संजीवनी टुडे

नोटबंदी को एक साल पूरा, जानिए कितना कैशलेस हुआ भारत

संजीवनी टुडे 07-11-2017 12:09:33

For one year notebooks how much cashless India has been

नई दिल्ली। पिछले साल 8 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया और एक साल होने जा रहे हैं। बीते एक साल में विपक्ष से लेकर सरकार तक नोटबंदी की कामयाबी या कहें कि आए परिणाम को जांचने परखने और अपना निर्णय देने में लगा है। सरकार जहां इसे सफल और कारगर बताने में लगे हैं वहीं विपक्ष इस सदी का सबसे बड़ा घोटाला, आदि उपनामों से सुशोभित कर रहा है।  

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अब जब नोटबंदी के एक साल पूरे हो रहे हैं ऐसे में एक सवाल अब भी बना हुआ है कि देश कितना कैशलेस हुआ। बीते साल अक्टूबर से लेकर अगस्त तक के आंकड़े देखे तो क्रेडिट वे डेबिट कार्ड से दुकानों पर खरीदारी 51 हजार करोड़ से 71 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गयी, वहीं मोबाइल वॉलेट से लेन-देन करीब-करीब दुगना हो गया। 

जब सरकार लगातार दावे करती रही है कि नोटबंदी के बाद देश कैशलेस की ओर से तेजी से कदम बढ़ा रहा है। लेकिन रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि चलन में नोट की तादाद बढ़ी ही है। मसलन बीते साल 14 अक्टूबर को बाजार में कुल 1,23,93,150 करोड़ रुपये चलन में थे जबकि इस साल 13 अक्टूबर को ये रकम 1,31,81,190 करोड़ रुपये रही। अनुमान है कि आज भी बाजार में 95 प्रतिशत  के करीब लेन-देन नकद में होता है, जबकि बीते साल ये आंकड़ा 96-97 फीसदी के करीब था। 

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डिजिटल कार्ड, मोबाइल वॉलेट, भीम या यूपीआई जैसे माध्यम खासे इस्तेमाल में लाए जाते हैं। कार्ड को ही बात करें तो क्रेडिट और डेबिट कार्ड के जरिए प्वाइंट ऑफ सेल्स यानी पीओएस मशीन के जरिए बीते साल नोटबंदी के ठीक पहले यानी अक्टूबर में करीब 51803 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। ये रकम दिसंबर में 89180 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंची, लेकिन उसके बाद उसमें गिरावट हुई और अगस्त में ये रकम 71712 करोड़ रुपये पर आ गयी। वहीं भीम, यूपीआई व यूएसएसडी जैसे माध्मयों को मिला दे तो यहां दिसबंर में कुल लेन-देन महज 101 करोड़ रुपये का था जो अगस्त में 4156 करोड़ रुपये पर पहुंचा. हालांकि मोबाइल वॉलेट के मामले में स्थिति कार्ड की ही तरह रही. यहां बीते साल अक्टूबर में करीब 3385 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था जो जनवरी तक आते-आते 8385 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि अगस्त में ये आंकड़ा 7762 करोड़ रुपये का रहा। 


सूत्रों के अनुसार कहें या कहें कि यह स्पष्ट है कि पीएम मोदी ने नोटबंदी के बाद अपना अगला टारगेट बेनामी संपत्ति को बनाया है और इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर पूरे देश में अभियान चलाया जाएगा।  दरअसल नोटबंदी के एक साल बाद सरकार करप्शन के खिलाफ जंग को जारी रखने का मजबूत संकेत देना चाहती है। कहा जा रहा है कि अब अगर किसी जमीन के मालिकाना हक के कानूनी सबूत नहीं मिले तो बेनामी संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले सकती है। इन बेनामी संपत्तियों को भी गरीबों के लिए किसी योजना से जोड़ा जाएगा जैसे ब्लैकमनी के लिए दोबारा लाई डिस्कलोजर स्कीम के तहत राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में डाली गई थी। सरकार को उम्मीद है कि बेनामी संपत्ति के खिलाफ प्रस्तावित अभियान में कई बड़े सफेदपोश नेताओं पर गाज भी गिर सकती है। 

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