संजीवनी टुडे

लोकसभा चुनाव :झारखंड में सिरे नहीं चढ़ रहा महागठबंधन का अभियान

संजीवनी टुडे 01-04-2019 20:58:50


हजारीबाग। झारखंड में लोकसभा सीटों के लिए प्रथम चरण (पूरे देश के हिसाब से चौथा चरण) के लिए कल अधिसूचना जारी होने के साथ ही चतरा, लोहरदगा और पलामू सीट के लिए नामांकन का कार्य प्रारंभ हो जाएगा। भले ही नामांकन का काम मंगलवार से प्रारंभ होगा, लेकिन अब तक कांग्रेस ने महागठबंधन में अपने हिस्से की 7 सीटों एवं भाजपा ने चतरा, रांची और कोडरमा 3 सीटों के लिए प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। संभावना है कि एक दो दिनों में दोनों दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा कर दी जा सकती है। चुनाव के लिए राज्य के सभी 14 सीटों हेतु भाजपा, महागठंधन व अन्य दलों द्वारा तैयारी कर ली गई है। भाजपा विरोधी दलों के कदम को देखते हुए कहा जा सकता है कि राज्य में 14 में से कम से कम आधे से अधिक 8 सीटों पर भाजपा विरोधी महागठबंधन सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। कहने के लिए महागठबंधन में शामिल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा एवं झारखंड विकास मोर्चा राज्य के सभी 14 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को घेरने की बात कह चुके हैं, लेकिन स्थिति ऐसी नहीं दिख रही। चतरा एवं पलामू सीट पर तो महागठबंधन में शामिल राजद के कारण ही भाजपा को घेरने की रणनीति हवा होती दिख रही है। चतरा सीट पर राजद ने बिहार के बालू व्यवसायी सुभाष यादव को टिकट दे दिया है, जबकि यह सीट महागठबंधन के तहत कांग्रेस के हिस्से में दी गई है।

यहां भाकपा ने भी अरुण महतो को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। चतरा सीट पर राजद द्वारा दावा न छोड़े जाने की स्थिति में संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस भी पलामू सीट पर प्रत्याशी उतार सकता है। ऐसे में चतरा एवं पलामू सीट पर भाजपा के विरोध में महागठबंधन के एक होने की संभावना नहीं दिख रही और दोस्ताना संघर्ष होने के आसार अधिक हैं। इसी प्रकार कोडरमा लोकसभा सीट पर महागठबंधन से झारखंड विकास मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी भाजपा के खिलाफ ताल ठोक रहे हैं। इसी सीट पर भाकपा माले के राजकुमार यादव चुनावी मैदान में है। दोनों भाजपा के साथ साथ एक दूसरे के खिलाफ भी चुनाव मैदान में नजर आएंगे। स्वाभाविक है कि इस सीट पर भी केवल भाजपा को घेरने का विपक्षी प्रयास हवा होगा। हजारीबाग लोकसभा सीट की चर्चा करें तो भाजपा द्वारा केन्द्रीय मंत्री सह वर्तमान सांसद जयंत सिन्हा के खिलाफ भाकपा के भुवनेश्वर मेहता ने ताल ठोक दिया है।

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यहां अब तक महागठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में इस सीट पर भी भाजपा के प्रत्याशी को घेरने का विपक्ष का अरमान धरा का धरा रहने वाला है। धनबाद लोकसभा सीट की चर्चा करें तो यहां से भाजपा के पीएन सिंह के खिलाफ महागठबंधन मेंं कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। सूचना है कि मार्क्सवादी समन्वय समिति इस सीट से चुनाव लड़ सकती है। ऐसे में यहां भी भाजपा विरोधी वोटों के बंटवारे से इन्कार नहीं किया जा सकता। संथाल की तीन लोकसभा सीट दुमका, राजमहल एवं गोड्डा की भी स्थिति कमोबेश उपरोक्त लोकसभा सीटों जैसी ही हैं। दुमका से झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन का चुनाव लड़ना तय हैं। वे महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में भाजपा से दो-दो हाथ करेंगे।

महागठबंधन द्वारा हजारीबाग सीट भाकपा के लिए न छोड़े जाने से बौखलाए भाकपा ने दुमका से संथाल सेनापति मुर्मू को उम्मीदवार बनाया है। राजमहल सीट से महागठबंधन प्रत्याशी के रूप में झामुमो प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी से दो-दो हाथ करेंगे, लेकिन यहां तीसरा कोण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के प्रत्याशी होंगे। गोड्डा लोकसभा सीट की स्थिति भी ऐसी ही है। यहां महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में झाविमों के प्रदीप यादव चुनाव लड़ रहे हैं।

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वे भाजपा प्रत्याशी निशिकांत दूबे से दो-दो हाथ करेंगे। यहां भी तीसरे कोण के रूप में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के प्रत्याशी चुनाव मैदान में दिखेंगे। इस सीट पर कांग्रेस के वरीय नेता फुरकान अंसारी की रणनीति आने वाले समय में देखा जाना तय है। वे भी दूसरे किसी दल से भाग्य आजमा सकते हैं। चाईबासा, लोहरदगा, गिरिडीह, खुंटी, रांची एवं जमशेदपुर सीटों की चर्चा है। यहां महागठबंधन अभी तक भाजपा विरोध की राजनीति अकेले करता दिख रहा है, लेकिन नामांकन होने तक यही स्थिति रहेगी, ऐसा दावे के साथ नहीं कहा जा सकता। राज्य के 14 सीटों में से 8 सीटों पर तय है कि भाजपा विरोधी वोटों का बिखराव होगा और विपक्षी पार्टियां दोस्ताना संघर्ष करती दिखेंगी। 

 

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