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मकर संक्रांति पर गंगासागर में 15 लाख लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

संजीवनी टुडे 14-01-2021 20:49:36

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में स्थित मशहूर गंगासागर में गुरुवार को मकर संक्रांति के दिन कम से कम 15 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई।


कोलकाता। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में स्थित मशहूर गंगासागर में गुरुवार को मकर संक्रांति के दिन कम से कम 15 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। गुरुवार शाम दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने प्रेस को बताया कि सागर तट पर पहुंचे तीर्थ यात्रियों की कोरोना जांच की गई थी। कोई भी व्यक्ति पॉजिटिव नहीं मिला है, जो राहत की बात है।

इस वर्ष कोराेना संकट के चलते यातायात के संसाधन कम थे। इसलिए इस बार तीर्थ यात्रियों की भीड़ भी कम हुई। हर साल यहां 30 से 35 लाख लोग पुण्य स्नान करने वालों की संख्या 15 लाख ही हो सकी। राज्य के पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने बताया है कि बुधवार देर शाम तक आठ लाख के गरीब लोग सागर तट पर पहुंचे थे, जिन्होंने गुरुवार सुबह आस्था की डुबकी लगाई है। सुबह 6:06 से शुभ मुहूर्त की शुरुआत हुई है जो अगले दिन यानी शुक्रवार को सुबह 6:02 बजे तक रहेगी।पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती महाराज ने सुबह 7:00 बजे गंगासागर में शाही स्नान किया है। 

कपिल मुनि आश्रम के महंत ज्ञानदास ने बताया कि परंपरा के मुताबिक गंगा सागर में डुबकी लगाने के बाद लोग कपिल मुनि मंदिर में पूजा करते हैं। इसके लिए विशेष व्यवस्था की गई है। सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की है। सभी श्रद्धालुओं का कोरोना टेस्ट भी करवाया गया। 

हालांकि गुरुवार सुबह सागर तट पर आस्था की डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं के बीच शारीरिक दूरी का पालन होता नहीं दिखा। भीड़ पर निगरानी के लिए प्रशासन ने ड्रोन का इस्तेमाल किया। नेवी और तटरक्षक बल के विशेष जहाज भी सागर तट से थोड़ी दूरी पर तैनात रहे।

मान्यता है कि त्रेता युग में महर्षि भागीरथ के तप से प्रसन्न होकर राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मोक्ष देने के लिए मां गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं और यही सागर तट पर मौजूद कपिल मुनि आश्रम के पास राजा सगर के पुत्रों के अवशेषों को छूती हुई सागर में समाहित हो गई थीं जिसके बाद राजा सगर के सभी पुत्रों को मोक्ष मिला था। उसके बाद से ही सागर तट पर हर साल मकर संक्रांति के उसी शुभ मुहूर्त में देश-दुनिया से लाखो पुण्यार्थी मोक्ष की चाह में आस्था की डुबकी लगाने आते हैं। इसलिए कहते हैं सारे तीरथ बार बार गंगासागर एक बार।

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