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वर्ष 2022 तक ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होंगे डेढ़ लाख हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर : कोविंद

संजीवनी टुडे 20-06-2019 14:00:36

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि देश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचाने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है और वर्ष 2022 तक सभी ग्रामीण अंचलों में लगभग डेढ़ लाख ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ स्थापित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।


नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि देश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचाने के लिए उनकी सरकार प्रतिबद्ध है और वर्ष 2022 तक सभी ग्रामीण अंचलों में लगभग डेढ़ लाख ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ स्थापित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

संसद के केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में ग्रामीण इलाकों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2022 तक सभी ग्रामीण अंचलों में लगभग डेढ़ लाख ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ स्थापित किए जाने का लक्ष्य है। अब तक लगभग 18 हजार ऐसे सेंटर शुरू किए जा चुके हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि इलाज के खर्च से गरीब परिवार आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। उन्हें इस संकट से बचाने के लिए 50 करोड़ गरीबों को ‘स्वास्थ्य सुरक्षा कवच’ प्रदान करने वाली विश्व की सबसे बड़ी हेल्थ केयर स्कीम ‘आयुष्मान भारत योजना’ लागू की गई है। 

इसके तहत, अब तक लगभग 26 लाख गरीब मरीजों को अस्पताल में इलाज की सुविधा दी जा चुकी है। सस्ती दरों पर दवा उपलब्ध कराने के लिए 5,300 ‘जन औषधि केंद्र’ भी खोले जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि सुदूर इलाकों में भी लोगों को जन औषधि केंद्रों से सस्ती दरों पर दवाइयां मिल सकें।

कोविंद ने कहा कि वर्ष 2022 जनजातीय समुदायों से हमारे अन्य देशवासी बहुत कुछ सीख सकते हैं। पर्यावरण एवं प्रकृति के अनुकूल जीवन-यापन करने वाले आदिवासी भाई-बहन विकास और परंपरा का सुंदर संतुलन बनाए रखते हैं। नए भारत में जनजातीय समुदायों के हित में, समावेशी तथा संवेदनशील व्यवस्था के निर्माण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। 

जनजातीय क्षेत्रों का संपूर्ण विकास हो, इसके लिए अनेक योजनाएं कार्यान्वित की गई है। वन्य क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं को ‘पढ़ाई से लेकर कमाई तक’ की सुविधाएं उपलब्ध कराने के कार्य प्रगति पर हैं। आदिवासी बहुल इलाकों में, बच्चों के लिए ‘एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल’ बनाए जा रहे हैं। साथ ही वन-धन केंद्रों के माध्यम से वन-उपज में वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग पर बल दिया जा रहा है।

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