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केंद्र सरकार के इस 'आर्थिक विकास फंड' से 30 लाख भारतीयों को मिल सकती है आजीविका

संजीवनी टुडे 26-05-2020 21:46:21

कोरोना वैश्विक महामारी के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।


नई दिल्ली। कोरोना वैश्विक महामारी के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। भारत ने 24 मार्च 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा भी की, जो अभी भी जारी है। जिसमे फल, सब्जियां और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती साबित हुई। इसी बीच डेयरी कोऑपरेटिव्स की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) की आवश्यकता और डेयरी प्रसंस्करण में निजी क्षेत्र के निवेश के लिए एक अलग कोष बनाने की घोषणा हुई है, ब्याज अनुदान भी एलान किया गया है। ये सब घोषणाएं तब हुई हैं जब सहकारी समितियों ने लॉकडाउन के बीच दूध और उत्पादों की निर्बाध खरीद और वितरण को सुनिश्चित किया है।

लॉक डाउन के दौरान निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए 15,000 करोड़ रुपये का फंड आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। डेयरी सहकारी समितियों का एक शीर्ष निकाय राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के अनुसार लॉकडाउन अवधि के दौरान एक मुख्य चुनौती अपने उत्पादक सदस्यों के साथ-साथ उन किसानों से दूध की खरीद में वृद्धि है, जो पहले असंगठित खरीदारों को दूध की आपूर्ति कर रहे थे। इन निजी और असंगठित खरीदारों ने COVID-19 के कारण खरीद बिक्री पर रोक, दूध खरीद की छुट्टी की घोषणा या अपने संचालन को ही कम कर दिया। यह स्थिति मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, कैटरिंग क्षेत्र में उपभोक्ता मांग में कमी, मिठाई की दुकानों और चाय स्टालों को बंद करने की वजह से पैदा हुई।

गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (GCMMF/अमूल), कर्नाटक सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ (नंदिनी), तमिलनाडु सहकारी दुग्ध उत्पादक महासंघ (Aavin), मदर डेयरी जैसी डेयरी सहकारी समितियों को उपभोक्ताओं तक दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी सप्लाई चेन को संशोधित करना पड़ा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2019 के दौरान प्रमुख सहकारी समितियों द्वारा दूध की खरीद 510 लाख लीटर प्रति दिन (एलएलपीडी) थी, जो 14 अप्रैल 2020 को बढ़कर 560 एलएलपीडी हो गई, जो 'कमजोर' सीजन होने के बावजूद 8% से अधिक है। हालांकि दूध की खरीद 1-15 मई, 2020 की अवधि के दौरान 510 एलएलपीडी तक सीमित है।

इस बीच, सहकारी समितियों द्वारा दूध की बिक्री फरवरी 2020 में 360 एलएलपीडी से घटाकर 15 मई 2020 को 339 एलएलपीडी हो गई। खरीद और बिक्री के बीच कुल अंतर 170 से 180 एलएलपीडी है, जो अधिकांश सहकारी समितियां स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP) में परिवर्तित हो रही हैं। 15 मार्च 2020 को सहकारी समितियों का एसएमपी स्टॉक 70,000 टन से दोगुना हो कर 15 मई 2020 को 1.45 लाख टन हो गया। बता दे, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज की तीसरी किश्त के बारे में जानकारी देते हुए आत्मनिर्भर-भारत अभियान में दो महत्वपूर्ण उपायों की घोषणा की। डेयरी क्षेत्र के लिए कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज अनुदान और 15,000 करोड़ रुपये के पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF) का निर्माण, जिससे डेयरी प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और पशु आहार जैसे क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना है।

सहकारी समितियों और दुग्ध उत्पादक कंपनियों को 2020-21 के दौरान बैंकों से लिए गए कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज अनुदान दिया जाएगा। इससे सरप्लस दूध से निपटने के लिए कार्यशील पूंजी संकट को कम करने में मदद मिलेगी और सहकारी समितियों और साथ ही एमपीसी द्वारा किसानों को समय पर भुगतान को सक्षम किया जाएगा। सीतारमण के अनुसार, इस योजना से 5,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त तरलता होगी, जिससे दो करोड़ डेयरी किसानों को लाभ होगा। देश की सबसे बड़ी डेयरी सहकारी समिति गुजरात सहकारी दूध विपणन महासंघ (GCMMF) के निदेशक आरएस सोढ़ी के अनुसार, 4% ब्याज पर सहकारी समितियों के लिए एक ब्याज सबवेंशन स्कीम है।

वित्त मंत्री सीतारमण की दूसरी घोषणा एएचआईडीएफ का निर्माण थी जो डेयरी प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और पशु चारा बुनियादी ढांचे में निजी निवेश को बढ़ावा देगी। इस फंड से विशेष रूप से आला डेयरी उत्पादों के निर्यात के लिए डेयरी संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहित करने की उम्मीद है। देश में संगठित डेयरी उद्योग की वृद्धि असमान रही है और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां डेयरी क्षेत्र में निजी निवेश की संभावना है।

एनडीडीबी के चेयरमैन दिलीप रथ के अनुसार, यह फंड पहली बार डेयरी प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और पशु चारा बुनियादी ढांचे में निजी निवेश को बढ़ावा देगा। वही, जीसीएमएमएफ के सोढ़ी के अनुसार, इस कोष से डेयरी क्षेत्र में 4-5 करोड़ लीटर अतिरिक्त क्षमता हो सकती है। क्षमता में यह वृद्धि ग्रामीण भारत में लगभग 30 लाख लोगों को आजीविका प्रदान करेगी। पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF) में 11,184 करोड़ रुपये का वर्तमान परिव्यय है और डेयरी सहकारी समितियों के प्रसंस्करण अवसंरचना के आधुनिकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है। निधि में पशुपालन विभाग (DAHD) द्वारा 1167 करोड़ रुपये का ब्याज अनुदान (2.5% प्रतिवर्ष) वित्त वर्ष 2018-19 से 2030-31 तक दिया जाएगा, जिसमें 2031-32 की पहली तिमाही का स्पिल ओवर भी शामिल है।

कोरोना वैश्विक महामारी ने दुनिया के अधिकांश देशों को लॉकडाउन के लिए मजबूर किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने $19 बिलियन के कृषि आपदा सहायता पैकेज की घोषणा की, जिसमें डेयरी क्षेत्र भी शामिल है। जिसको लॉकडाउन और सप्लाई चेन टूटने के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। यूएस के नेशनल मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन के अनुसार कृषि आपदा सहायता पैकेज में उत्पादकों के लिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण के लिए डेयरी उत्पादों की प्रति माह कम से कम $ 100 मिलियन की खरीद भी शामिल है। COVID19 महामारी के प्रभाव से निपटने के लिए यूरोपीय आयोग (ईसी) ने स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी), मक्खन और चीज के लिए निजी भंडारण सहायता (पीएसए) के लिए 30 मिलियन यूरो डॉलर की योजना घोषित की है, जिसे महामारी के प्रभाव से निपटने के लिए पहले छोटे कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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