संजीवनी टुडे

मुस्लिम महिलाओं को मिली बड़ी राहत, ट्रिपल तलाक पर बिल को कैबिनेट की मंजूरी

संजीवनी टुडे 16-12-2017 12:12:00

नई दिल्ली। मोदी कैबिनेट ने शुक्रवार को ट्रिपल तलाक पर बिल को मंजूरी दे दी। इस बिल को विटंर सेशन में रखा जाएगा। मुस्लिम वुमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल, 2017 ट्रिपल तलाक बिल के नाम से पॉपुलर है। न्यूज एजेंसी को सोर्सेस ने बताया, "बिल में एक साथ तीन तलाक देने पर सजा का प्रोविजन है। इसमें महिला को मेंटेनेंस मांगने का अधिकार भी शामिल है।" बता दें कि अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी करार दिया था। इसके बाद भी देश में ट्रिपल तलाक से जुड़े कुछ मामले सामने आए थे। सरकार की तरफ से कहा गया था वो तीन तलाक पर रोक लगाने के लिए नया कानून लाएगी।

सरकार ने क्या कहा?
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा- कैबिनेट ने मुस्लिम वुमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल 2017 को मंजूरी दे दी है। इस कानून के लागू होने बाद एक बार में दिया जाने वाला ट्रिपल तलाक गैर कानूनी हो जाएगा।

वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया वेलकम
ऑल इंडिया मुस्लिम वुमन पर्सनल लॉ बोर्ड की शाइस्ता अंबर ने सरकार के फैसले का स्वागत किया। कहा- इसकी बहुत जरूरत थी। हम सरकार के फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं। इस सरकार ने पिछली सरकार से अलग रास्ता तय कर मुस्लिम महिलाओं के हितों की चिंता की है। हम सभी पार्टीज से गुजारिश करते हैं कि वो संसद में इस बिल का समर्थन करें।

अभी ट्रिपल तलाक पर क्या कार्रवाई?
अभी महिला स्पेशल मैरिज एक्ट-1954 के तहत हक मांग सकती है। आईपीसी की धारा-125 के तहत मेंटेनेंस, सिविल सूइट व मुस्लिम मैरिज एक्ट के ऑप्शन भी हैं। घरेलू हिंसा कानून के तहत भी कार्रवाई मुमकिन है।
अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा समय में विक्टिम पुलिस के पास जाती है। लेकिन, कानून में किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई ना होने की वजह से पुलिस भी पति के खिलाफ एक्शन नहीं ले पाती।

ट्रिपल तलाक पर SC ने केंद्र को क्या निर्देश दिए थे?

अगस्त में 5 जजों की बेंच ने 3:2 की मेजॉरिटी से कहा कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत वॉइड (शून्य), अनकॉन्स्टिट्यूशनल (असंवैधानिक) और इलीगल (गैरकानूनी) है। बेंच में शामिल दो जजों ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर 6 महीने में कानून बनाए।

SC के फैसले पर तब सरकार ने क्या कहा था?
लॉ मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद ने कहा था, "भले ही दो जजों ने कानून बनाने की राय दी है, लेकिन बेंच के मेजॉरिटी जजमेंट में तीन तलाक को असंवैधानिक बताया गया है। लिहाजा, इसके लिए कानून बनाने की जरूरत नहीं है।"

SC ने किस तलाक को खारिज किया?
तलाक-ए-बिद्दत यानी एक ही बार में तीन बार तलाक कह देना। यह हनफी पंथ को मानने वाले सुन्नी मुस्लिमों के पर्सनल लॉ का हिस्सा है। इसे सुप्रीम कोर्ट ने अनकॉन्स्टिट्यूशनल ठहराया है। इससे वॉट्सएप, ईमेल, एसएमएस, फोन, चिट्ठी जैसे अजीब तरीकों से तलाक देने पर रोक लगेगी।

ऐसा तलाकनामा लिखकर किया जा सकता है या फिर फोन से या टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी किया जा सकता है। इसके बाद अगर पुरुष को यह लगता है कि उसने जल्दबाजी में ऐसा किया, तब भी तलाक को पलटा नहीं जा सकता। तलाकशुदा जोड़ा फिर हलाला के बाद ही शादी कर सकता है। 
 

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