संजीवनी टुडे

यदुवंशी शिफ्ट हो रहे भाजपा में, गठबंधन के चेहरे पर चिंता की लकीरें

संजीवनी टुडे 05-05-2019 14:38:34


गाजीपुर। अंतिम चरण में 19 मई को होने वाले मतदान के लिए गाजीपुर में समीकरण बदलते दिख रहे हैं। इससे जहां भाजपा नेता खुश हैं, वहीं विपक्ष के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच रही हैं। इसका कारण है यादव मतदाताओं का गठबंधन के बसपा उम्मीदवार अफजाल अंसारी से मोह भंग होना। स्थितियां यह हैं कि सपा व बसपा के कई बड़े यादव नेता अब भाजपा के पाले में आ गये हैं। सपा समर्थकों में एक नारा चल रहा है कि 2009 में सपा की जीत का कर्ज भाजपा उम्मीदवार मनोज सिन्हा को इस बार जिताकर उतारना है।

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दरअसल 2009 में भी अफजाल अंसारी गाजीपुर से बसपा के उम्मीदवार थे। उस समय सपा से राधे मोहन सिंह और भाजपा से प्रभुनाथ चुनाव मैदान में थे। अंतिम समय में भाजपा के बहुतेरे वोटर अफजाल अंसारी के जीतने की आशंका के कारण सपा उम्मीदवार की तरफ शिफ्ट कर गये थे। इससे अफजाल की हार हुई थी और राधे मोहन सिंह 69309 मत से जीत गये थे। 

उस समय राधे मोहन सिंह को 3,79,233 मत मिले थे, जबकि अफजाल अंसारी को 3,09,924 वोट ही मिल पाये थे। भाजपा उम्मीदवार प्रभुनाथ को मात्र 21,669 मत मिले थे। इस परिणाम से यह माना गया कि उस समय भाजपा के मत भी सपा की ओर शिफ्ट हुए थे, इसलिए इस बार यादव बिरादरी व सपा के कुछ समर्थक यही मानकर चल रहे हैं कि इस बार उस 'कर्ज' काे उतार देना है। इसका कारण यह भी है कि 2004 में अफजाल अंसारी सपा में थे, जबकि 2009 में पाला बदलकर बसपा में चले गये थे और उन्हें हार सामना करना पड़ा था।

इसके पूर्व 2004 के लोकसभा चुनाव में हिंसक घटनाओं व लगातार बढ़ रहे अपराध के ग्राफ को देखते हुए जनपद में अंसारी बंधुओं के खिलाफ माहौल बना था। इसको लेकर समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों से अफजाल अंसारी को रोकने के लिए सहयोग की विशेष अपील की थी। 

इसके बावजूद भाजपा उम्मीदवार प्रभुनाथ चौहान को महज 21,669 मत प्राप्त हुए। जिस समाजवादी पार्टी के मूल कार्यकर्ताओं ने 2009 में बहुजन समाज पार्टी के वर्तमान उम्मीदवार के खिलाफ भाजपा तक से समर्थन मांगा था, वे इस चुनाव में मौन धारण कर चुके हैं या प्रचार अभियान से दूर हैं। गांवों में भाजपा उम्मीदवार व केंद्रीय राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के विकास कार्यों की चर्चा करके इसका फायदा उठाने में भाजपा नेता भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं।

इस सम्बन्ध में बात करने पर कादिर शाहपुर के मनोज यादव, सोनहरा के अनिल यादव, मोलनापुर के पारस यादव, तालगांव के रामकेवल यादव, खेताबपुर के दिनेश यादव ने कहा कि हम किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं हैं, लेकिन हमें यह तय करना होगा कि हम विकास के साथ रहें या जातिवाद के साथ। निश्चित रूप से विकास के नाम पर मनोज सिन्हा को सहयोग देने की जिम्मेदारी बनती है।

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जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से सपा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ता लालजी यादव, आशीष यादव, सोमल यादव, सोमनाथ यादव, प्रभाकर यादव ने कहा कि सपा की परम्परागत सीट पता नहीं किस मजबूरी में बसपा को 'दान' दे दी गयी। जिस व्यक्ति के खिलाफ 2009 में भाजपा के कार्यकर्ताओं ने पार्टीगत दीवार तोड़कर हमारा साथ दिया तो इस चुनाव में 'विकास' और 'अपराध' की जंग में विकास का साथ देना ही आज का तकाजा है। सपा कार्यकर्ताओं के इस नारे से गठबंधन के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखना स्वाभाविक है।

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