संजीवनी टुडे

जोगाड़ टेक्नोलॉजी से वोटों की सेंधमारी की कोशिश, चखना-चबेना से भी मतदाताओं को करेंगे संतुष्ट

संजीवनी टुडे 28-04-2019 22:10:19


नई दिल्ली। देश में चौथे और झारखंड में पहले चरण में पलामू, चतरा और लोहरदगा में एक दिन बाद 29 अप्रैल को मतदान होना है। 27 अप्रैल की शाम चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद अब डोर-टू-डोर कैंपेन का रोमांच चरम पर है। रविवार की रात में असली खेल होने वाला है। सभी उम्मीदवार बूथों पर ध्यान कॉन्संट्रेट करने के साथ ही मतदाताओं को चखना-चबेना से भी संतुष्ट करने वाले हैं। जोगाड़ टेक्नोलॉजी से वोटों की सेंधमारी की कोशिश हो रही है, लेकिन किसे सफलता मिलेगी और किसका भाग्य चमकेगा यह 23 मई को मतगणना के दिन ही स्पष्ट होगा। 

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पलामूः भाजपा की राजद से सीधी टक्कर, लोग जप रहे नमो-नमो 
पलामू में भाजपा के विष्णु दयाल राम (वीडी राम) दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए एक बार फिर उन्हें टिकट दे दिया और हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो क्षेत्र में उनकी स्थिति सबसे अधिक मजबूत है। वे आगे चल रहे है। पिछला लोकसभा चुनाव भी उन्होंने बड़े अंतर से जीता था। विपक्षी गठबंधन के तहत यह सीट इस बार राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कोटे में गई है। यहां से घूरन राम को उम्मीदवार बनाया गया है। चतरा में विपक्षी गठबंधन दरकने का असर यहां नहीं दिख रहा है। विपक्ष में फूट के बावजूद पलामू लोकसभा क्षेत्र में घटक दलों के बीच रिश्ता तल्ख नहीं हुआ है। जमशेदपुर से आकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के दुलाल भुइयां ने अपनी पत्नी अंजना भुइयां के साथ चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया, पर वे सफल नहीं हुए। चुनाव मैदान में उनकी उपस्थिति कुछ खास नहीं दिख रही है, जबकि पलामू लोकसभा क्षेत्र में भुइयां वोट ठीक-ठाक है। भाजपा के लोग वीडी राम पर संगठन से दूर रहने का आरोप जरूर लगाते हैं, पर उम्मीदवार से अधिक नमो-नमो ही जप रहे हैं। पलामू में भी मोदी फैक्टर काफी हावी है। 

लोहरदगाः हैट्रिक लगाने के इरादे में सुदर्शन, मोदी की सभा के बाद बदली हवा 
लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सुदर्शन भगत तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं तथा विपक्षी गठबंधन से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व लोहरदगा विधायक सुखदेव भगत पहली बार सांसद बनने के लिए भाग्य आजमा रहे हैं। दोनों सरना आदिवासी हैं। इन दोनों भगतों के बीच ही मुख्य मुकाबला होगा। सुदर्शन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में राज्य मंत्री हैं। इस बार हैट्रिक लगाने के इरादे से चुनाव मैदान में उतरे हैं। पिछला चुनाव वे महज साढ़े छह हजार वोट से जीते थे। जिस गुमला विधानसभा क्षेत्र में उनका घर पड़ता है, वहीं से वे पिछड़ गये थे। पिछले चुनाव 2014 में बिशुनपुर से चमरा लिंडा ने भी लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार वे चुनाव मैदान में नहीं हैं। फिलहाल वे झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से विधायक हैं। हालांकि इस चुनाव में वे विपक्षी गठबंधन से नाराज चल रहे हैं। अभी तक खुलकर उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार सुखदेव भगत के समर्थन में चुनाव प्रचार नहीं किया है। वैसे पूरे लोकसभा क्षेत्र पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी के स्टार प्रचारक और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोहरदगा में विशाल जनसभा के बाद वहां की हवा बदली है। फिजां में कमल के तैरने की संभावना बढ़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस क्षेत्र के ईसाई मतदाता भी बंटते नजर आ रहे हैं। कुछ चर्च ग्रुप भाजपा के समर्थन में भी नजर आ रहे हैं। 

 

 

चतराः त्रिकोणीय मुकाबला में भाजपा की स्थिति मजबूत

चतरा संसदीय सीट से भाजपा ने वर्तमान सांसद सुनील कुमार सिंह पर ही भरोसा जताया है। साथ ही मोदी फैक्टर से भी उन्हें काफी मदद मिली। इसके साथ ही यहां उनकी ही पार्टी के बागी और अब पार्टी से निष्कासित चतरा जिला परिषद के उपाध्यक्ष राजेंद्र साहू ताल ठोंक रहे हैं। हालांकि भाजपा के स्टार प्रचारक व देश के प्रधानमंत्री मोदी के रांची में रोड शो और लोहरदगा में विशाल जनसभा के बाद अपने जातीय वोट पर उछल रहे राजेंद्र साहू की हवा निकल गई है। साथ ही दो दिन पहले भाजपा ने उन्हें पार्टी से भी छह सालों के लिए निकाल दिया। कांग्रेस ने हजारीबाग जिला के बरही विधानसभा क्षेत्र से विधायक मनोज यादव को चतरा लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है। मनोज को टिकट मिलने के साथ ही क्षेत्र में जातीय समीकरण के असमंजस में पड़ जाने का अहसास हुआ। राजद प्रत्याशी सुभाष यादव ने विपक्षी गठबंधन तोड़ कर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है। क्षेत्र में सरना और ईसाई मिलाकर लगभग दो लाख आदिवासी वोटर हैं। यहां यादव और मुस्लिम वोटों का बिखराव निश्चित है और इससे भाजपा की राह आसान हो जायेगी। राजद ने लालू प्रसाद यादव के करीबी माने जानेवाले सुभाष यादव को अपनी पार्टी का टिकट देकर उम्मीदवार बनाया है। यहां विपक्षी गठबंधन में फूट ने पार्टी की राह आसान नहीं रहने दी है। इस बार विपक्षी गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के खाते में गयी थी। इसके बावजूद राजद ने भी यहां से अपना उम्मीदवार उतार दिया। स्वाभाविक तौर विपक्षी गठबंधन में दो फाड़ होने का फायदा भाजपा को मिलना तय है। 

 

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चुनाव से ठीक पहले राजद के कद्दावर नेताओं ने पाला बदला
लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राजद के कद्दावर नेताओं अन्नपूर्णा देवी, गिरिनाथ सिंह और जनार्दन पासवान को अपने पाले में खींच भाजपा ने राजद को करारा झटका दिया। चतरा में महागठबंधन दरक चुका है। यहां राजद से सुभाष यादव मैदान में हैं तो कांग्रेस ने अपने विधायक मनोज यादव को उतारा है। भाजपा ने सांसद सुनील सिंह को फिर मौका दिया है। यहां कांग्रेस को अंतिम जीत 1984 में मिली थी।

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