संजीवनी टुडे

अंतिम चरण में बिहार में प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा का भी होगा इम्तिहान

संजीवनी टुडे 15-05-2019 17:08:53


पटना। लोकसभा के सातवें और आखिरी चरण के चुनाव में बिहार में केवल चार केन्द्रीय मंत्रियों की ही नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है. बिहार से सटे उत्तरप्रदेश की वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमन्त्री की जीत पक्की दिख रही है . उनकी इस मज़बूत स्थिति का वाराणसी से सटे बिहार के बक्सर और सासाराम सीट पर भी प्रभाव पड़ना लाजिमी है. सवाल यह भी उठना स्वाभाविक है कि जब प्रधानमंत्री वाराणसी से चुनाव जीत सकते हैं तो अपनी लोकसभा सीट से लगभग 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सासाराम और बक्सर में मोदी लहर के बीच भाजपा का उम्मीदवार क्यों नहीं जीत सकता ? सातवें और अंतिम चरण में प्रधानमंत्री की लोकसभा सीट वाराणसी में भी चुनाव होना है. पाटलिपुत्र तथा पटना साहिब समेत इन सीटों पर पार्टी की जीत के लिए प्रधानमंत्री भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. दरअसल इसके लिए सासाराम और बक्सर में उन्होंने मंगलवार को सभा की और पाटलिपुत्र के पालीगंज में बुधवार को भी उन्होंने सभा को सम्बोधित किया. इन सभी सीटों पर एक साथ अंतिम चरण में चुनाव निर्धारित है।  

अंतिम चरण के चुनाव में बिहार में जिन चार केन्द्रीय मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है उनमें रविशंकर प्रसाद, आरके सिंह, अश्विनी कुमार चौबे और रामकृपाल यादव शामिल हैं | भाजपा की ओर से पटना साहिब में रविशंकर प्रसाद, पाटलिपुत्र में रामकृपाल यादव , बक्सर में अश्विनी कुमार चौबे और आरा में आर के सिंह मैदान में हैं | पटना साहिब के चुनाव पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं और इस सीट पर भाजपा का “लिटमस टेस्ट” होना है | सवर्णों की नाराजगी के कारण पाटलिपुत्र सीट भी भाजपा के लिए चुनौती बन गई है | बक्सर के वर्तमान सांसद की बेरुखी और उनकी आम जनता के बीच अनुपलब्धता से इस लोकसभा क्षेत्र के मतदाता उनसे खासे नाराज़ हैं | मसलन यहाँ भाजपा को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है | आरा की सीट से केन्द्रीय राज्य मंत्री और पूर्व आई ए एस पदाधिकारी आर के सिंह मैदान में हैं और उनकी स्वच्छ छवि का फायदा तो उन्हें मिल रहा है किन्तु आम लोगों से उनकी दूरी से यहाँ के मतदाता में आक्रोश भी है | 

पटना साहिब से केन्द्रीय क़ानून मंत्री तथा राज्यसभा सदस्य रविशंकर प्रसाद का सामना उनके पुराने साथी और इस क्षेत्र के भाजपा सांसद के रूप में दो – दो बार संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके शत्रुघ्न सिन्हा उर्फ़ बिहारी बाबू से हो रहा है | शत्रुघ्न सिन्हा इस बार महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं | लम्बे समय तक बाग़ी नेता के रूप में राजनीति करने के बाद बिहारी बाबू ने इस वर्ष 6 अप्रैल को भाजपा का दामन छोड़ कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी | शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर प्रसाद दोनों एक ही एक जाति से आते हैं और दोनों ही अपनी इस जाति के लोगों को अपने पाले में करने का प्रयास कर रहे हैं | शत्रुघ्न सिन्हा को महागठबंधन के प्रमुख घटक राजद में मुस्लिम-यादव समीकरण पर भरोसा है और साथ-साथ कांग्रेस के पारम्परिक वोटरों पर भी भरोसा है | सवर्णों की भाजपा से नाराज़गी का भी कुछ लाभ शत्रुघ्न सिन्हा लेना चाह रहे हैं | इस क्षेत्र से अपनी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद से 26 मार्च से ही गहन चुनाव प्रचार कर रहे रविशंकर प्रसाद को भाजपा के काडर वोट पर भरोसा है | 

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रविशंकर प्रसाद और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच कांटे की टक्कर है | रविशंकर प्रसाद अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से कड़ी मेहनत कर रहे हैं जबकि शत्रुघ्न सिन्हा का चुनाव प्रचार अभी तक पूरी तरह परवान भी नहीं चढ़ा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से दूरी बनाने वाली बसपा और समाजवादी पार्टी के गठबंधन में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं अपनी पत्नी पूनम सिन्हा के नामांकन से लेकर उनके चुनाव प्रचार तक के लिए शत्रुघ्न सिन्हा लखनऊ की दौड़ लगाते रहे हैं | इसके अलावा कांग्रेस में स्टार प्रचारक होने के नाते अन्य स्थानों पर भी उन्हें अपना समय देना पड़ रहा है जिससे वह अपने ही लोकसभा क्षेत्र में अभी तक जोरदार प्रचार नहीं कर पाए हैं | पूनम सिन्हा शत्रुघ्न सिन्हा के लिए प्रचार कार्य में जुट गयी हैं किन्तु विदेश में शूटिंग में व्यस्त रहने के कारण बिहारी बाबू की बेटी सोनाक्षी सिन्हा के लिए अपने पिता के लिए वोट माँगना सम्भव नहीं हो पा रहा है | उनकी जगह बिहारी बाबू के दोनों पुत्र कमान सम्भाले हुए हैं | शत्रुघ्न सिन्हा के लिए 16 मई को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का रोड शो प्रस्तावित है | 

इस बीच रविशंकर प्रसाद के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के कद्दावर नेताओं के साथ भव्य रोड शो किया है | देखना दिलचस्प होगा कि पटना साहिब के मतदाता किसे “खामोश” करते हैं ? पाटलिपुत्र लोक सभा सीट पर इस बार फिर रामकृपाल यादव (चाचा) – मीसा भारती (भतीजी) का मुकाबला है. पिछली बार भतीजी चाचा से हार गई थीं | दरअसल राजद अध्यक्ष लालू यादव की सबसे बड़ी पुत्री मीसा भारती केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव को चाचा कह कर बुलाती रही हैं  क्योंकि रामकृपाल यादव लालू यादव के भरोसेमंद थे और उनका राजनीतिक जीवन लालू यादव की छत्रछाया में फलाफूला था | 

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पिछले लोकसभा चुनाव में रामकृपाल को उम्मीदवार नहीं बना कर लालू यादव ने अपनी बेटी मीसा को पाटलिपुत्र से उम्मीदवार बनाया था | इससे नाराज़ रामकृपाल राजद छोड़ भाजपा में शामिल हो गए थे और पिछले लोकसभा चुनाव इस सीट से जीत कर सांसद बने थे।  बाद में लालू यादव ने मीसा को राज्यसभा भेज दिया। इस बार भतीजी मीसा चाचा को कड़ी टक्कर दे रही हैं | इस सीट के जातीय समीकरण में सवर्णों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है और किसी भी उम्मीदवार की जीत में यह वर्ग महत्वपूर्ण है | 

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