संजीवनी टुडे

स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया: इम्पैक्ट गुरु की संभावनाभरी दस्तक

संजीवनी टुडे 05-05-2016 00:00:00


नई दिल्ली। स्टार्टअप इंडिया स्टैंडअप इंडिया, मोदी सरकार द्वारा 16 जनवरी 2016 से शुरु किया जाने वाला मिशन है। ये बहुत प्रभावशाली अभियान है जो भारतीय युवाओं के लिये नौकरी के अधिक अवसर प्रदान करेगा। 

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प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम का एक्शन प्लान सामने रखते हुए कहा कि देश के युवाओं को जॉब सीकर की मानसिकता से निकालकर जॉब क्रिएटर बनाने पर फोकस होगा। ये संभव भी है क्योंकि अमेरिका में 70 पर्सेंट नौकरियां स्टार्टअप्स के जरिए ही निकली हैं। लेकिन भारत की शैक्षिक व्यवस्था और रोजगार तक पहुंचने के साधनों में इसके लिए बड़े बदलाव की जरूरत होगी और ये बात इतनी जल्दी कर पाना संभव नहीं दिख रहा। भारत 4200 एंटरप्राइजेज के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर है। भारत सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन से ही स्टार्टअप्स के मामले में पीछे है। 


दुनियाभर के निवेशक और वेंचर कैपिटलिस्ट भारत को स्टार्टअप्स की शुरुआत के लिए सबसे अच्छे डेस्टिनेशन के तौर पर देख रहे हैं। सरकार इस दिशा में तेजी से बदलावों को अपनाते हुए देश के बुनियादी विकास से युवा शक्ति को साथ ही निवेश को जोड़ सकती है। भारत की युवा आबादी और वृहद संसाधन इसमें ऊर्जा भरने का काम कर सकते हैं।

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स्टार्टअप और क्राउडफंडिंग के लिए कोई एक क्षेत्र निर्धारित नहीं हैं। भारत जैसे विशाल देश के लिए बहुत सारे विकल्प हैं बस उस विकल्प को तलाशने की जरूरत है। इम्पैक्ट गुरु एक गैर लाभकारी सामाजिक विषयों से जुड़ा मंच है जिसे सन् 2014 में स्थापित किया गया है। इसी क्रम में इम्पैक्ट गुरु के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पीयूष जैन का सिंगापुर के प्रमुख निवेश मंच फण्डनेल, आर.बी. इनवेस्टमेंट्स एवं अन्य वित्तीय संगठनों केे साथ अंतर्राष्ट्रीय करार हुआ है जिसमें भारत की सामाजिक भागीदारी की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्राउडफंडिग के माध्यम से विविध कार्यक्रम के उन्नयन के लिए गति दी जा सकेगी। 

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इस अंतर्राष्ट्रीय करार पर श्री जैन आशावादी दृष्टिकोण रखते हैं। नौकरी करने की बजाय वे अन्य लोगों को नौकरी देने में विश्वास रखते हैं। विशेषकर प्रवासी भारतीयों को भारत में सामाजिक कार्यों के उत्थान एवं निवेश हेतु प्रेरित किया जाएगा। जिसमें वित्तीय समावेशन, स्वच्छ तकनीक, शिक्षा, शुद्ध पीने का पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सहित विभिन्न सामाजिक जरूरतों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश होगा। हाॅवर्ड इनवेशन लैब के नवीन खोजकारी उद्यम एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम से प्रेरणा एवं प्रशिक्षण पाने के पश्चात श्री जैन सिंगापुर के पैक्ट सोशल इंटरप्राइज इनक्यूबेटर के साथ मिलकर भारत के लिए वित्तीय संभावनाओं को तलाशेेंगे।

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श्री जैन हार्वर्ड और वार्टन जैसे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त हैं। उन्होंने जेपी मार्गन, बोस्टन कंसल्टिंग गु्रप, अर्नस्ट एंड यंग जैसे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों में उच्च पद एवं उच्च वेतनमान को छोड़कर स्टार्टअप के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान बनायी है। भारत में क्राउडफंडिंग को स्थापित करने का श्रेय श्री जैन को ही जाता है। उनके अनुसार तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों, जनकल्याण उपक्रमों और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। 

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इम्पैक्ट गुरु पूर्व में भी अनेक गैर सरकारी संगठनों के साथ अपनी सेवाएं दी हैं जिनमें आॅक्सफेम, एसओएस बाल ग्राम, हैविडेट फाॅर हयूमिनिटी, सीएसआर विभाग- टाटा, गोदरेज, वाॅकहार्ट आदि हैं। वह डेलबर्ग और आशा इम्पैक्ट जैसे संगठनों की तरह ही अपना विस्तार करना चाहता है। श्री जैन ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि इम्पैक्ट गुरु के माध्यम से आगामी दो वर्षों में पचास करोड़ के सामाजिक सेवा एवं परोपकार के कार्य का लक्ष्य हासिल करेंगे, जो पूंजीनिवेश या क्राउफंडिंग के माध्यम से जुटाया जायेगा।

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भारत के लिए क्राउडफंडिंग की अपार संभावनाएं हैं। इम्पैक्ट गुरु भारत में जनकल्याण के विविध उपक्रमों के साथ-साथ बच्चों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गैर लाभकारी संगठनांे के साथ मिलकर कार्य करेगा। आने वाले समय में क्राउडफंडिंग एवं स्टार्टअप बेरोजगारों के लिए रोजगार एक बड़ा जरिया बनेगा और इससे बहुत से लोग लाभान्वित होंगे।
नैसकॉम की साल 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत स्टार्टअप के मामले में अमेरिका और ब्रिटेन के बाद दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है। 

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स्टार्टअप की रफ्तार कुछ ऐसी है कि साल 2014 में 179 स्टार्टअप में 14500 करोड़ का निवेश हुआ जबकि 2015 में 400 स्टार्टअप में करीब 32 हजार करोड़ का निवेश हुआ है। यानी हर हफ्ते करीब 625 करोड़ रुपए। सरकार जल्द ये तय करने वाली है कि कौन सी कंपनियां स्टार्टअप की श्रेणी में आएंगी और कौन सी नहीं। क्योंकि अब तक देश में स्टार्टअप को लेकर कोई परिभाषा तय नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हेडक्वार्टर वाली और पिछले पांच साल में बनी कंपनियों को स्टार्टअप में रखा जा सकता है।

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इन दिनों भारत में कई बेहतरीन स्टार्टअप शुरू हुए हैं जिन्होंने बाजार का रुख बदलकर रख दिया है। बिजनेस के नये-नये अवधारणा तलाशना और दुनिया में भारत के व्यापार को नई पहचान देना ही स्टार्टअप की ओर पहला कदम है। स्टार्टअप अपार संभावनाओं से भरा क्षेत्र हैं। बिजनेस के नये-नये माॅडलों को उद्घाटित करने के साथ-साथ भारत की छवि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी है, जिससे भारत दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में पहचान पाने लगा है।


श्री पीयूष जैन का मानना है कि क्राउडफंडिंग भारत को दुनिया में एक अलग पहचान दिलायेगी। इसको गति दने के लिए वे इम्पैक्ट गुरु की कार्ययोजना को आकार देने के लिये सक्रियता से जुटे हैं। इम्पैक्ट गुरु जागरूकता लाकर लोगों में दान की एक नई परम्परा को विकसित करेगा। दान देने के लिए हमें लोगों को प्रेरित करना है। श्री पीयूष जैन का मानना है समाज में जो सुविधा संपन्न लोग हैं उनकी भी समाज के प्रति जिम्मेदारी बनती है अतः अपनी आय का कुछ हिस्सा इन गरीबों के उत्थान एवं उन्नयन में खर्च करना चाहिए। 

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श्री जैन कहते हैं कि बड़े दानदाता ही नहीं बल्कि छोटे-छोटे दान को प्रोत्साहन किया जायेगा। लोगों में भी दान देने का प्रचलन बढ़ाना हमारा लक्ष्य है। विशेषतः नवयुवकों में जनकल्याण एवं सामाजिक भागीदारी के लिए दान की परम्परा के प्रति आकर्षण उत्पन्न किया जाएगा, जिसके माध्यम से सेवा और जनकल्याण के नये उपक्रम संचालित हो सकेंगे। स्टार्टअप के प्रणेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी क्राउडफंडिंग के जरिये सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक सशक्त बनाने के लिये उत्साहित दिखाई देते हैं। 

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पीयूष जैन भारत सरकार को क्राउडफंडिंग के लिए नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि सरकार को क्राउडफंडिंग के लिए योजना बनानी चाहिए। क्राउडफंडिंग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लोग जिन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते उनके लिए दान करना नहीं चाहते हैं। इस स्थिति में लोगों को दान कराने के लिए राजी करना चुनौती भरा होता है। जब सरकार की ओर से इसको प्रोत्साहन मिलेगा और इसकी सुनियोजित योजना सामने आएगी तो लोगों का विश्वास जागेगा।


पीयूष जैन का मानना है कि सारे मसले सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं छोड़ देना चाहिए बल्कि इस कार्य में लोगों को सहयोग के लिए भी आगे आना चाहिए सरकार हमारे तमाम मसले नहीं सुलझा सकती और जनता अपने बीच की समस्याओं के समाधान के लिये खुद ही आगे आना चाहती है। मध्य और उच्च वर्ग के लोग न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि जनकल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं के लिये दान करना चाहते हैं। लोग एक-दूसरे की मदद भी करना चाहते हैं। लगता है आने वाले समय में छोटे-छोटे दान बड़ी योजनाओं को आकार देने के माध्यम बनेंगे।

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पीयूष जैन कहते हैं कि भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिंग अहम भूमिका निभा सकती है और उनका मानना है कि क्राउडफंडिंग भारत में काफी सफल होगा। यहां अमीर-गरीब के बीच गहरी खाई है। तकनीक एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दुनिया में भारत की अलग पहचान है। यह उसे पाटने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके जरिए अमीर एवं सुविधा संपन्न वर्ग मिलकर गरीबों की मदद कर सकते हैं। 


इससे उन लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा, जो पैसों की कमी की वजह से बुनियादी जरूरतों से वंचित रह जाते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि क्योंकि क्राउडफंडिंग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जो कि अब कला, विज्ञान और मनोरंजन को समृद्ध करने की भी हो जायेगी। ऐसा होने से क्राउडफंडिंग की उपयोगिता एवं महत्ता सहज ही बहुगुणित होकर सामने आयेंगी। 

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हम जहां रहते हैं वहां एक-दूसरे की मदद के लिए लोगों को आगे आने चाहिए बिना उनके सहयोग के समाज आगे नहीं बढ़ सकता। इस तरह की मदद के लिए हम आगे नहीं आएंगे तो पैसों की कमी के चलते हमारे समाज से जुड़ा ही एक वंचित वर्ग काफी पीछे चला जाएगा। फिर हमारे ही समाज में सामाजिक समरसता नहीं रह पायेगी।


इन दिनों  में भारत दुनियाभर में स्टार्टअप शुरू करने के लिए एक पसंदीदा जगह के तौर पर उभरा है। श्री पीयूष जैन नेे स्टार्टअप के माध्यम से लोगों को सोचने पर मजबूर किया है। इस समय अमेरिका के कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली के बाद अगर दुनिया के निवेशकों को सबसे ज्यादा कोई देश आकर्षित कर रहा है तो वह है भारत। बहुत सारे तथ्य इस बात को साबित करते हैं कि भारत एक उभरता हुआ स्टार्टअप केंद्र है। 

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आज इंटरनेट के इस युग में क्राउडफंडिंग का भविष्य उज्ज्वल ही दिखाई दे रहा है। इम्पैक्ट गुरु काॅलेज और उच्च शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ युवा प्रोफेशनल के बीच व्यापक पहुंच स्थापित कर उनमें क्राउडफंडिंग की शक्ति के माध्यम से उन्हें सोशल मीडिया के लिए जागरूक किया जा रहा है। 


पीयूष जैन का कहना है कि सोशल मीडिया आज आम आदमी की जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इम्पैक्ट गुरु दुनिया का पहला ऐसा डिजिटल मंच होगा जो जनकल्याणकारी कार्यों के लिए पैसा जुटाने और ऐसे ही उपक्रमों के लिए साझेदारी निभाने के लिए तत्पर है। 

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आज हर आदमी फेसबुस से जुड़ा हुआ है और उसकी स्वतंत्र डिजिटल जीवनशैली भी है, जो उसे अधिक सामाजिक बनाती है। फेसबुक के प्रत्येक सदस्य द्वारा सामाजिक भलाई हेतु एक न्यूनतम दान को प्रोत्साहित किया जाएगा जो कुछ शर्तों के साथ 1000 रुपये तक हो सकता है। इस योजना को इम्पैक्ट गुरु ने ‘मुस्कान’ या ‘सामाजिक मीडिया साझेदारी’ नाम दिया है। 

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