संजीवनी टुडे

‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ कानून के तहत प्लास्टिक से बने तिरंगे इस बार नहीं लहरेँगे

संजीवनी टुडे 17-07-2017 09:21:55

Under the Flag Code of India law the tricolor made of plastic will not take this time

नई दिल्ली। भारत का राष्ट्रीय झंडा, भारत के लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतिरूप है। तिरंगा राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। हम सभी का अपने तिरंगे से एक भावनात्मक रिश्ता है। लेकिन 15 अगस्त से पहले गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक तिरंगे ही तिरंगे नजर आते हैं।

ज्ञांतव्य है की, इस वक्त देश में ‘फ्लैग कोड ऑफ इंडिया’ (भारतीय ध्वज संहिता 2002) नाम का कानून है, जिसमें तिरंगे को फहराने के कुछ नियम-कायदे है। केंद्रीय गृह मंत्रालय से राज्य सरकारों को आए निर्देश के अनुसार, प्लास्टिक के तिरंगे का उपयोग करने पर तीन वर्ष की कैद या जुर्माना या दोनों सजा दी जाएगी।


तिरंगे से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियम:-

1. जब भी झंडा फहराया जाए तो उसे सम्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाए, जहाँ से वह स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

2. तिरंगा बनाने के लिए हमेशा कॉटन, सिल्क या खादी का इस्तेमाल होना चाहिए। प्लास्टिक से बने तिरंगे का इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है।

3. झंडे को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर के साथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि झंडे को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।

4. तिरंगा बनाने के लिए हमेशा कॉटन, सिल्क या खादी का इस्तेमाल होना चाहिए। प्लास्टिक से बने तिरंगे का इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है।

5. झंडे पर कुछ भी लिखना या बनाना गैरकानूनी है। किसी भी गाड़ी के पीछे, बोट या प्लेन में तिरंगा प्रयोग नहीं कर सकते ।

 6. फटे या क्षतिग्रस्त झंडे को नहीं फहराया जा सकता है। झंडे का प्रयोग किसी प्रकार के यूनीफार्म या सजावट के सामान में नहीं हो सकता है।

7. किसी बिल्डिंग को ढकने में भी इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। किसी भी स्थिति में तिरंगा जमीन को छूना नहीं चाहिए।

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