संजीवनी टुडे

आज मेरठ दौरे पर अमित शाह, 2019 में यूपी फतह के लिए रणनीति होगी तैयार

संजीवनी टुडे 12-08-2018 11:09:14


नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यकारिणी शनिवार को मेरठ में शुरू होगी। इसमें 2019 में यूपी फतह के लिए '74 प्लस' के संकल्प को पूरा करने की रणनीति तैयार होगी। अमित शाह बीजेपी वर्करों को चुनावी जीत का टास्क सौंपेंगे। यूपी में एक सितंबर से पांच माह के बड़े चुनावी अभियान का ऐलान भी इसमें होगा। 'हर हाल में जीत-दस्तक जनता के बीच' का नारा दिया जाएगा। जिसकी शुरुआत 17 अगस्त से पहला चुनावी प्रोग्राम शुरू करने की घोषणा से होगा। गैरबीजेपी दलों के महागठबंधन की काट के लिए जातीय बंधन पर वार करने का प्लान तैयार करने पर मंथन होगा।

यूपी में फिर जीत के विश्वास और संकल्प के साथ 11 और 12 अगस्त को बीजेपी के 68 सांसद, 324 विधायक, 92 जिला और महानगर अध्यक्ष और संगठन के पदाधिकारी यानी करीब एक हजार लोग मेरठ में सियासी पाठ पढ़ेंगे। बीजेपी के सूत्रों के मुताबिक छह सत्र में होने वाली इस कार्यसमिति में पूरी तरह 2019 विजय को लेकर ही फोकस रहेगा। बीजेपी की कोशिश होगी कि वेस्ट यूपी की भूमि से 2014 और 2017 की तरह कामयाबी की हैटट्रिक लगाई जाए। 

बीजेपी के सीनियर पदाधिकारी के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय वर्करों पहले से तय लक्ष्य 80 में से कम से कम 74 से ज्यादा सीट जीते का लक्ष्य सौंपेंगे। इस लक्ष्य को कैसे पूरा करना है इसका समयबद्ध प्रोग्राम बताएंगे। वेस्ट यूपी बीजेपी अध्यक्ष अश्विनी त्यागी का कहना है कि आयोजन एतिहासिक होगा। हर तैयारी पूरी है। 

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक कार्यसमिति में वर्करों को बताया जाएगा कि अब यूपी में सभी मोर्चे प्रकोष्ठ प्रकल्प में हजारों सीनियर और जूनियर नेताओं को पद देकर संगठन खड़ा कर दिया गया है। कुछ नेताओं का सरकार में अच्छे पदों पर मनोनयन हो गया है। संगठन की इस सेना को लेकर हर मोर्चे, प्रकोष्ठ और प्रकल्प के अध्यक्ष चुनावी मैदान में कूद जाएं। सूत्रों के मुताबिक वर्करों को बताया जाएगा कि उनके साथ प्रदेश के पदाधिकारी, मंत्री सब जुटेंगे। टीम भावना से काम होगा। विरोधियों की चाल पर नजर रख आगे बढ़ना होगा। शाह समझाने की कोशिश करेंगे कि गठबंधन चुनौती तो है, मगर इसे अवसर में बदलने होगा। कैराना उपचुनाव में गठबंधन के सामने मिले वोटों का गणित बताकर समझाने की कोशिश की जा सकती है कि वह भले ही बीजेपी हारी हो लेकिन वोटिंग प्रतिशत कम होने के बाद भी बीजेपी को 2014 से ज्यादा वोट वहां मिले। 

बीजेपी के रणनीतिकरों के मुताबिक 2014 में वोटिंग प्रतिशत के मुताबिक यूपी की 46 लोकसभा सीटों पर गठबंधन (एसपी बीएसपी-कांग्रेस) के दलों का वोट जोड़ने पर बीजेपी से ज्यादा हैं। अगर अब गठबंधन को इसी तरह वोट ज्यादा चला गया तब 74 प्लस के संकल्प को ग्रहण लग सकता है। सहारनपुर, बिजनौर, नगीना, मेरठ, मुजफ्फरगर, मुरादाबाद, अलीगढ़, संभल, एटा, फतेहपुर सीकरी, मथुरा आदि के साथ यूपी की ऐसी लोकसभा सीट है जहां 2014 में जीती बीजेपी लेकिन गैरबीजेपी दलों को वोट ज्यादा मिला। एक साथ आने पर बीजेपी को नुकसान होने का खतरा है। रणनीतिकार इसकी काट तलाशने में लंबी माथापच्ची कार्यसमिति में करेंगे। सूत्रों के मुताबिक शाह बताएंगे कि वोटर लिस्ट से बीजेपी की नीतियों की सोच रखने वालों की सूबे में वोटर लिस्ट से गायब 52 लाख पुराने वोटरों को जोड़ने से इस प्रतिशत को बढ़ाया जा सकता है। वर्करों को बताया जाएगा कि जिस तरह 2014 और 2017 में युवाओं के बल पर बीजेपी सत्ता में आई इस बार भी उनको जोड़ने में जोर लगाना होगा। 

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बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ केंद्र सरकार में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, कलराज मिश्र, उमा भारती, मुख्तार अब्बास नकवी, संतोष गंगवार, मेनका गांधी, रिटायर जनरल वीके सिंह, महेश शर्मा, साध्वी निरंजन ज्योति आदि शामिल होंगे। 

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