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74th Independence Day/PM Modi LIVE: 'भारत ने आजादी की जंग में कमी और नमी नहीं आने दी'

संजीवनी टुडे 15-08-2020 08:17:45

प्रधानमंत्री ने इस पावन पर्व पर, सभी को बधाई और बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी और कहा कि उन सभी भारतीयों के योगदान को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जो हमारी स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं और हमें सुरक्षित रखते हैं।


नई दिल्ली। देश आज 74वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी अभी तक देश को लाल किले से 6 बार संबोधित कर चुके हैं। ये उनका लगातार 7वां भाषण है। पीएम मोदी ने 2014 में पहली बार देश को लाल किले से संबोधित किया था। प्रधानमंत्री लाल किले से क्या बोलते हैं, क्या घोषणाएं करते हैं, इस पर सबकी नजरें हैं। भाषण से पहले पीएम मोदी ने तिरंगा फहराया। 

राष्ट्रीय ध्वज फहराने के तुरंत बाद ही पीएम को 'राष्ट्रीय-गार्ड' नेशनल-सैल्यूट दिया गया। राष्ट्रीय-गार्ड में तीनों सेनाओं और दिल्ली पुलिस के कुल 32 जवान हैं। थलसेना के ग्रेनेडियर रेजीमेंटल सेंटर के बैंड ने राष्ट्रगान की धुन बजाई. इस बैंड का नेतृत्व सूबेदार-मेजर अब्दुल गनी ने किया. इसके तुंरत बाद 21 तोपों की सलामी दी गई। थलसेना की फील्ड-बैटरी ने ये सलामी दी। इसके बाद प्रधानमंत्री अब देश को संबोधित कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने इस पावन पर्व पर, सभी को बधाई और बहुत-बहुत शुभकामनाएं दी और कहा कि उन सभी भारतीयों के योगदान को मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं जो हमारी स्वतंत्रता की रक्षा करते हैं और हमें सुरक्षित रखते हैं। 

74th Independence DayPrime Minister Modi set a new record for the 7th consecutive time by hoisting the tricolor at the Red Fort

पीएम ने कहा अगले वर्ष हम अपनी आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश कर जाएंगे। एक बहुत बड़ा पर्व हमारे सामने है। कोरोना के इस असाधारण समय में, सेवा परमो धर्म: की भावना के साथ, अपने जीवन की परवाह किए बिना हमारे डॉक्टर्स, नर्से, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस कर्मी, सफाई कर्मचारी, पुलिसकर्मी, सेवाकर्मी, अनेकों लोग, चौबीसों घंटे लगातार काम कर रहे हैं। 

इस अवसर PM ने कहा कि विस्तारवाद की सोच ने सिर्फ कुछ देशों को गुलाम बनाकर ही नहीं छोड़ा, बात वही पर खत्म नहीं हुई। भीषण युद्धों और भयानकता के बीच भी भारत ने आजादी की जंग में कमी और नमी नहीं आने दी। गुलामी का कोई कालखंड ऐसा नहीं था जब हिंदुस्तान में किसी कोने में आजादी के लिए प्रयास नहीं हुआ हो, प्राण-अर्पण नहीं हुआ हो। 

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