संजीवनी टुडे

कम मतदान से राजनीतिक दलों के धड़कने बढ़ी, पांचों सीटें जीतने के दावे

संजीवनी टुडे 12-04-2019 15:24:31


देहरादून। उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव के मतदान का पहला चरण सम्पन्न हो गया है। लगभग 58 प्रतिशत मतदान हुआ है जो 2014 की तुलना में लगभग चार प्रतिशत कम है। ऐसा नहीं है कि चुनाव के प्रति जागरूकता में कहीं कोई कमी थी, लेकिन कई क्षेत्रों में लोगों द्वारा नाराजगी के कारण वोट न देना, शहरी क्षेत्र के मतदाताओं का अपेक्षाकृत कम निकलना तथा दलों के कार्यकर्ताओं का विशेष प्रयास न करना मतों की कमी का प्रमुख कारण माना जा रहा है। हर दल कम मतदान को अपने पक्ष में बता रहा है।

मतदान के प्रति जागरूकता के सारे प्रयासों के बावजूद मतदान प्रतिशत का पिछले चुनाव के मुकाबले न बढ़ना चुनाव आयोग के लिए चिन्ता की बात हो सकता है। वैसे मतदान के शुरुआती घण्टों में लगभग सभी जिलों में बूथों पर वोटरों की लम्बी लाइनें दिखी थीं, लेकिन दोपहर होते-होते पोलिंग स्टेशन खाली हो गए इक्का-दुक्का मतदाता ही बूथ पर आते दिखे, इसी का नतीजा है कि मतदान 60 प्रतिशत भी पार नहीं हो सका। 

2014 के मुकाबले इस बार कम हुए मतदान पर बात करते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या ने बताया कि पोस्टल बैलट, पुलिस और कर्मचारियों के वोटों का प्रतिशत अंतिम आंकड़ों को बढ़ाएगा, परअभी उन कारणों को बता पाना संभव नही है कि क्यों मतदान कुछ कम हुआ। वैसे उत्तराखंड में हमेशा ही राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम मतदान होता रहा है। इसके कई कारण है। युवाओं का नौकरी और पढ़ने के लिए बाहर जाना, मतदान केन्द्रों की दूरी के कारण बुजुर्गों का कम पहुंच पाना तथा सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सुविधाओं के अभाव में लोगों का घरों से न निकलना जैसे कारण इस बात के संकेत है कि यहां मतदान प्रायः कम होता है। 2014 के चुनाव में राष्ट्रीय मतदान प्रतिशत 66 फीसदी था जबकि उत्तराखण्ड में महज 62 फीसदी। ऐसा ही हाल 2009 के लोकसभा चुनावों में भी देखने को मिला था। तमाम प्रयासों के बावजूद भी प्रदेश में वोटिंग प्रतिशत नहीं बढ़ पा रहा है।

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उत्तराखंड में कुल मतदाताओं की संख्या 78 लाख 56 हजार 268 है जिनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 40 लाख 53 हजार 944 तथा महिलाओं की संख्या 37 लाख 11 हजार 220 है। इतना ही नहीं थर्ड जेंडर (जो स्त्री है न पुरुष) की संख्या लगभग 259 है। इसी प्रकार सर्विस वोटर जो पोस्टल बैलेट से मतदान करते हैं उनकी संख्या 90 हजार 845 है। इन सबके लिए प्रदेश में 11 हजार 235 बूथ बनाये गये थे जिन पर मतदान हुआ। लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों ने अपने क्षेत्र में विकास न होने के कारण मतदान का बहिष्कार किया और शासन-प्रशासन के मनाने पर भी नहीं माने जिसके कारण भी मतदान में थोड़ी कमी आयी। 

चुनाव आयोग के दिये गये आंकड़ों के अनुसार टिहरी में 54.38 प्रतिशत, गढ़वाल में 49.89 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 53.38 प्रतिशत, नैनीताल में 66.61 प्रतिशत तथा हरिद्वार में 66.24 प्रतिशत मतदान हुआ है। चुनाव आयोग मानता है कि पिछले चुनाव की तुलना में इस वर्ष कम मतदान होना मतदाताओं की नाराजगी और मतदान के प्रति उनकी बेरूखी का प्रतीक है। 

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इसी को लेकर अब सारे दल अपनी-अपनी दृष्टि से इस कम मतदान का आंकलन कर रहे हैं और मानते हैं कि यह मतदान उनके पक्ष में है। भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नरेश बंसल का मानना है कि यह मतदान भाजपा के पक्ष में हुआ है। भाजपा पांचों संसदीय सीटें भारी मतों से जितेगी जबकि कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी का कहना है कि कम मतदान होना कांग्रेस के पक्ष में है और वह दो से तीन सीटें जीत रही है। किसका अनुमान सच है यह तो 23 मई को परिणाम निकलने के बाद ही पता चलेगा लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद राजनीतिक दलों के दावे उनकी बैचेनी के प्रतीक है। 
 

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