संजीवनी टुडे

भदोही में ब्राह्मणों ने 2009 में पहली बार शंख बजाकर दौड़ाया था हाथी

संजीवनी टुडे 15-04-2019 15:39:01


भदोही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से लगी भदोही लोकसभा सीट पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यहां पहली बार 2009 में बसपा से पंड़ित गोरखनाथ पांडेय ने हाथी दौड़ाने में सफलता हासिल की थी। तब बसपा का यह नारा सच साबित हुआ था कि ब्राह्मण शंख बजाएगा हाथी दौड़ा जाएगा। इस बार भी साढ़े तीन लाख से ज्यादा ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। भाजपा ने भले ही यहां से उम्म्मीदवार अभी तक घोषित नहीं किया है, लेकिन उसे मोदी मैजिक चलने का फिर यकीन है तो गठबंधन की ओर से अपनी जीत के दावे किये जा रहे हैं। मोदी मैजिक की वजह से यहां 2014 में हाथी को पछाड़ भाजपा के वीरेंद्र सिंह मस्त ने कमल खिलाया। एक फिर जातिवाद और राष्टवाद के बीच जंग छिड़ती दिखती है। भदोही में भाजपा का सीधा मुकाबला सपा-बसपा संयुक्त गठबंधन के उम्मीदवार रंगनाथ मिश्र से है जबकि अभी भाजपा अभी उम्मीदवार नहीं तय कर पायी है।

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परिसीमन के पूर्व भदोही आजाद संसदीय क्षेत्र नहीं था। यह मिर्जापुर-भदोही संसदीय सीट से जाना जाता था। 2009 में चुनाव आयोग के परिसीमन के बाद यह नया चुनावी क्षेत्र बना। मिर्जापुर और भदोही को मिलाकर 1952 से यहां पांच विधानसभाएं थी जिसमें मिर्जापुर की तीन विधानसभाएं और भदोही की औराई, ज्ञानपुर भदोही सदर शामिल थी। आजाद संसदीय क्षेत्र बनने के बाद प्रयागराज जिले के फूलपुर संसदीय क्षेत्र की दो विधानसभाएं हंडिया और प्रतापपुर इसमें शामिल कर ली गयीं। दोनों विधानसभाएं देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु की राजनीतिक कर्मभूमि रही हैं। भदोही की आजाद संसदीय सीट से बसपा के पंड़ित गोरखनाथ पांडेय पहली बार सांसद निर्वाचित हुए, जबकि इसके पूर्व वह भाजपा में थे। भाजपा से वह विधायक भी रह चुके हैं। बाद में पुनः भाजपा में शामिल हो गए। 

बसपा उम्मीदवार पंड़ित गोरखनाथ पांडेय को 2009 में यहां 1,95,808 वोट मिले थे जबकि दूसरे नम्बर पर यहां समाजवादी पार्टी के छोटेलाल बिंद रहे जिन्हें 1,82,845 वोट मिले। जबकि तीसरे रनर कांग्रेस के सूर्यमणि तिवारी को 95,351 वोट हासिल हुए थे। 2009 में यहां कुल 15,19,499 मतदाता पंजीकृत थे। जबकि 6,58,685 वोट डाले गए थे। उस दौरान यहां 43 फीसदी से अधिक वोटिंग हुई थी। जबकि 2012 में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी का का कब्जा हो गया। 2014 में यूपी में भदोही मैजिक चला था। भदोही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिल्कुल पड़ोसी सीट है। भदोही जिला वाराणसी से विभाजित हो कर बना है। लेकिन इस बार सपा-बसपा गठबंन भाजपा को चुनौती देने के लिए तैयार है। गठबंधन ने जहां ब्राह्मण उम्मीदवार उताकर साढ़े तीन लाख से ज्यादा मतों पर ध्यान केन्द्रित किया है, वहीं उसे संसदीय सीट में तीन लाख से ज्यादा ओबीसी वर्ग के बिंद मतदाताओं पर भी भरोसा है। 

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यही वजह है कि भदोही में संयुक्त गठबंधन के मुकाबले भाजपा उम्मीदवार की घोषणा करने में स्थानीय समीकरणों का भी ध्यान दे रही है। पार्टी की ओर से जल्द ही उम्मीदवार की घोषणा करने की बात कही जा रही है। पार्टी किसी ओबीसी उम्मीदवार पर दांव खेल सकती है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक ऐसे में जहां ओबीसी वोट उसके खाते में आ सकते हैं वहीं ब्राह्मणों की पहली पसन्द भी भाजपा है। ऐसे में उसे दोहरा लाभ मिल सकता है। अब देखना होगा कि भदोही के ब्राह्मण मतदाता की पहली पसंद मोदी और कमल रहता है या फिर वह हाथी के लिए शंख बजाता है।

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