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भारतीय रेल जनता की संपत्ति, इसे बेचना दुर्भाग्यपूर्णः माथुर

संजीवनी टुडे 10-08-2020 08:52:33

भारतीय रेल जनता की संपत्ति, इसे बेचना दुर्भाग्यपूर्ण


गुना।  रेलवे निजीकरण के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ रविवार को ऑनलाइन हुआ। रेल निजी करण विरोधी जन अभियान की शुरुआत आनंद मोहन माथुर ने आंदोलन के फेसबुक पेज पर लाइव कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल जनता की संपत्ति है इसे बेचना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसका विरोध पूरी ताकत के साथ होना चाहिए। माथुर ने सबसे पहले इस अभियान में अपने हस्ताक्षर सम्मिलित कर अभियान की शुरुआत की। कार्यक्रम में फेसबुक लाइव के माध्यम से ही आदिवासियों के बीच आंदोलन को नेतृत्व दे रहीं मेघा पाटेकर ने कहा कि देश के गरीब आदमी का हक मारकर अमीरों को मालदार बनाने की जो सरकार की नीति है यह उसी का परिणाम है कि वह आज जिन स्टेशनों पर चाय बेचा करते थे अब उन्हीं स्टेशनों और ट्रेनों को बेचने पर उतारू हो गए हैं। शिक्षा स्वास्थ्य तमाम सुविधाओं को निजी कंपनियों के हाथ में दे रहे हैं।

रेलवे के निजीकरण के विरोध में चल रहे इस अभियान को मेघा पाटेकर ने भी अपने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया। इसके बाद कपूरथला में रेलवे कर्मचारियों के चल रहे आंदोलन को नेतृत्व दे रहे अमरीक सिंह ने कहा कि जिस तरह अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया गया था। आज के समय में निजी करण भारत छोड़ो का नारा लगाने की जरूरत है। रेलवे के निजी करण से लाखों लाख लोग बेरोजगार हो रहे हैं। नए नौजवानों को रोजगार मिलना तो दूर पुराने लगे हुए कर्मचारियों की छटनी करते हुए उन्हें सडक़ पर ला दिया। 

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