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Ambedkar Jayanti: मायावती, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सहित दिग्गज नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी बधाई

संजीवनी टुडे 14-04-2020 13:43:16

भारतीय संविधान के निर्माता बीआर अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था।


डेस्क। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को देश के नागरिकों से संविधान के निर्माता डॉ बीम राव अंबेडकर (B. R. Ambedkar) की सीखों को आत्मसात करने और एक मजबूत तथा समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान देने को कहा। अंबेडकर की जयंती की पूर्वसंध्या पर देशवासियों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने लोगों से कोविड-19 के मद्देनजर ‘सामाजिक दूरी’ बनाकर रखते हुए और घरों में रहते हुए अंबेडकर जयंती मनाने को कहा।

वहीं, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, 'भीमराव आंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि! हमारे संविधान-शिल्पी डॉक्टर आंबेडकर, न्याय व समता पर आधारित समाज के लिए सदा प्रयत्नशील रहे। आइए, हम सब उनके महान व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेते हुए, उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लें।'

वहीं, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बाबा साहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी है। बाबा साहेब की जयंती के मौके पर मायावती ने बयान जारी करते हुये कहा है कि वो बीएसपी और करोड़ों फॉलोअर्स की तरफ से बाबा साहेब के प्रति सम्मान व्यक्त करती हैं। मायावती ने कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर ने अपना पूरा जीवन दलित, आदिवासी और हाशिये पर रहने वाले दूसरे समुदायों को सम्मान के साथ जीवन गुजारने पर लगाया। इसके साथ ही मायावती ने कहा कि बाबा साहेब के सपनों को पूरा करने के लिये 1984 में बहुजन समाज पार्टी का गठन किया गया था।

इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबा साहेब को श्रद्धांजलि दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा, ‘बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को उनकी जयंती पर सभी देशवासियों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।' इसी के साथ पीएम मोदी ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें कुछ फुटेज के साथ पीएम मोदी के भाषण का हिस्सा भी है।

कुछ इसी प्रकार दूसरे नेताओं ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से देशवासियों को शुभकामनायें प्रेषित की है। 

गौरतलब है कि भारतीय संविधान के निर्माता बीआर अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। बीआर अंबेडकर ने न सिर्फ संविधान का निर्माण किया बल्कि देश की सबसे बड़ी बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के बनाने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वो एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे जिन्होंने भारत में दलित बौद्ध आंदोलन चलाया। बचपन से ही बीआर अंबेडकर दलितों की स्थिति को लेकर चिंतित थे। एक दलित बच्चा होने के कारण उन्होंने देखा था कि किस तरह दलित बच्चों और दूसरे बच्चों में भेदभाव किया जाता था।

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