संजीवनी टुडे

बारासात संसदीय क्षेत्र : लाल दुर्ग पर चौतरफा मुकाबले के आसार

संजीवनी टुडे 11-05-2019 15:33:06


कोलकाता। रविवार 19 मई को सातवें चरण के मतदान के दिन उत्तर 24 परगना के मुख्य प्रशासनिक केंद्र बारासात संसदीय क्षेत्र में मतदान होना है। आजादी के बाद से लेकर करीब 50 साल तक लाल दुर्ग के तौर पर माकपा के लिए सबसे मजबूत किला रहा बारासात 2009 में तृणमूल के कब्जे में चला गया था। साल 2014 में भी माकपा और कांग्रेस की लाख कोशिशों के बावजूद तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। हालांकि माकपा ने जबरदस्त टक्कर दी थी, लेकिन इस बार राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं।

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राज्य के बाकी हिस्से की तरह इस क्षेत्र में भी भारतीय जनता पार्टी काफी मजबूत बनकर उभरी है और कांग्रेस ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसीलिए  रविवार को यहां चारों प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच चौतरफा मुकाबला होना है। पश्चिम बंगाल में बारासात लोकसभा सीट कोलकाता से सटी हुई है। यह सीट अपने ऐतिहासिक भौगोलिक स्थिति के कारण भी प्रसिद्ध है। संसदीय राजनीति में यह सीट ज्यादातर समय वामपंथी दलों के पास रही है, जहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रतिनिधि संसद पहुंचते रहे हैं।

कहा जाता है कि मुगल काल में जमींदार प्रतापदित्य के कमांडर शंकर चक्रवर्ती को सन् 1600 में बारासात भेजा गया, जहां उन्होंने खुद को स्थापित किया। 1700 में हजरत एकदिल शाह बारासात पहुंचे, जिन्हें सामाज सुधारक के तौर पर जाना जाता है। काजीपारा में उनका मकबरा है। प्रतापदित्य ने जेस्सौर (अब बांग्लादेश में) से कलकत्ता जाने के लिए रास्ते का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि सिराजुदौला बारासात के रास्ते ही मुर्शिदाबाद से कोलकाता पहुंचा था। यही रास्ता बाद में चलकर राष्ट्रीय राजमार्ग बना है। ब्रिटिश शासन के समय यह जगह अंग्रेजों के लिए आरामगाह जैसी बन गई। यहां पर अंग्रेजों ने सुंदर-सुंदर गार्डन और इमारतें बनवाईं। वारेन हेस्टिंग ने बारासात शहर के बीच में अपना महल बनवाया।

बंकिम चंद्र चटर्जी इस शहर के पहले भारतीय डिप्टी मजिस्ट्रेट हुए। जिस तरह से यह सीट ऐतिहासिक है उसी तरह से यहां का संसदीय इतिहास भी ऐतिहासिक रहा है। जिसने भी यहां कब्जा जमाया, लंबे समय तक जमा रहा। साल 2019 तृणमूल कांग्रेस के लिए जीत का हैट्रिक लगाने में मददगार साबित होगा या भारतीय जनता पार्टी के लिए लाल कालीन बिछाएगा, यह देखने वाली बात होगी।

कौन है उम्मीदवार 
पिछले दो बार से जीत रहीं डॉ. काकोली घोष दस्तीदार इस बार भी तृणमूल कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। फॉरवर्ड ब्लॉक से हरपद बिस्वाल खड़े हुए हैं। भाजपा ने मृणाल कांति देबनाथ को टिकट दिया है। दिलचस्प है कि 70 साल के देबनाथ पहली बार लड़ तो रही हैं, वो वोट भी पहली बार ही डालेंगे। बहुजन समाज पार्टी से सुकुमार बाला, कांग्रेस से सुब्रत दत्ता और शिवसेना से बानी चक्रवर्ती उम्मीदवार हैं। 

देबनाथ जब 18 साल की उम्र में पहली बार वोट देने गए थे तब तत्कालीन सत्तारूढ़ पार्टी के लोगों ने उन्हें वोट नहीं देने दिया था और कह दिया था कि आपका वोट पहले ही डाल दिया गया है। उसके बाद वह इतने हतोत्साहित हुए थे कि जीवन में कभी भी वोट नहीं डाला। वह एक मशहूर चिकित्सक हैं और अमेरिका तथा अन्य देशों में भी चिकित्सा के लिए मशहूर रहे हैं। इस बार उम्मीदवार होने के साथ-साथ पहली बार वोट देंगे।

सांसद निधि का किया पूरा इस्तेमाल
पेशे से डॉक्टर काकोली घोष दस्तीदार का परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है। गुरदास दासगुप्ता उनके रिश्तेदार हैं। बारासात संसदीय क्षेत्र के लिए संसदीय निधि के तहत 25 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।इसमें से विकास संबंधी कार्यों के लिए पूरे पैसे मंजूर कर दिये गए, जिनमें से 94.43 फीसदी राशि खर्च की जा चुकी है।

 क्या है पहले का जनादेश
पूर्व में क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा दिए गए जनादेश पर नजर डालें तो 2009 और 2014 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर तृणमूल कांग्रेस की डॉ. काकोली घोष दस्तीदार चुनाव जीतीं। साल 2014 में उन्हें 5 लाख से ज्यादा वोट मिले और उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक के मुर्जता हुसैन के 1,22,901 वोटों से हराया। 80 के दशक से देखें तो 1984 में कांग्रेस के जीतने के बाद लगातार तीन चुनाव फॉरवर्ड ब्लॉक ने जीता। 1998 में पहली बार तृणमूल कांग्रेस ने जीत की दस्तक दी। उसके बाद सिर्फ 2004 ऐसा साल रहा, जब फॉरवर्ड ब्लॉक को जीत मिली, वरना यहां टीएमसी का ही कब्जा है।

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क्या है मतदाताओं का आंकड़ा 
बारासात की ज्यादातर आबादी शहरी है। लोग सांस्कृतिक तौर पर संगीत और कला से जुड़े हुए हैं और सभी धर्मों की इमारतें यहां देखी जा सकती हैं। मतदाता सूची के अनुसार बारासात संसदीय क्षेत्र में 1638780 मतदाता हैं। 2014 के चुनावों में यहां 83.96 फीसदी और 2009 में 83.6 फीसदी वोटिंग हुई थी। बारासात संसदीय क्षेत्र के तहत सात विधानसभाएं आती हैं। इनमें हाबरा, अशोक नगर, राजारहाट न्यू टाउन, बिधाननगर, मध्यमग्राम और देगंगा शामिल हैं। इन सात विधानसभा सीटों में से छह पर तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं।

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