संजीवनी टुडे

उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर

इनपुट- यूनीवार्ता

संजीवनी टुडे 10-11-2019 17:20:48

श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के पक्ष में देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दिये गये निर्णय से अयोध्या में आम लोगों के साथ-साथ संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर है और एक दूसरे को सद्भावना बनाये रखने की अपील कर रहे हैं।


अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के पक्ष में देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दिये गये निर्णय से अयोध्या में आम लोगों के साथ-साथ संत-धर्माचार्यों में खुशी की लहर है और एक दूसरे को सद्भावना बनाये रखने की अपील कर रहे हैं।

लालद्वारा पंजाबी आश्रम, स्वर्ग द्वार के महंत केशव दास महाराज ने कहा कि राम हम सबके प्राणधार हैं। वह कण-कण में विराजमान हैं। देश के हर एक व्यक्ति की इच्छा थी कि रामलला एक भव्य भवन में विराजमान हों सो अब पूरा होने जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने अपना निर्णय सुना दिया है कि जहां रामलला विराजमान हैं वहीं भव्य मंदिर बने। न्यायालय के इस फैसले से सभी संत-महंतों में खुशी की लहर है और हम अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अब सभी पक्षों को अदालत के इस निर्णय का स्वागत करना चाहिये। क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने फैसले में हिन्दू मुस्लिम दोनों पक्षों का ख्याल रखकर न्याय किया है।

साकेत भवन लक्ष्मण घाट के महंत प्रियाप्रीतम शरण महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम हम सबके आराध्य हैं। उनका भव्य मंदिर जल्द से जल्द बनना चाहिये । न्यायालय ने राम मंदिर के हक में फैसला दिया , है जो एक सुंदर सद्भावना पूर्ण निर्णय है। हिन्दू-मुस्लिम पक्ष के लिये सम्मानजनक है। अदालत के इस निर्णय का सभी पक्ष मानें और स्वागत करे।

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लक्ष्मण घाट स्थित हनुमत केलिकुंज के महंत महावीर शरण महाराज ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह सौहार्दपूर्ण फैसला है जो हिन्दू मुसलमानों के दिलों को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह राम मंदिर के पक्ष में ऐतिहासिक है। इस निर्णय से हम सभी पूरी तरह संतुष्ट हैं। बहुत जल्द ही रामलला तिरपाल से निकलकर भवन में विराजमान होंगे।

राम वैदेही खड़ेश्वरी मंदिर वासुदेव घाट के महंत प्रकाशदास महाराज ने निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि आज सच्चाई की जीत हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने सच्चाई पर अपना निर्णय दिया और हिन्दू मुस्लिम दोनों पक्षों के लिये सोचा। आदलत के निर्णय का सभी पक्षों को सम्मान करना चाहिये।

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