संजीवनी टुडे

भितरघात के भंवर में फंस सकती है कांग्रेस

संजीवनी टुडे 20-04-2019 13:19:09


बिलासपुर। विधानसभा में भारी-भरकम जीत के बाद कांग्रेस का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है। केंद्र में सरकार की जुगत में कांग्रेस ने अपनी नीतियों में परिवर्तन किया है। पार्टी संगठन एक ओर दूसरी पार्टियों से घर वापसी करने वाले नेताओं पर भी भरोसा नहीं कर रही है तो वहीं आत्मविश्वास के कारण भितरघातियों से सतर्क नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस पार्टी के नए फार्मूले के तहत चुने नए चेहरे और भितरघात की भंवर उनकी नैया डुबाे सकती है।

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भीतरघात की बात करें तो 15 साल से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस के सिपेसलारों की निष्ठा का डगमगाना नए चेहरों पर भारी पड़ सकता है। पिछले दिनों दूसरी पार्टियों से कई नेताओं ने कांग्रेस में प्रवेश किया, जिसे लेकर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखने को मिला। 

यदि यह रोष बरकरार रहता है तो पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित होगा, वहीं भाजपा के अभेद गढ़ बने बिलासपुर लोकसभा में तथाकथित फूल छाप कांग्रेसियों के नेतृत्व और उनकी सेना के बल पर किसी जीत की कल्पना करना कांग्रेस के लिए भारी पड़ सकता है। 

विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने विधायकों और हारे हुए उम्मीदवारों की बैठक लेकर भितरघातियों की लंबी सूची तैयार की थी, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया। जिसके कारण उनके हौसले बुलंद हुए हैं।

बिलासपुर लोकसभा में भी कांग्रेस के लिए अपनी निष्ठा दिखाने और बीजेपी के लिए धड़कने वाले दिलों की कमी नहीं है। कांग्रेसी नेताओं की माने तो कुछ कट्टर कांग्रेसी हैं, लेकिन बीजेपी नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक से नजदीकी इस दावे को खोखला करती है। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके धरमलाल राजनीति के खिलाड़ी माने जाते हैं। 

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इस पद को संभाल चुके बीजेपी चाणक्य रहे नेता से मुलाकात और प्रेमभाव राजनीतिक हलचल और कयासों को जन्म देता है। समय का पहिया थोड़ा पीछे घुमाएं तो विधानसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की शिकायत थी कि भितरघातियों ने उनका साथ नहीं दिया। अब इन नए उम्मीदवारों को इस बात का डर सता रहा है कि इन भितरघातियों के बीजेपी के प्रति निष्ठा से निकली बदले की आग अब उन्हें न झुलसा दे। 

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