संजीवनी टुडे

झारखंड में महागठबंधन टूटा, बिखराव का फायदा एनडीए को

संजीवनी टुडे 08-04-2019 19:14:59


रांची। लोकसभा चुनाव के लिए झारखंड में भारतीय जनता पार्टी को चुनौती देने के लिए बना विपक्षी महागठबंधन बिखर गया है। महागठबंधन के दो घटक कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) चतरा और पलामू लोकसभा सीट को लेकर आमने-सामने हैं। राजद के बाद अब कांग्रेस ने भी चतरा लोकसभा सीट से अपना उम्‍मीदवार खड़ा कर दिया है। गठबंधन के तहत राजद को यहां सिर्फ पलामू सीट ही दी गई है। इसी बीच चतरा लोकसभा सीट से राजद प्रत्‍याशी सुभाष यादव और कांग्रेस के बरही विधायक मनोज यादव ने चतरा से पर्चा भरा है।

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विपक्षी महागठबंधन ने सीट शेयरिंग फार्मूले के तहत कांग्रेस को सात, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को चार, झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) को दो और राजद को एक सीट मिली थी । राजद के खाते में पलामू सीट गयी थी लेकिन राजद पलामू के साथ चतरा सीट पर अड़ा रहा और अंतत: दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी। राजद ने चतरा से सुभाष यादव और पलामू से घूरन राम को उम्मीदवार बनाया है। राजद के इस फैसले से कांग्रेस नाराज है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा है कि पार्टी चतरा में अपना उम्मीदवार देगी। अजय कुमार ने इस संबंध में राजद के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा से बातचीत कर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। इस पर राणा ने कहा कि पलामू में दोस्ताना संघर्ष होगा। अजय कुमार ने कहा कि गठबंधन में दोस्ताना संघर्ष जैसी कोई बात नहीं होती। 

हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि कांग्रेस पलामू में उम्मीदवार नहीं देगी लेकिन इसका कोई असर राजद पर नहीं पड़ा और वह दोनों सीटों पर लड़ने पर आमादा है। जाहिर है कि सीटों के बंटवारे से नाराज राजद महागठबंधन से अलग हो गया। ऐसे में अब कांग्रेस भी पलामू में अपना उम्मीदवार दे सकती है। वामदलों ने महागठबंधन से पहले ही किनारा कर लिया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता का कहना है कि वामदलों ने महागठबंधन में सिर्फ एक सीट की मांग की थी, क्योंकि हजारीबाग सीट पर पहले भी भाकपा दो बार जीत चुकी है। इसके बावजूद उनकी बातें नहीं मानी गयीं। इसलिए वामदलों ने अपने जनाधार वाले क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला किया है। भाकपा ने हजारीबाग और दुमका से अपने उम्मीदवार की घोषणा भी कर दी है। हजारीबाग से पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता और दुमका से सेनापति मुर्मू भाकपा के उम्मीदवार घोषित किये गये हैं। 

 

यह भी पढ़ें "text-align: justify;">भाकपा राजमहल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कोडरमा में भाकपा माले के उम्मीदवार का समर्थन करेगी। गौरतलब है कि कोडरमा में लगातार पिछले दो चुनावों में भाकपा माले के राजकुमार यादव दूसरे स्थान पर रहे हैं। राजमहल में भी माकपा का मजबूत जनाधार माना जाता है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव गोपीकांत बक्शी ने कहा है कि उनकी पार्टी को महागठबंधन से कोई सरोकार नहीं है। बिना किसी मकसद के महागठबंधन राज्य में बना है। सीट देने, नहीं देने की कोई बात नहीं है। राजद और वामदलों की ओर से कई लोकसभा क्षेत्रों में उम्मीदवार खड़ा करने से महागठबंधन के उम्मीदवारों को नुकसान होना स्वाभाविक है। इसका लाभ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवारों को होगा। राज्य में एनडीए के दोनों घटक दल भाजपा और आजसू इस बार आपस में समझौता कर लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। 

 

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा और आजसू अलग-अलग कई क्षेत्रों में लड़े थे। इस बार भाजपा ने अपनी परंपरागत गिरिडीह सीट आजसू के लिए छोड़ दी है जबकि भाजपा खुद 13 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। गिरिडीह सीट पर आजसू ने राज्य के पेयजल और स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी को उतारा है। एनडीए की ओर से खासतौर पर भाजपा की ओर से भी लगभग सभी सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान हो गया है। महागठबंधन में कुछ सीटों पर पार्टी के नेताओं द्वारा ही विरोध किया जा रहा है, जिसका खमियाजा भी विपक्षी दलों को भुगतना पड़ेगा। गोड्डा सीट भले झाविमो के खाते में चली गई है लेकिन महागठबंधन के उम्मीदवार प्रदीप यादव को यहां कांग्रेसी दिग्गज फुरकान अंसारी की नाराजगी झेलनी पड़ेगी। सिंहभूम सीट पर भी बागुन सुंब्रई के बेटे हिटलर सुंब्रई ने दावा ठोका था लेकिन कांग्रेस ने चाईबासा से हाल ही कांग्रेस में शामिल हुई गीता कोड़ा को टिकट दिया है। 

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जानकारों की मानें तो सूबे में जिस प्रकार का सियासी समीकरण है उसके लिए महागठबंधन के दलों को एकजुट रहना जरूरी है, क्योंकि वोटों के बिखराव का सीधा फायदा एनडीए को होगा। झारखंड में महागठबंधन ने जिस प्रकार की रणनीति को ध्यान में रखकर सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय किया है वह तभी कामयाब होगा जब झामुमो, कांग्रेस, झाविमो, राजद और यहां तक की लेफ्ट भी एक छतरी के नीचे आयें। फिलहाल इसकी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। हालांकि महागठबंधन के सहयोगी कांग्रेस, झामुमो और झाविमो राजद को चतरा सीट से अपना उम्मीदवार वापस लेने पर जोर दे रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि वह नाम वापसी की अंतिम तिथि 12 अप्रैल तक इंतजार करेगी। कांग्रेस को भरोसा है कि तबतक चतरा और पलामू का मामला सुलझ जायेगा। 

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