संजीवनी टुडे

जोधपुर की पद्मजा शर्मा को घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार

संजीवनी टुडे 08-07-2017 12:07:33


 

चूरू। साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में संलग्न स्थानीय प्रयास संस्थान की ओर से राजस्थान के हिंदी लेखन के क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार इस वर्ष जोधपुर निवासी डॉ. पद्मजा शर्मा को दिया जाएगा। शब्द-चित्र संग्रह ‘हंसो ना तारा’ के लिए डॉ पद्मजा को दिए जा रहे इस पुरस्कार के रूप में 51 हजार रुपए, शॉल, श्रीफल और सम्मान पत्र प्रदान किया जाएगा। 

प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण एवं सचिव कमल शर्मा ने बताया कि वर्ष 2008 से प्रारंभ वार्षिक पुरस्कार के इस साल का आयोजन आगामी सितम्बर माह में चूरू जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित है, जिसमें इस पुरस्कार के साथ ही ‘रूकमणी वर्मा युवा साहित्यकार पुरस्कार’ भी दिया जाएगा, जिसकी अभी घोषणा होनी शेष है।

हिंदी साहित्य में प्रतिष्ठित नाम है डॉ. पद्मजा शर्मा 
5 मार्च 1962 को झुंझनूं जिले के गांव बिरमी में जन्मी पद्मजा शर्मा हिंदी, इतिहास और पत्रकारिता में एम.ए. तथा हिंदी में एम.फिल. हैं। इन्होंने हिंदी और पत्रकारिता दोनों विषय में पीएच.डी. भी की है। डॉ पद्मजा की प्रारंभिक शिक्षा गांव बिरमी में तथा उच्च शिक्षा मुंबई विश्वविद्यालय तथा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर में हुई। इन्होंने पंद्रह वर्ष तक महाविद्यालयों में अध्यापन भी करवाया। इनके पति डॉ. नगेन्द्र शर्मा जोधपुर के जाने-माने न्यूरो सर्जन हैं। 

हिंदी में कविता संग्रह ‘इस जीवन के लिए’, ‘सदी के पार’, ‘हारूंगी  नहीं’, ‘मैं बोलूंगी’, ‘पहाड़ नदी फूल और प्रेम’, ‘खामोशी’, ‘जिंदगी को मैंने थामा बहुत’ तथा शब्दचित्र संग्रह ‘इस दुनिया के अगल-बगल’, ‘रमता जोगी बहता पानी’, ‘नासिर के तीन सपने’, ‘हंसो ना तारा’, ‘घर से दूर घर के लिए’ पद्मजा की उल्लेखनीय पुस्तकें हैं। लघुकथा संग्रह ‘बेटी व अन्य लघुकथाएं’ तथा आलोचना पुस्तकें ‘आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यासों का सांस्कृतिक अध्ययन’, ‘पंडित झाबरमल्ल शर्मा’, ‘समय से संवाद’ भी महत्वपूर्ण किताबें मानी जाती हैं। इनकी रचनाएं कई जगह पाठ्यक्रम में शामिल हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की लोक अदालत की सदस्य रही पद्मजा सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों में भी एक सक्रिय हस्ताक्षर हैं। इस पुरस्कार से पूर्व भी आपको कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

अब तक ख्यानाम साहित्यकारों को दिया जा चुका है यह पुरस्कार
चूरू के प्रयास संस्थान द्वारा वर्ष 2008 में शुरू किए गए घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार पुरस्कार का यह दसवां पड़ाव है। वर्ष 2008 में जोधपुर के सत्यनारायण को कहानी संग्रह ‘सितम्बर में रात’, 2009 में जोधपुर की मनीषा कुलश्रेष्ठ को कहानी संग्रह ‘कठपुतलियां’, 2010 में जयपुर के हेमंत शेष को कविता संग्रह ‘जगह जैसी जगह’, 2011 में जयपुर के रत्नकुमार सांभरिया को कहानी संग्रह ‘खेत तथा अन्य कहानियां’, 2012 में कांकरोली-राजसमंद के कमर मेवाड़ी को कहानी संग्रह ‘जिजीविषा और अन्य कहानियां’, 2013 में उदयपुर के पल्लव को आलोचना पुस्तक ‘कहानी का लोकतंत्र’, 2014 में जयपुर के भगवान अटलानी को एकांकी संग्रह ‘सपनों की सौगात, 2015 में उदयपुर के माधव हाड़ा को आलोचना पुस्तक ‘सीढ़ियां चढ़ता मीडिया’ तथा 2016 में बीकानेर के नंदकिशोर आचार्य को कविता पुस्तक ‘आकाश भटका हुआ’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया। इसी कड़ी के दसवें पड़ाव के रूप में वर्ष 2017 के लिए यह पुरस्कार जोधपुर की पद्मजा शर्मा को उनके शब्दचित्र संग्रह ‘हंसो ना तारा’ के लिए दिया जाएगा।

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