संजीवनी टुडे

ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से 1.5 लाख लोगों ने लिया टेलीकंसलटेशन

संजीवनी टुडे 09-08-2020 22:12:38

स्वास्थ्य मंत्रालय के टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी द्वारा 1.5 लाख टेली-कंसलटेशन पूरा किए जाने से संबंधित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।


नई दिल्ली। केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रविवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी द्वारा 1.5 लाख टेली-कंसलटेशन पूरा किए जाने से संबंधित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे उपस्थित थे, जबकि तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी. विजय भास्कर वर्चुअल रूप से उपस्थित हुए। यह सेवा पिछले साल नवंबर में शुरू की गई थी, जिसमें ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी 23 राज्यों में टेली-कंसलटेशन के लिए लागू किया गया था और अब अन्य राज्य इसे लागू करने की प्रक्रिया में है।

इस मौके पर डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के दिशा-निर्देश से डिजिटल इंडिया के विजन का कार्यान्वयन ब्रॉडबैंड और मोबाइल फोन के माध्यम से आयुष्मान भारत – स्वास्थ्य और आरोग्य केन्द्रों में शुरू किया है। टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के साथ यह कोविड-19 महामारी के दौरान भी काफी उपयोगी सिद्ध हुई है। इस मौके पर अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि यह ग्रामीण क्षेत्रों और दूर-दराज के लोगों के लिए यह ‘गेमचेंजर’ साबित हुआ है।

 बात दें कि ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म ने दो तरह की टेली-मेडिसिन सेवाएं प्रदान की हैं जैसे कि डॉक्टर से डॉक्टर (ई-संजीवनी) और रोगियों से डॉक्टर (ई-संजीवनी ओपीडी) टेली-कंसलटेशंस। इनमें से पहले का कार्यान्वयन आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एंव आरोग्य केन्द्र कार्यक्रम के अंतर्गत किया जा रहा है। अब तक देश भर में कुल 1,58,000 टेली-कंसलटेशन दी गईं, जिनमें से 67,000 परामर्श आयुष्मान भारत – स्वास्थ्य और आरोग्य केन्द्रों में ई-संजीवनी के माध्यम से दी गईं और ई-संजीवनी ओपीडी माध्यम से डॉक्टरों ने 91,000 रोगियों को परामर्श दिया गया। इस समय औसतन लगभग 5,000 परामर्श प्रतिदिन ई-संजीवनी और ई-संजीवनी ओपीडी के माध्यम से दिए जा रहे हैं। टेली-मेडिसिन प्लेटफॉर्म पर 40 तरह की ओपीडी सेवाएं चल रही हैं। इनमें से अधिकांश विशेषज्ञ ओपीडी हैं, जो स्त्री रोग, मनोरोग, त्वचा, आंख-नाक-कान, नेत्ररोग, एड्स एचआईवी रोगियों के लिए एआरटी, गैर-संचारी रोग हैं।

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