संजीवनी टुडे

महिलाएं अक्सर अपने परिवार के लिए अपने प्रेम की दे देती है कुर्बानी

संजीवनी टुडे 19-06-2017 09:44:21

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यक्ति की उम्रकैद की सजा को खारिज करते हुए टिप्पणी की। इसमें कोर्ट ने कहा है कि भारत में माता पिता के फैसले को स्वीकार करने के लिए महिलाओं का अपने रिश्तों का बलिदान करना बहुत ही आम बात है। 

 

सुनाई उम्रकैद की सजा
कोर्ट ने अपने फैसले में उस व्यक्ति के दोषी साबित होने और उम्र कैद की सजा पाने को खारिज कर दिया जिसने एक महिला के साथ गुपचुप शादी करने के बाद मिलकर आत्महत्या करने का करार किया था, लेकिन इसमें वह बच गया था। 1995 के इस मामले में 23 वर्षीय महिला को बचाया नहीं जा सका था, लेकिन व्यक्ति बच गया था और पुलिस ने उसके खिलाफ महिला की हत्या का मामला दर्ज किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्ति के बयान को विश्वास करने योग्य माना और कहा कि उसके बयान के अनुसार, महिला को उसके परिवार की ओर से प्रताड़ित किया जाता था और नवंबर 1995 को घटना वाले दिन भी उसे प्रताड़ित किया गया था। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामलों में अनुमान के आधार पर फैसला नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष उसका दोष साबित नहीं कर सका है।

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