठाते लन्दन में । कभी तो खबर यह भी मिली कि वह भाजपा के चंद वरिष्ठ नेताओं के सम्पर्क में हैं , ताकि चारा घोटाला में जेल में बंद  उनके पिता लालू यादव को वह  कुछ राहत दिला सकें ,  तो कभी जद (यू ) की तरफ पींगें बढ़ा रहे हैं । जैसे - जैसे समय बीतता गया, ये चर्चाएँ बढती गईं । लालू – राबड़ी परिवार की तरफ से भी किसी तरह का ना तो कोई खंडन हुआ और ना ही कोई बयान आया । इस बीच बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व  में राजग की सरकार के खिलाफ राजद के एक दिवसीय धरना से भी तेजस्वी यादव नदारद रहे । उनकी ना तो सांकेतिक उपस्थिति ही रही और ना ही कोई सरकार के खिलाफ उन्होंने बयान ही दिया । राजनीतिक फलक से तेजस्वी यादव का दूर रहना , राजद के लिए पचा पाना मुश्किल होता गया , वह भी तब जबकि महागठबंधन के सहयोगी दल भी उंगली उठाने लगे हों ।' हम 'के नेता और राजद के साथ तालमेल में लोकसभा का चुनाव लड़ने और हारने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन में बिखराव का आरोप लगाया । जीतन राम मांझी का मानना है कि महागठबंधन में पहले वाली बात नहीं रही और सभी अपना ही राग लाप रहे हैं । 

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार में महागठबंधन के चुनाव लड़ने और बुरी तरह हारने से बौखलाए मांझी ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व को ही चुनौती दे डाली  और राजद में उनके नेतृत्व को अनुभवहीन बता दिया । राजद में बिखराव , विशेषकर लालू – राबड़ी परिवार में दूरियों को, लोकसभा चुनाव के दौरान ही राजद के अंदर टूट की बड़ी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि राजद की रणनीति बिहार में भी ठीक नहीं रही । लोकसभा चुनाव में सीपीआइ को महागठबंधन से दूर रखे जाने को एक बड़ी राजनीतिक भूल की संज्ञा देते हुए उन्होंने कहा कि राजद का वर्तमान नेतृत्व अत्यंत अपरिपक्व है। राजनीतिक आरोपों - प्रत्यारोपों के बीच तेजस्वी का गायब रहना राजद के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी  । 28 जून से शुरू हो रहे विधान सभा के सत्र के लिए राजद तो तेजस्वी यादव का बेसब्री से इंतज़ार कर ही रहा है , अन्य दल भी देख रहे हैं, वह कितनी जल्दी अवतरित होते हैं ?

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