संजीवनी टुडे

इस लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े लूजर रहे अखिलेश

संजीवनी टुडे 24-05-2019 18:38:23


वाराणसी। समाजवादी पार्टी के मुखिया और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सियासी सपने पूरे करने के लिए धुर विरोधी बसपा मुखिया मायावती से गठबंधन कर प्रदेश में 37 सीटों पर लोकसभा का चुनाव लड़ा। परिणाम आने के बाद लोग और उनके आलोचक सोशल मीडिया पर उन्हें चुनाव का सबसे बड़ा लूजर बताने लगे हैं। इनका तर्क है कि चुनाव में अखिलेश ने वही गलती दोहराई जो उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन करके की थी। आलोचकों का कहना है कि अखिलेश ने मायावती से गठबंधन कर उन्हें तो प्रदेश की राजनीति में जिन्दा कर दिया लेकिन खुद वहीं खड़े रह गये, जहां से चले थे। 

अपने फेसबुक वाल पर वरिष्ठ पत्रकार और काशी पत्रकार संघ के पूर्व महामंत्री रामात्मा श्रीवास्तव लिखते हैं कि यदि बसपा मुखिया अपने वोट सपा को ट्रांसफर करवा देतीं और कांग्रेस वोटकटवा की भूमिका में न रहती तो प्रदेश में गठबंधन और मजबूत स्थिति में होता। वरिष्ठ खेल पत्रकार शुभाकर दुबे ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि काश यह तथ्य अखिलेश यादव समझ पाते। माया तो जीरो थीं, उन्हें पांव जमाने के लिए सहारे की जरूरत थी। अखिलेश ने उन्हें सहारा दिया जो उनकी पार्टी के लिये ही घातक सिद्ध हुआ। पत्रकार सत्येन्द्र श्रीवास्तव ने लिखा कि इस चुनाव में अखिलेश सबसे बड़े लूजर हैं। 

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एक समाजवादी कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सफलता से ही व्यक्ति के फैसलों को तोला जाता है। 2017 के पहले अखिलेश भैया प्रदेश के सबसे शालीन और प्रतिभाशाली विकासवादी सोच के नेता माने जाते थे। समय बदला तो लोग सवाल उठा रहे हैं। प्रदेश में जब उन्होंने लोकसभा उपचुनाव में जोखिम उठाकर पार्टी के लिए जीत हासिल की तो सभी उनके फैसले और नजरिये के कायल बन रहे थे लेकिन इन लोकसभा चुनाव परिणामों ने उनके प्रति लोगों की सोच बदल दी है।

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