संजीवनी टुडे

सभी तैयारियां पूरी, चंद्रयान-2 का 15 जुलाई को होगा प्रक्षेपण

संजीवनी टुडे 30-06-2019 10:24:48

इसरो ने चन्द्रयान-2 मिशन को प्रक्षेपित करने के लिये तारीख का एलान कर दिया है। चन्द्रमा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इसको इसी साल 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाएगा और ये 15 दिनों तक चन्द्रमा के आंकड़े जुटाएगा जो दुनिया को चांद को और करीब से जानने में मदद करेगा।


नई दिल्ली। इसरो ने चन्द्रयान-2 मिशन को प्रक्षेपित करने के लिये तारीख का एलान कर दिया है। चन्द्रमा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए इसको इसी साल 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाएगा और ये 15 दिनों तक चन्द्रमा के आंकड़े जुटाएगा जो दुनिया को चांद को और करीब से जानने में मदद करेगा।

इसरो 15 जुलाई की सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर चंद्रयान-2 को लॉन्च करेगा। इस मिशन का सबसे कठिन हिस्सा है चंद्रमा की सतह पर सफल और सुरक्षित लैंडिंग कराना. चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह से 30 किमी की ऊंचाई से नीचे आएगा। उसे चंद्रमा की सतह पर आने में करीब 15 मिनट लगेंगे। यह 15 मिनट इसरो के लिए बेहद कठिन होगा क्योंकि इसरो पहली बार ऐसा मिशन करने जा रहा है। 

लॉन्च के बाद अगले 16 दिनों में चंद्रयान-2 पृथ्वी के चारों तरफ 5 बार ऑर्बिट बदलेगा। इसके बाद 6 सितंबर को चंद्रयान-2 की चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास लैंडिंग होगी। इसके बाद रोवर को लैंडर से बाहर निकलने में 4 घंटे लगेंगे। इसके बाद रोवर एक सेंटीमीटर प्रति सेकंड की गति से करीब 15 से 20 दिनों तक चांद की सतह से डाटा जमा करके लैंडर के जरिए ऑर्बिटर तक पहुंचाता रहेगा। ऑर्बिटर फिर उस डाटा को इसरो को भेजेगा। 

ये सात तरह की चुनौतियां आएंगी चंद्रयान-2 के सफर में:
पहली चुनौती- सटीक रास्ते पर ले जाना
दूसरी चुनौती- गहरे अंतरिक्ष में संचार
तीसरी चुनौती- चांद की कक्षा में पहुंचना
चौथी चुनौती- चांद की कक्षा में घूमना
पांचवीं चुनौती- चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग
छठीं चुनौती- चंद्रमा की धूल
सातवीं चुनौती- बदलता तापमान
जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से होगी लॉन्चिंग

चंद्रयान-2 को सबसे ताकतवर रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 से पृथ्वी की कक्षा के बाहर छोड़ा जाएगा, फिर उसे चांद की कक्षा में पहुंचाया जाएगा फिर लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा। इसके बाद रोवर उसमें से निकलकर विभिन्न प्रयोग करेगा। चांद की सतह, वातावरण और मिट्टी की जांच करेगा। वहीं ऑर्बिटर चंद्रमा के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए लैंडर और रोवर पर नजर रखेगा। साथ ही रोवर से मिली जानकारी को इसरो सेंटर भेजेगा। रोवर के एक व्हील पर जहां अशोक चक्र अंकित होगा, वहीं दूसरे व्हील पर इसरो का लोगो अंकित होगा। साथ ही रोवर और लैंडर पर तिरंगे का चिह्न भी होगा, जो हमारी एक और शान को दर्शाएगा। 

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इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 603 करोड़ रुपये है. अगर मिशन सफल हुआ तो अमेरिका, रूस, चीन के बाद भारत चांद पर रोवर उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा। 

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