संजीवनी टुडे

खुद की जीत पर भरोसा न करके दिग्गजों को सबक सिखाने में जुटे निर्दलीय

संजीवनी टुडे 12-04-2019 15:41:20


मिश्राहमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी लोकसभा क्षेत्र के चुनावी महासमर में 10 निर्दलीय उम्मीदवार राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के समीकरण बिगाड़ने में जुटे हैं। उन्हें अपनी जीत पर तो कोई भरोसा तो नहीं है लेकिन ये प्रमुख राजनैतिक दलों को सीधे तौर पर भारी नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अबकी चुनावी दंगल में गठबंधन दल के उम्मीदवार को छोड़ ज्यादातर उम्मीदवार इसी संसदीय क्षेत्र के रहने वाले हैं। गर्मी का पारा चढ़ते ही अब यहां चुनावी घमासान भी शुरू हो चुका है।

बुन्देलखण्ड की वीरभूमि हमीरपुर, महोबा, तिंदवारी संसदीय क्षेत्र के सत्रहवीं लोकसभा चुनाव के लिये प्रमुख राजनैतिक दलों समेत डेढ़ दर्जन उम्मीदवारों ने नामांकन किया था। इनमें जांच के दौरान चार नामांकन पत्र रद्द होने के बाद अब 14 उम्मीदवार चुनावी महासमर में हैं जिनमें 10 उम्मीदवार निर्दलीय हैं। भाजपा के सांसद पुष्पेन्द्र सिंह चंदेल यहां की सीट से दोबारा किस्मत आजमा रहे हैं। ये संसदीय क्षेत्र के महोबा के रहने वाले है। कांग्रेस के उम्मीदवार प्रीतम सिंह हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र के मूल निवासी हैं और तीसरी बार चुनाव दंगल में दो-दो हाथ करने आये हैं।भाजपा ने 2007 में हमीरपुर-महोबा संसदीय क्षेत्र से प्रीतम सिंह को चुनावी महासमर में उतारा था लेकिन वह पार्टी की लुटिया ही डुबो बैठे। चुनाव में उनकी जमानत तक जब्त हो गयी थी।
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रीतम सिंह ने भाजपा छोड़ कांग्रेस में इन्ट्री मारी और लोकसभा चुनाव के लिये कांग्रेस के टिकट से किस्मत आजमाई लेकिन उन्हें दोबारा पराजय का मुंह देखना पड़ा। इस बार फिर कांग्रेस ने प्रीतम सिंह पर दांव लगाया है लेकिन चुनावी महासमर में निर्दलीय उम्मीदवारों के कारण इनके जातीय समीकरण बिगड़ रहे हैं। एक नहीं पूरे दस उम्मीदवारों ने निर्दलीय रूप से चुनावी दंगल में हुंकार भरी है जो कांग्रेस के अलावा बसपा-सपा गठबंधन के उम्मीदवार को भारी नुकसान पहुंचाने में पसीना बहा रहे हैं।
निर्दलीय उम्मीदवारों में सबसे ताकतवर संजय साहू हैं। वह पूर्व मंत्री सिद्ध गोपाल साहू के भाई हैं। ये एक बार विधायक रह चुके हैं और अब मायावती को सबक सिखाने के लिये ही चुनाव मैदान में आये हैं। शुरू में इन्हें ही उम्मीदवार बनाने का फैसला हुआ था लेकिन मायावती ने बांदा के रहने वाले दिलीप सिंह को हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय क्षेत्र से उम्मीदवार घोषित कर दिया। संजय साहू इस फैसले के खिलाफ चुनावी महासमर में बागी हो गये हैं। संजय साहू महोबा के कबरई के रहने वाले हैं। वह धनबल के साथ ही अपने क्षेत्र में प्रभाव रखते हैं। इनके चुनावी दंगल में आने से बसपा-सपा गठबंधन के उम्मीदवार दिलीप सिंह को भी सीधे तौर पर भारी नुकसान पहुंच रहा है।गठबंधन के उम्मीदवार दिलीप सिंह किसी जमाने में हमीरपुर नगर के चौरादेवी मंदिर के पास रहते थे। वह आर्थिक रूप से कमजोर थे लेकिन मायावती सरकार में रहे कबीना मंत्री बाबू सिंह के करीबी हो गये थे। मौजूदा में इनकी गिनती धनकुबेरों में होती है। उन्होंने इस संसदीय क्षेत्र में चुनाव लड़ने के लिये पिछले दो सालों से प्रचार-प्रसार किया है। करोड़ों रुपये सिर्फ उनके प्रचार-प्रसार की होर्डिंग्स, वाल पेंटिंग में ही खर्च हो चुके हैं। मायावती ने इन्हें लोकसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया था मगर कुछ ही महीने बाद इन्हें हटाकर लोकसभा क्षेत्र प्रभारी का दायित्व संजय साहू को दे दिया गया था। इसके बाद दिलीप सिंह को ही ऐन वक्त पर चुनाव महासमर में गठबंधन का उम्मीदवार बना दिया गया। अब ये पूरे संसदीय क्षेत्र में लग्जरी गाड़ी से घूम रहे हैं। इसलिए संजय साहू बागी होकर चुनाव मैदान में हैं।

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पिछले चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने झटके हैं दस फीसद मत

हमीरपुर सोलहवीं लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों ने दस फीसद से अधिक मत हासिल किये थे। वर्ष 2014 के आम चुनाव में प्रमुख दलों के अलावा नौ उम्मीदवारों ने निर्दलीय होकर चुनाव लड़ा था। निर्दलीय उम्मीदवारों में अनिल कुमार 4860, कैलाश निषाद 1756, रमेश प्रजापति 2981, राम सजीवन 2955, विवेक कुमार 5749, श्रीपाल 3435, किरन 4079, प्रवेश कुमार 4314 व श्रीमती विमलेश के खाते में 23137 मत आये थे। इसके अलावा 8589 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। निर्दलियों व नोटा के मतों को मिलाकर 91310 मतों का आंकड़ा पहुंचता है। प्रमुख दलों में भाजपा के खाते में 453884 मत आये वहीं सपा को 187096 व बसपा को 176356 मत मिले थे। 78229 मत पाकर चौथे स्थान पर रही कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई थी। यदि ये मत कांग्रेस के खाते में आ जाते तो कांग्रेस की जमानत जब्त होने से बच सकती थी। कांग्रेस के उम्मीदवतम सिंह को उन्हीं के गढ़ में निर्दलीय उम्मीदवार श्रीमती विमलेश ने भारी नुकसान पहुंचाया था। प्रीतम सिंह को अपने ही क्षेत्र राठ में सिर्फ 28601 मत मिले थे। उनके क्षेत्र में 3648 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। कांग्रेस उम्मीदवार प्रीतम सिंह सोलहवीं लोकसभा चुनाव में हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र से 13360 मत ही हासिल कर पाये थे। निर्दलीय विमलेश ने 4336 मत झटके थे। 2318 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।

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1996 के चुनावी रण में लड़े थे 41 उम्मीदवार
हमीरपुर-महोबा संसदीय क्षेत्र से 1996 के आम चुनाव में 41 उम्मीदवारों ने किस्मत आजमाई थी जिसमें 36 उम्मीदवार निर्दलीय थे। इन तीन दर्जन निर्दलियों ने प्रमुख दलों के परम्परागत मतों में सेंधमारी कर भारी नुकसान पहुंचाया था जिसके कारण यहां की सीट पर भाजपा का कमल खिला था।

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